धनबाद से देशभर की ₹6 करोड़ की साइबर ठगी का कनेक्शन, पुलिस ने 7 क्रिमिनलों को किया गिरफ्तार
धनबाद पुलिस ने देशभर में 6 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी के नेटवर्क का खुलासा करते हुए 7 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। गरीब ग्रामीणों के नाम पर SIM और बैंक खाते खुलवाकर साइबर ठगों को बेचने का मामला सामने आया है।
HighLights:
- धनबाद पुलिस ने साइबर ठगी के नेटवर्क से जुड़े 7 आरोपितों को गिरफ्तार किया, इनमें एक नाबालिग भी शामिल
- गरीब ग्रामीणों के दस्तावेज पर SIM कार्ड और बैंक खाते खुलवाकर साइबर अपराधियों को बेचने का आरोप
- बलियापुर की एक मोबाइल दुकान से 166 SIM कार्ड बेचे गए, इनमें 57 का इस्तेमाल साइबर ठगी में मिला
- महज 6 SIM से साइबर ठगों ने करीब ₹60 लाख की ठगी की, 51 SIM की जांच जारी
धनबाद (Threesocieties.com Desk): झारखंड के धनबाद से देशभर में फैले बड़े साइबर ठगी नेटवर्क का खुलासा हुआ है। धनबाद पुलिस ने देश के अलग-अलग हिस्सों में 6 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी से जुड़े नेटवर्क पर कार्रवाई करते हुए सात आरोपितों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपितों में एक नाबालिग भी शामिल है। पुलिस ने इनकी गिरफ्तारी बलियापुर और पूर्वी टुंडी थाना क्षेत्र से की है।
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पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह गरीब और भोले-भाले ग्रामीणों के दस्तावेज का इस्तेमाल कर उनके नाम पर SIM कार्ड खरीदता था। इसके बाद उन्हीं SIM के आधार पर बैंक खाते खुलवाए जाते थे। बैंक खाते, पासबुक, चेकबुक, एटीएम और SIM कार्ड को साइबर अपराधियों को बेच दिया जाता था। इन्हीं बैंक खातों और मोबाइल नंबरों के जरिए देशभर में लोगों से साइबर ठगी की जाती थी।
एक दुकान से बिके 166 SIM, 57 का साइबर क्राइम में इस्तेमाल
मामले का खुलासा बिहार के अपर महानिदेशक दूरसंचार कार्यालय से मिली सूचना के बाद हुआ। सूचना मिलने पर धनबाद के वरीय पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार ने सिंदरी SDPO प्रकाशचंद्र महतो के नेतृत्व में विशेष छापामारी टीम गठित की।
बिहार से मिली जानकारी के अनुसार 1 जनवरी 2026 से 29 मई 2026 के बीच बलियापुर चौक स्थित मोबाइल कार्नर नामक दुकान से कुल 166 SIM कार्ड बेचे गए थे। इनमें से 57 SIM कार्ड का इस्तेमाल साइबर ठगी में किए जाने की जानकारी सामने आई। पुलिस ने सबसे पहले दुकान के संचालक काजू दे उर्फ प्रतिम दे और उसके सेल्समैन गौरव कुमार गुप्ता को गिरफ्तार किया। जांच के दौरान दुकान से SIM बिक्री से संबंधित कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी बरामद किए गए।
सिर्फ 6 SIM से उड़ाए 60 लाख रुपये
ग्रामीण एसपी एस मोहम्मद याकूब ने बताया कि प्रारंभिक जांच में छह SIM कार्ड का विस्तृत ब्योरा पुलिस को मिला है। इन छह SIM कार्ड के जरिए साइबर अपराधियों ने करीब 60 लाख रुपये की ठगी की है। पुलिस के अनुसार अभी 51 अन्य SIM कार्ड की जांच जारी है। बिहार से मिली जानकारी में इन SIM से जुड़े साइबर अपराध की कुल रकम करोड़ों रुपये में बताई गई है। संबंधित SIM कार्डों के खिलाफ NCRB पोर्टल समेत अन्य साइबर क्राइम प्लेटफॉर्म पर शिकायतें दर्ज हैं।
काजू दे की निशानदेही पर सामने आया पूरा नेटवर्क
पुलिस पूछताछ में SIM विक्रेता काजू दे ने कई महत्वपूर्ण जानकारी दी। उसने बताया कि SIM कार्ड उपलब्ध कराने में उसके रिश्तेदार चिरंजीत कुमार दे और मधुसुदन दे उसकी मदद करते थे। जांच में पता चला कि चिरंजीत दे बलियापुर के शीतलपुर और पूर्वी टुंडी के मायरानवाटांड इलाके के गरीब ग्रामीणों के दस्तावेज के आधार पर SIM कार्ड खरीदता था। इस काम में गोविंद बाउरी और मधुसुदन बाउरी भी सहयोग करते थे।
