EO विमल कुमार हत्याकांड: ड्राइवर ने कबूला कत्ल, पत्नी ने विधायक पर लगाए 50 लाख की वसूली के गंभीर आरोप

बिहार के डेहरी नगर परिषद के EO विमल कुमार हत्याकांड में बड़ा खुलासा। चालक मिथिलेश कुमार ने लोहे की रॉड से हत्या करना कबूला। वहीं मृतक की पत्नी ने विधायक पर 25-50 लाख रुपये मांगने और प्रताड़ित करने के गंभीर आरोप लगाए। जानिए पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट।

EO विमल कुमार हत्याकांड: ड्राइवर ने कबूला कत्ल, पत्नी ने विधायक पर लगाए 50 लाख की वसूली के गंभीर आरोप
डेहरी नगर परिषद के EO विमल कुमार की हत्या का पुलिस ने किया खुलासा।

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HighLights:

  • डेहरी नगर परिषद के EO विमल कुमार की हत्या का पुलिस ने किया खुलासा
  • चालक मिथिलेश कुमार ने लोहे की रॉड से हत्या करने की बात कबूली
  • पत्नी ने विधायक पर 25 से 50 लाख रुपये मांगने और प्रताड़ित करने का आरोप लगाया
  • विधायक ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की

पटना/डेहरी/औरंगाबाद(Threesocieties.com Desk): बिहार के रोहतास जिले के डेहरी नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी (EO) विमल कुमार की हत्या मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। मगध रेंज के आईजी विकास वैभव के मुताबिक, इस सनसनीखेज हत्याकांड का आरोपी कोई बाहरी अपराधी नहीं बल्कि स्वयं उनका चालक मिथिलेश कुमार निकला। आरोपी ने पूछताछ में स्वीकार किया कि उसने वाहन में रखी लोहे की रॉड से सिर पर कई वार कर विमल कुमार की हत्या कर दी।

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हालांकि इस मामले ने अब नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है। मृतक की पत्नी बबीता देवी ने डेहरी के विधायक पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि उनके पति को लगातार प्रताड़ित किया जाता था और उनसे 25 से 50 लाख रुपये की मांग की जाती थी। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और सभी संदिग्धों के नार्को टेस्ट की मांग की है।

ड्राइवर ने कैसे रची हत्या की साजिश?

पुलिस के अनुसार, चालक मिथिलेश कुमार लंबे समय से अधिक ड्यूटी और लगातार डांट-फटकार से परेशान था। घटना वाली रात जब विमल कुमार पटना जा रहे थे, तब चालक ने रास्ते में गाड़ी रोककर पहले वाहन में रखी टायर खोलने वाली लोहे की रॉड निकाली और फिर EO के सिर पर ताबड़तोड़ वार कर उनकी हत्या कर दी। हत्या के बाद आरोपी ने घटना को हादसा और फिर बाहरी हमलावरों का रूप देने की कोशिश की। उसने पहले वाहन पलटाने का प्रयास किया और बाद में अपाची बाइक सवार बदमाशों द्वारा हत्या की झूठी कहानी गढ़ दी।

बदलते बयान से खुला राज

आईजी विकास वैभव ने बताया कि शुरुआत से ही चालक के बयान संदिग्ध थे। पहले उसने दो अपाची बाइक सवार हमलावरों की बात कही, फिर एक बाइक का दावा किया। लगातार बदलते बयानों के बाद पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की, जिसमें उसने हत्या की पूरी साजिश स्वीकार कर ली। आरोपी की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त लोहे की रॉड भी नहर से बरामद कर ली गई है।

पत्नी ने विधायक पर लगाए गंभीर आरोप

पोस्टमार्टम के बाद जब विमल कुमार का शव पटना स्थित आवास पहुंचा तो पत्नी बबीता देवी ने मीडिया के सामने भावुक होकर कई गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि डेहरी के विधायक अक्सर उनके पति को फोन कर बुलाते थे और कभी 25 लाख तो कभी 50 लाख रुपये की मांग करते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी दबाव के कारण उनके पति लंबे समय से मानसिक तनाव में थे। बबीता देवी ने कहा कि उन्होंने कई बार पति से डेहरी छोड़कर किसी अन्य स्थान पर तबादला कराने की सलाह दी थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।

'29 जुलाई को विधायक से हुई थी मुलाकात'

पत्नी के अनुसार, 29 जुलाई को विमल कुमार विधायक से मिलने गए थे। हालांकि उन्होंने घर लौटकर मुलाकात की कोई जानकारी साझा नहीं की। अब उन्हें आशंका है कि उसी मुलाकात के बाद घटनाक्रम ने गंभीर मोड़ लिया। उन्होंने यह भी दावा किया कि घटना के बाद सबसे पहले चालक ने फोन कर बताया कि अपाची बाइक सवार अपराधियों ने उनके पति की हत्या कर दी है, जबकि बाद में पुलिस जांच में यह कहानी झूठी निकली।

नार्को टेस्ट की मांग

बबीता देवी ने चालक समेत सभी संदिग्ध लोगों का नार्को टेस्ट कराने की मांग करते हुए कहा कि केवल निष्पक्ष और वैज्ञानिक जांच से ही पूरे हत्याकांड की सच्चाई सामने आएगी। उन्होंने दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की।

