विधायक जयराम महतो के समर्थन में उतरे पूर्व सांसद शैलेंद्र महतो, बोले- पूरा झारखंड जयराम के साथ होगा

विधायक जयराम महतो के समर्थन में पूर्व सांसद शैलेंद्र महतो खुलकर सामने आए। उन्होंने झारखंड पुलिस एसोसिएशन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से संबंधित थाना प्रभारी पर कार्रवाई की मांग की। जानिए पूरा मामला।

विधायक जयराम महतो के समर्थन में उतरे पूर्व सांसद शैलेंद्र महतो, बोले-  पूरा झारखंड जयराम के साथ होगा
विधायक जयराम महतो के समर्थन में उतरे पूर्व सांसद शैलेंद्र महतो।

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      HighLights:

  • पूर्व सांसद शैलेंद्र महतो ने पुलिस एसोसिएशन की भूमिका पर उठाए सवाल।
  • दारोगा के पक्ष में एसोसिएशन खड़ी हुई तो पूरा झारखंड जयराम के साथ खड़ा हो सकता है
  • मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से संबंधित थाना प्रभारी पर कार्रवाई की मांग
  • जनप्रतिनिधि और पुलिस के विवाद का समाधान निष्पक्ष जांच से होना चाहिए

जमशेदपुर (Threesocieties.com Desk):  गिरिडीह के डुमरी विधायक जयराम महतो और थाना प्रभारी के बीच विवाद को लेकर झारखंड की सियासत गरमाई हुई है। इस मामले में अब झारखंड आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे पूर्व सांसद शैलेंद्र महतो खुलकर जयराम महतो के समर्थन में उतर आए हैं। उन्होंने झारखंड पुलिस एसोसिएशन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनप्रतिनिधि और पुलिस के बीच विवाद में किसी संगठन का एकतरफा तरीके से एक पक्ष के साथ खड़ा होना उचित नहीं है।

शैलेंद्र महतो ने कहा कि यदि झारखंड पुलिस एसोसिएशन एक दारोगा के पक्ष में खड़ी होगी, तो ऐसी स्थिति नहीं बननी चाहिए कि कल पूरा झारखंड विधायक जयराम महतो के समर्थन में खड़ा हो जाए। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मामले में हस्तक्षेप करते हुए संबंधित थाना प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

जयराम महतो ने ऐसा क्या किया कि गिरफ्तारी या माफी की नौबत आए?

पूर्व सांसद ने कहा कि जयराम महतो ने ऐसा कोई काम नहीं किया है, जिसके लिए उन्हें माफी मांगनी पड़े या उनकी गिरफ्तारी की बात सामने आए। उन्होंने कहा कि किसी भी विवाद की जांच निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए और कानून सभी के लिए समान होना चाहिए।उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि जनता के बीच से चुनकर आते हैं और पुलिस प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने की संवैधानिक जिम्मेदारी निभाता है। दोनों संस्थाओं के बीच किसी तरह का विवाद पैदा होने पर उसका समाधान संस्थागत और कानूनी प्रक्रिया से होना चाहिए।

पुलिस एसोसिएशन की भूमिका पर उठाए सवाल

शैलेंद्र महतो ने कहा कि जनप्रतिनिधि और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी नोकझोंक की घटनाएं पहले भी होती रही हैं। ऐसे मामलों में पुलिस एसोसिएशन का काम किसी एक अधिकारी के पक्ष में खड़ा होना नहीं, बल्कि पूरे मामले को निष्पक्षता से देखना होना चाहिए।  उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पुलिस संगठन अपने एक सदस्य के पक्ष में सामूहिक रूप से खड़ा होता है, तो इससे आम लोगों के बीच गलत संदेश जा सकता है। उन्होंने पुलिस एसोसिएशन से निष्पक्षता बनाए रखने की अपील की।

