बाबूलाल मरांडी का गंभीर आरोप: धनबाद में कोयला माफिया-पुलिस गठजोड़, BCCL CMD नहीं है सुरक्षित

धनबाद में कथित पुलिस-कोयला माफिया गठजोड़ को लेकर बाबूलाल मरांडी ने बड़ा हमला बोला है। BCCL CMD को धमकी और केस का मुद्दा उठाते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की।

बाबूलाल मरांडी का गंभीर आरोप: धनबाद में कोयला माफिया-पुलिस गठजोड़, BCCL CMD नहीं है सुरक्षित
मरांडी ने मरांडी ने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की।

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  • बाबूलाल मरांडी ने धनबाद में कथित पुलिस-कोयला माफिया गठजोड़ पर उठाए गंभीर सवाल
  • BCCL CMD मनोज कुमार अग्रवाल को कथित धमकी और छाताबाद भू-धंसान मामले में केस का मुद्दा उठाया
  • केंद्रीय एजेंसियों और CISF की कार्रवाई के बीच BCCL अधिकारियों पर दबाव के आरोप
  • बोले- धनबाद को कानून की रखवाली करने वाली पुलिस चाहिए, कोयला माफिया की सुरक्षा एजेंसी नहीं

धनबाद (Threesocieties.com Desk): झारखंड के कोयलांचल धनबाद में कोयला चोरी और कथित पुलिस-माफिया गठजोड़ को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा विधायक दल के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने इस पूरे मामले को लेकर धनबाद पुलिस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सवाल उठाया है कि जब केंद्रीय एजेंसियां और CISF अवैध कोयला कारोबार के खिलाफ कार्रवाई कर रही हैं, तब BCCL के अधिकारियों पर कथित तौर पर दबाव क्यों बढ़ रहा है।

मरांडी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि धनबाद में अब सवाल सिर्फ कोयला चोरी का नहीं, बल्कि कथित पुलिस-कोयला माफिया गठजोड़ का भी है। उन्होंने BCCL के CMD मनोज कुमार अग्रवाल को कथित रूप से जान से मारने की धमकी मिलने और छाताबाद भू-धंसान मामले में उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने के मुद्दे को भी गंभीर बताया।

BCCL CMD को धमकी पर उठाए सवाल

बाबूलाल मरांडी के मुताबिक, यदि कोयला चोरी के खिलाफ कार्रवाई करने वाले अधिकारियों को ही धमकियों का सामना करना पड़े और उन्हें मुकदमों में उलझाया जाए, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने पूछा कि क्या ये घटनाएं महज संयोग हैं या इनके पीछे किसी बड़े खेल की कड़ियां जुड़ी हुई हैं। उन्होंने वैध कोयला परिवहन करने वाले वाहनों को रोकने, अधिकारियों को मुकदमों में उलझाने और BCCL के अधिकारियों पर कार्रवाई जैसे मामलों का उल्लेख करते हुए पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग की।

‘केंद्रीय एजेंसियों की सख्ती के बाद दबाव क्यों?’

मरांडी ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की बैठक के बाद धनबाद समेत झारखंड में अवैध कोयला कारोबार पर कार्रवाई तेज हुई है। CISF और केंद्रीय एजेंसियों की सक्रियता के बीच कोयला चोरी पर शिकंजा कसने की कोशिश की जा रही है। इसी बीच उनका सवाल है कि यदि अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई हो रही है तो BCCL और उसके अधिकारियों पर दबाव बढ़ने की शिकायतें क्यों सामने आ रही हैं। उनका आरोप है कि यदि वैध खनन और परिवहन व्यवस्था को ही बाधित किया जाता है, तो इससे अवैध कारोबार करने वालों को अप्रत्यक्ष फायदा मिल सकता है।

‘पुलिस कानून के साथ या कोयले के काले कारोबार के साथ?’

बाबूलाल मरांडी ने धनबाद पुलिस की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि यदि कोयला चोरी के खिलाफ आवाज उठाने वाले अधिकारियों और कर्मियों को ही परेशानी का सामना करना पड़े तो यह कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने कहा कि आरोप बेहद गंभीर हैं और इनकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। मरांडी के मुताबिक, यदि किसी अधिकारी को कोयला माफिया से खतरा है और उसे सुरक्षा के लिए न्यायालय की शरण लेनी पड़ रही है, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।

अधिकारियों को धमकाने का आरोप

धनबाद के कोयला क्षेत्रों में अवैध कारोबार को लेकर लंबे समय से तरह-तरह के आरोप सामने आते रहे हैं। इस बीच यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि कोयला चोरी के खिलाफ कार्रवाई करने वाले BCCL अधिकारियों पर दबाव बनाया जाता है। आरोप यह भी हैं कि कुछ मामलों में कोयला कारोबार से जुड़े लोग अधिकारियों के कार्यालय तक पहुंचकर धमकी देते हैं और उनके वाहनों का पीछा कर डराने-धमकाने की कोशिश करते हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और जांच के नतीजे सामने आना बाकी है।

स्वतंत्र जांच की मांग

बाबूलाल मरांडी ने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि कोयला चोरी, अवैध खनन, पुलिस की भूमिका और BCCL अधिकारियों पर कथित दबाव—इन सभी पहलुओं की निष्पक्ष तरीके से जांच होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कोयला, बालू और पत्थर के अवैध कारोबार पर कार्रवाई को लेकर इतनी बेचैनी क्यों है। उनका कहना है कि सत्ता या प्रशासनिक ताकत के जरिए सवालों को दबाया जा सकता है, लेकिन इससे सच्चाई सामने आने से नहीं रुकती।

धनबाद में कानून-व्यवस्था पर बड़ा सवाल

धनबाद देश के प्रमुख कोयला क्षेत्रों में शामिल है और यहां कोयले से जुड़े अवैध कारोबार को लेकर समय-समय पर विवाद सामने आते रहे हैं। ऐसे में BCCL के शीर्ष अधिकारी को कथित धमकी, पुलिस कार्रवाई और केंद्रीय एजेंसियों की सक्रियता के बीच उठे सवालों ने मामले को और गंभीर बना दिया है। बाबूलाल मरांडी ने अपने बयान में साफ संदेश देते हुए कहा कि धनबाद को ऐसी पुलिस चाहिए जो कानून की रक्षा करे, न कि कोयला माफिया की सुरक्षा एजेंसी बने।

अब सवाल यह है कि सरकार और पुलिस प्रशासन इन गंभीर आरोपों पर क्या कार्रवाई करता है और क्या कथित पुलिस-कोयला माफिया गठजोड़ की स्वतंत्र जांच कराई जाती है। यही जांच तय करेगी कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और धनबाद के कोयला कारोबार के पीछे वास्तविक स्थिति क्या है।