पुलिस के अनुसार चिरंजीत दे ने ही बड़ी संख्या में ग्रामीणों के नाम पर SIM खरीदे और उन्हें साइबर अपराधियों तक पहुंचाया। पूछताछ और जांच के बाद पुलिस ने नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपितों को भी गिरफ्तार किया। चिरंजीत दे के खिलाफ पहले से ही धनसार थाना और पश्चिम बंगाल के एयरपोर्ट बिधाननगर पुलिस कमिश्नरेट में साइबर ठगी से संबंधित प्राथमिकी दर्ज होने की जानकारी पुलिस ने दी है। जांच में उसे इस नेटवर्क का मास्टरमाइंड बताया गया है।
₹1,000 से ₹1,500 में बेचते थे SIM
पुलिस की जांच में साइबर ठगी के इस नेटवर्क का पूरा तरीका भी सामने आया है। गिरोह ग्रामीणों को पैसे का लालच देकर उनके दस्तावेज हासिल करता था। उनके नाम पर SIM कार्ड खरीदे जाते थे। SIM चालू होने के बाद उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर बैंक खाते खुलवाए जाते थे। बैंक खाता खुलने के बाद पासबुक, चेकबुक, ATM कार्ड समेत अन्य बैंकिंग दस्तावेज भी गिरोह अपने कब्जे में रख लेता था। इसके बदले ग्रामीणों को कुछ रकम दी जाती थी। इसके बाद एक SIM कार्ड को साइबर अपराधियों को ₹1,000 से ₹1,500 में बेच दिया जाता था। बैंक खाता, ATM, चेकबुक और अन्य दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए अलग से पैसे लिए जाते थे। पुलिस के अनुसार यह पूरा नेटवर्क करीब दो वर्षों से सक्रिय था।
एक व्यक्ति के नाम पर 20 तक SIM
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपितों ने एक ही व्यक्ति के नाम पर बड़ी संख्या में SIM कार्ड जारी करवाए। पुलिस के अनुसार काजू दे ने एक व्यक्ति के नाम पर अधिकतम 20 SIM कार्ड तक बेचे। जांच में चार अलग-अलग व्यक्तियों के नाम पर क्रमशः 14, 20, 15 और 11 SIM कार्ड बेचे जाने की जानकारी सामने आई है। साइबर अपराध में इस्तेमाल हुए इन नंबरों की शिकायत NCRB के अलावा संचार साथी और चक्षु पोर्टल पर भी की गई है।
देश के कई राज्यों में फैला साइबर ठगी का नेटवर्क
बलियापुर की दुकान से बेचे गए SIM कार्ड का इस्तेमाल सिर्फ झारखंड तक सीमित नहीं रहा। पुलिस के अनुसार इन SIM कार्ड के जरिए देश के अलग-अलग राज्यों और जिलों में साइबर ठगी की घटनाओं को अंजाम दिया गया। अपर महानिदेशक दूरसंचार कार्यालय, पटना बिहार की ओर से धनबाद पुलिस को उपलब्ध कराई गई सूची में उन राज्यों और जिलों का विवरण शामिल है, जहां इन SIM कार्ड का इस्तेमाल साइबर अपराध में हुआ। इससे साफ है कि धनबाद के ग्रामीण इलाकों से शुरू हुआ यह SIM और बैंक खाता सप्लाई नेटवर्क देशभर में सक्रिय साइबर ठगों से जुड़ा हुआ था।
पुलिस की ग्रामीणों से खास अपील
ग्रामीण एसपी एस मोहम्मद याकूब ने लोगों से साइबर अपराधियों के झांसे में नहीं आने की अपील की है। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधी चोरी के मोबाइल फोन, फर्जी SIM और म्यूल बैंक अकाउंट का इस्तेमाल करते हैं। गरीब और जरूरतमंद ग्रामीणों को कुछ हजार रुपये का लालच देकर उनके नाम पर SIM और बैंक खाते खुलवाए जाते हैं। बाद में इन्हीं का इस्तेमाल बड़े साइबर अपराध में किया जाता है।
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि किसी व्यक्ति के नाम पर SIM कार्ड या बैंक खाता होने पर वह भी जांच के दायरे में आ सकता है। इसलिए किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने दस्तावेज देकर SIM खरीदने या बैंक खाता खुलवाने से बचना बेहद जरूरी है।
धनबाद पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की अन्य कड़ियों को खंगाल रही है। जांच आगे बढ़ने के साथ साइबर ठगी से जुड़े और लोगों के नाम सामने आने की संभावना है।