झारखंड आंदोलन और 1990 की घटना का किया जिक्र

पूर्व सांसद ने अपने झारखंड आंदोलन के दिनों की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने स्वयं पुलिस कार्रवाई और दमन का दौर देखा है। उन्होंने 1990 की एक घटना को याद करते हुए बताया कि उनके आंदोलनकारी साथी रामदास सोरेन, दुलाल भुइयां, गोपाल बनर्जी और प्रमोद लाल को सीतारामडेरा थाना में गिरफ्तार किया गया था। उनके अनुसार, उस समय आंदोलनकारियों के साथ कथित तौर पर मारपीट और अभद्र व्यवहार किया जा रहा था। शैलेंद्र महतो ने कहा कि उस समय वह सांसद थे और अपने साथियों को छुड़ाने के लिए थाने पहुंचे थे।

उन्होंने दावा किया कि थाने में जमशेदपुर के विभिन्न इलाकों से कई दारोगा बुलाए गए थे और आंदोलनकारियों के साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा था। उनके थाने पहुंचने के बाद स्थिति बदली और बाद में आंदोलनकारियों को जेल भेजने की प्रक्रिया पूरी की गई। शैलेंद्र महतो ने कहा कि उस दौर में झारखंड आंदोलनकारियों के साथ पुलिस का रवैया काफी कठोर था, लेकिन पुलिस एसोसिएशन ने आंदोलनकारियों के पक्ष में आवाज नहीं उठाई थी।

‘उल्टा लटकाकर पीटा जा रहा था’ का दावा

पूर्व सांसद ने उस घटना को याद करते हुए कहा कि आंदोलनकारी साथियों के साथ थाने में कथित तौर पर मारपीट की गई थी और उन्हें उल्टा लटकाकर पीटे जाने जैसी कार्रवाई की जा रही थी। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में उन्होंने सांसद रहते हुए हस्तक्षेप किया था।उन्होंने बताया कि बाद में उनके वही आंदोलनकारी साथी राजनीति में आगे बढ़े और विधायक तथा मंत्री भी बने। शैलेंद्र महतो ने इस उदाहरण के जरिए कहा कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों के सम्मान और अधिकारों की रक्षा बेहद जरूरी है।

1983 की घटना का भी दिया उदाहरण

शैलेंद्र महतो ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को वर्ष 1983 की एक घटना की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि उस समय जुगसलाई के तत्कालीन विधायक तुलसी रजक के साथ मनोहरपुर थाना प्रभारी द्वारा कथित अभद्र व्यवहार किए जाने के बाद तत्कालीन सरकार ने थाना प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई की थी। पूर्व सांसद ने कहा कि यदि किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि के साथ थाना स्तर पर अनुचित व्यवहार हुआ है, तो वर्तमान सरकार को भी उसी तरह मामले की गंभीरता से जांच कर उचित कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से संबंधित थाना प्रभारी के खिलाफ अविलंब कड़ी और अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की।

‘जागो भाई, जागो’ का दिया संदेश

शैलेंद्र महतो ने अपनी पुस्तक ‘झारखंड की समरगाथा’ का उल्लेख करते हुए कहा कि झारखंड का निर्माण लंबे संघर्ष, शोषण, दमन और अन्याय के खिलाफ लड़ाई के बाद हुआ है। उन्होंने कहा कि राज्य गठन के 26 वर्ष बाद भी यदि किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि के साथ कथित तौर पर थाने में अभद्र व्यवहार होता है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि गाली-गलौज और अपमानजनक व्यवहार झारखंड की सभ्यता और परंपरा का हिस्सा नहीं है। उन्होंने नई पीढ़ी से लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति सजग रहने का आह्वान करते हुए कहा—‘जागो भाई, जागो।’

विवाद में राजनीतिक समर्थन बढ़ने के संकेत

जयराम महतो और थाना प्रभारी के बीच विवाद अब केवल पुलिस और विधायक के बीच का मामला नहीं रह गया है। मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। पूर्व सांसद शैलेंद्र महतो का खुलकर जयराम महतो के समर्थन में आना इस विवाद को और राजनीतिक रंग दे सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि और प्रशासन दोनों की अपनी मर्यादा है। किसी भी विवाद का समाधान दबाव, संगठनात्मक शक्ति या शक्ति प्रदर्शन के जरिए नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से होना चाहिए।