CAG Report: झारखंड को ₹327 करोड़ राजस्व का नुकसान, ₹1.60 लाख करोड़ के खर्च का हिसाब लंबित
CAG Report Jharkhand: झारखंड विधानसभा में पेश CAG रिपोर्ट ने सरकारी योजनाओं और वित्तीय प्रबंधन की पोल खोल दी। ₹1.60 लाख करोड़ के उपयोगिता प्रमाण-पत्र लंबित, ₹327.35 करोड़ राजस्व पर असर, मनरेगा में 50.21 लाख काम अधूरे और PM आवास में 6.32 लाख पात्र परिवार लक्ष्य से बाहर।
HighLights:
- ₹1.60 लाख करोड़ से ज्यादा के उपयोगिता प्रमाण-पत्र लंबित
- परिवहन विभाग में ₹327.35 करोड़ के राजस्व पर असर
- मनरेगा में 50.21 लाख काम अधूरे
- मनरेगा मजदूरों की ₹321.84 करोड़ मजदूरी लंबित
रांची (Threesocieties.com Desk): नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट ने झारखंड में सरकारी योजनाओं, राजस्व वसूली और वित्तीय प्रबंधन की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मंगलवार को विधानसभा के पटल पर रखी गयी CAG रिपोर्ट में कई विभागों में नियमों की अनदेखी, राजस्व वसूली में लापरवाही और योजनाओं के क्रियान्वयन में भारी खामियां सामने आयी हैं।
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रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2025 तक ₹1,60,565.80 करोड़ की राशि से जुड़े उपयोगिता प्रमाण-पत्र (Utilisation Certificates) लंबित थे। यानी इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद संबंधित विभाग यह प्रमाणित नहीं कर सके कि धनराशि का इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्य के अनुसार हुआ।
वहीं परिवहन विभाग में अस्थायी पंजीकरण की अवधि से जुड़ी खामी के कारण ₹327.35 करोड़ के राजस्व पर असर पड़ा। इसके अलावा शराब दुकानदारों पर नियमों के उल्लंघन के बावजूद ₹8.35 करोड़ का जुर्माना नहीं लगाया गया।
मनरेगा में 50 लाख से ज्यादा काम अधूरे
CAG ऑडिट में मनरेगा के क्रियान्वयन की स्थिति भी चिंताजनक पायी गयी। वर्ष 2019 से 2024 के दौरान प्रस्तावित कार्यों में केवल 27 फीसदी काम ही पूरे हो सके। करीब 49 फीसदी यानी 50.21 लाख काम अधूरे रह गये। इन अधूरे कार्यों पर करीब ₹2,633 करोड़ खर्च किये जा चुके थे। वहीं मार्च 2025 तक मजदूरों की ₹321.84 करोड़ की मजदूरी लंबित थी। ऑडिट में मनरेगा की राशि से वाहनों की मरम्मत कराने और आउटसोर्सिंग एजेंसियों के कर्मियों को भुगतान किये जाने के मामले भी सामने आये हैं।
जल जीवन मिशन में 24 फीसदी गांवों में नल कनेक्शन नहीं
जल जीवन मिशन की स्थिति भी रिपोर्ट में चिंता का विषय बनी है। झारखंड में केवल 55 फीसदी ग्रामीण परिवारों तक नल से जल पहुंच पाया था, जबकि राष्ट्रीय औसत करीब 80 फीसदी बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार राज्य के करीब 24 फीसदी गांवों में एक भी घर में नल कनेक्शन नहीं था। इससे योजना के लक्ष्य और जमीन पर उसकी उपलब्धि के बीच बड़ा अंतर सामने आया है।
पीएम आवास योजना में पात्र छूटे, अपात्र हुए शामिल
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण में भी लाभुकों के चयन और लक्ष्य निर्धारण में गंभीर गड़बड़ियां सामने आयी हैं। राज्य में 22.34 लाख पात्र परिवारों की पहचान की गयी थी, लेकिन केंद्र से केवल 16.02 लाख परिवारों का लक्ष्य मिला। यानी करीब 6.32 लाख पात्र परिवार योजना के लाभ से वंचित रह गये। दूसरी ओर, लाभुकों की सूची में 2.90 लाख अपात्र लोगों के नाम शामिल कर दिये गये थे। बाद में इन नामों को हटाया गया। CAG के अनुसार योजना के तहत पूर्ण हो चुके करीब 8 फीसदी आवासों में शौचालय की सुविधा भी नहीं मिली।