विधायक सोनू सिंह ने आरोपों को बताया निराधार

पत्नी के आरोपों के बाद डेहरी के लोजपा (रामविलास) विधायक राजीव रंजन सिंह उर्फ सोनू सिंह ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि उनका किसी अधिकारी से कोई व्यक्तिगत विवाद नहीं था। जनता के कार्यों को लेकर वे अधिकारियों से बात करते रहते हैं, लेकिन किसी प्रकार की धन उगाही या दबाव बनाने का आरोप पूरी तरह झूठा है।

विधायक ने बताया कि घटना से एक दिन पहले एक सरकारी कार्यक्रम में उनकी विमल कुमार से मुलाकात हुई थी। उस दौरान EO काफी परेशान नजर आ रहे थे और उन्होंने खुद यहां से तबादला कराने की इच्छा जताई थी। उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और नगर परिषद में हुए कार्यों एवं भुगतान की भी जांच की मांग की है।

पुलिस क्या कह रही है?

मगध रेंज पुलिस का कहना है कि अब तक की जांच में चालक मिथिलेश कुमार के अलावा किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता के साक्ष्य नहीं मिले हैं। हालांकि पत्नी द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है। यदि नए तथ्य सामने आते हैं तो उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

कार्यपालक अधिकारियों में आक्रोश; शव लेकर CM आवास जाने पर अड़े

डेहरी नगर परिषद के कार्यपालक अधिकारी विमल कुमार की हत्या के बाद राज्य के कार्यपालक अधिकारियों में भारी आक्रोश है। दानापुर स्थित उनके आवास पर रविवार को बड़ी संख्या में कार्यपालक अधिकारी पहुंचे और शोक व्यक्त करने के साथ सरकार से तत्काल सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की। अधिकारियों ने कहा कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो राज्यव्यापी आंदोलन किया जाएगा। यहां तक कि चक्का जाम और गंगा में जलसमाधि लेने जैसे कदम उठाने की भी चेतावनी दी गई।

रोहतास में पोस्टमार्टम के बाद विमल कुमार का पार्थिव शरीर दानापुर स्थित उनके आवास लाया गया। यहां नगर विकास विभाग के विभिन्न नगर निकायों से पहुंचे कार्यपालक अधिकारियों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। उनका शव लेकर बूसा (Bihar Urban Service Association) अंतर्गत कार्यपालक अधिकारी सीएम हाउस के लिए रवाना हो गए। हालांकि टी प्वाइंट के पास पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया है।  लेकिन वे आगे बढ़ने पर अड़े रहे।कहाा गया कि यदि उन्हें आगे नहीं जाने दिया जाएगा तो यहां पर प्रधान सचिव व अन्य अधिकारियों को बुलाएं

डेढ़ वर्षों में हत्या की दूसरी घटना 
इसके बाद मीडिया से बातचीत में अधिकारियों ने कहा कि यह घटना सिर्फ एक अधिकारी की हत्या नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र पर हमला है। एक अधिकारी ने कहा कि विमल कुमार उनके वरिष्ठ सहयोगी थे। उन्होंने बताया कि पिछले करीब डेढ़ वर्ष में कार्यपालक अधिकारियों की हत्या की यह दूसरी घटना है, जबकि जानलेवा हमले की यह तीसरी वारदात है। इसके बावजूद नगर विकास एवं आवास विभाग और सरकार ने अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया और ऐसी दुखद घटना हो गई।  उन्होंने कहा कि पूर्व में भी मुख्यमंत्री और विभागीय अधिकारियों से सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की गई थी, लेकिन उस पर अमल नहीं हुआ। उनका कहना था कि यदि अधिकारियों को इसी तरह असुरक्षित माहौल में काम करना पड़ेगा तो एक-एक कर मारे जाने से बेहतर होगा कि सभी सामूहिक रूप से जान दे दें।

'एसडीओ-डीएसपी को सुरक्षा मिलती है तो हमें क्यों नहीं?'

कार्यपालक अधिकारियों ने सवाल उठाया कि जब एसडीओ और डीएसपी जैसे अधिकारियों को सुरक्षा उपलब्ध कराई जाती है तो नगर निकायों के कार्यपालक अधिकारियों को यह सुविधा क्यों नहीं दी जाती। उनका कहना था कि वे भी कानून-व्यवस्था और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लेते हैं। ऐसे में आपराधिक तत्व लगातार उन पर दबाव बनाते हैं और कार्यालयों तक पहुंचकर धमकी देते हैं। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि नगर निकायों के कार्यालयों में बाहरी तत्वों, गुंडों और असामाजिक लोगों का हस्तक्षेप लगातार बढ़ता जा रहा है। जो अधिकारी उनके दबाव में नहीं आते, उन्हें निशाना बनाया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईमानदारी से काम करने वाले अधिकारियों के लिए काम करना मुश्किल होता जा रहा है।

कार्यपालक अधिकारियों ने सरकार से कई मांगें रखीं

सभी कार्यपालक अधिकारियों को सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।
विमल कुमार हत्याकांड की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराकर दोषियों को शीघ्र कड़ी सजा दिलाई जाए।
मृतक अधिकारी के आश्रित को गजेटेड रैंक की सरकारी नौकरी दी जाए।
परिवार को पांच करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो राज्यभर के कार्यपालक अधिकारी आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर चक्का जाम, कार्य बहिष्कार और गंगा में जलसमाधि जैसे कठोर कदम भी उठाए जाएंगे।