305 नाबालिगों को जारी कर दिया गया गियर बाइक का लाइसेंस
परिवहन विभाग में नियमों की अनदेखी का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। ऑडिट के दौरान पांच जिलों में 18 वर्ष से कम उम्र के 305 आवेदकों को गियर वाली मोटरसाइकिल का लाइसेंस जारी किये जाने का पता चला। रिपोर्ट में इसके पीछे सारथी सॉफ्टवेयर में खामी को भी जिम्मेदार बताया गया है। इसके अलावा 6,640 वाहन ऐसे मिले, जिनका अस्थायी पंजीकरण होने के बाद स्थायी पंजीकरण नहीं कराया गया। वहीं 1.24 लाख वाहनों पर टैक्स बकाया पाया गया, जिससे करीब ₹11.24 करोड़ की संभावित राजस्व वसूली प्रभावित हुई।
शराब कारोबार में भी राजस्व वसूली की चूक
उत्पाद विभाग में ऑडिट के दौरान पाया गया कि निर्धारित न्यूनतम स्टॉक नहीं रखने वाले शराब विक्रेताओं पर नियमों के अनुसार कार्रवाई नहीं की गयी। ऐसे मामलों में करीब ₹8.35 करोड़ का जुर्माना लगाया जाना था, लेकिन विभाग की ओर से दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गयी। इससे सरकार को संभावित राजस्व से वंचित होना पड़ा।
GST में ₹343.58 करोड़ की विसंगति
वाणिज्य कर विभाग में GST और ई-वे बिल के आंकड़ों की जांच के दौरान ₹343.58 करोड़ की कर देयता और ITC से जुड़ी विसंगतियां सामने आयीं। कई मामलों में रिटर्न में घोषित कारोबार और ई-वे बिल के आंकड़ों में अंतर पाया गया। ऑडिट में 23 बड़े करदाताओं का मामला भी सामने आया, जिन्होंने आयकर रिटर्न में ₹95.43 करोड़ की बिक्री दिखाई, लेकिन उनका GST पंजीकरण नहीं था। CAG ने विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि इन मामलों की समय पर पहचान कर कार्रवाई नहीं की जा सकी।
वित्तीय प्रबंधन पर भी CAG की कड़ी टिप्पणी
रिपोर्ट में राज्य के पूंजीगत व्यय को लेकर भी चिंता जतायी गयी है। वर्ष 2024-25 में पूंजीगत व्यय पिछले वर्ष की तुलना में ₹2,160 करोड़ कम रहा। CAG के अनुसार पूंजीगत खर्च में कमी का असर परिसंपत्तियों के निर्माण और विकास योजनाओं की गति पर पड़ सकता है।सबसे गंभीर सवाल उपयोगिता प्रमाण-पत्रों को लेकर है। मार्च 2025 तक ₹1,60,565.80 करोड़ से संबंधित उपयोगिता प्रमाण-पत्र लंबित थे। इससे सरकारी धन के इस्तेमाल की निगरानी और वित्तीय जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा होता है।
CAG रिपोर्ट ने कई विभागों की खोली पोल
CAG की रिपोर्ट में परिवहन, वाणिज्य कर, ग्रामीण विकास, पेयजल एवं स्वच्छता तथा उत्पाद विभाग की कार्यप्रणाली में कई खामियां दर्ज की गयी हैं। एक तरफ बड़ी संख्या में पात्र लोग सरकारी योजनाओं के लाभ से बाहर रह गये, वहीं दूसरी तरफ अपात्र लोगों को योजनाओं का लाभ मिलने के मामले सामने आये। राजस्व विभागों में करोड़ों रुपये की वसूली प्रभावित हुई और बड़ी रकम से जुड़े उपयोगिता प्रमाण-पत्र वर्षों तक लंबित रहे।
CAG की रिपोर्ट के बाद अब सरकार और संबंधित विभागों के सामने इन खामियों को दूर करने, जिम्मेदारी तय करने और वित्तीय प्रबंधन को मजबूत करने की चुनौती है।




