नई दिल्ली: SC का निर्देश आम्रपाली के अधूरे प्रोजेक्ट्स एनबीसीसी पूरा करे, 42000 निवेशकों को बड़ी राहत
सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली ग्रुप के अधूरे हाउसिंग प्रॉजेक्ट्स के मामले मंगलवार को सख्त रुख अपनाते हुए रियल एस्टेट कंपनी का रेरा रजिस्ट्रेशन कैंसल करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा है कि अब नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनबीसीसी) को आम्रपाली के अधूरे प्रॉजेक्ट्स को पूरा करेगा. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आम्रपाली ग्रुप ने लॉन्ड्रिंग की है. कोर्ट ने ईडी को मनी लॉन्ड्रिंग की जांच करने का आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले से आम्रपाली के 42 हजार होम बायर्स को बड़ी राहत मिली है. कोर्ट ने कहा कि ग्रुप ने मनी लॉन्ड्रिंग की है. फ्लैटों की बोगस अलॉटमेंट की गयी. डायरेक्टर्स ने बायर्स के पैसे को कहीं और डायवर्ट किया और बिल्डर्स ने इससे भारी मात्रा में पैसा बायर्स से लिया. इस केस में बड़ी धोखाधड़ी हुई है. एनबीसीसी आम्रपाली की अधूरी परियोजनाओं को पूरा करने के लिए पैसे (Fund) कैसे जुटायेगा? इसका जानकारी का खुलासा नहीं किया गया है. जाहिर है कि परियोजनाओं पर काम तभी शुरू होगा जब पैसों को इंतजाम हो सकेगा. सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि आम्रपाली ग्रुप की सारी कंपनियों का रजिस्ट्रेशन कैंसिल किया जाय. कोर्ट ने ईडी को आदेश दिया है कि वह आम्रपाली द्वारा निवेशकों के पैसों की हेराफेरी की जांच करे।सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कहा गया है कि आम्रपाली ग्रुप को नोएडा और ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी द्वारा दी गई लीज कैंसिल की जाये. आम्रपाली ग्रुप का रियल एस्टेट रेग्युलेटरी अथॉरिटी (RERA) के तहत किया गया रजिस्ट्रेशन कैंसल करे. होम बायर्स को पेंडिंग अमाउंट तीन महीने में सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में जमा कराने को कहा गया है. आर. वेंकटरमानी को कोर्ट रिसीवर नियुक्त किया गया है। कोर्ट ने कहा कि वेंकटरमानी के पास यह अधिकार रहेगा कि वह बकाया वसूली के लिए आम्रपाली की संपत्तियों की बिक्री के लिए तीसरे पक्ष से करार कर सकेंगे. मामले की अगली सुनवाई 9 अगस्त को होगी. सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान नोएडा व ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर भी सवाल उठाए और कहा कि जब बिल्डर फ़ंड डायवर्ट कर रहा था तब बैंक और अथारिटी आंखें मूंदे रहे. कोर्ट ने यूपी और केंद्र सरकार से कहा कि जिन बिल्डर ने फ़्लैट नहीं दिए हैं उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई करें. बायर्स के हित सुरक्षित करें.नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि आम्रपाली समूह की रुकी हुई परियोजनाएं पूरी करने के लिए उनके पास संसाधन और अनुभव नहीं है. दोनों प्राधिकारों ने शीर्ष कोर्ट से कहा था कि आम्रपाली पर उनका 5000 करोड़ रुपये बकाया है. कोर्ट ने आठ मई को सुनवाई के दौरान कहा था कि वह आम्रपाली की 15 प्रमुख आवासीय संपत्तियों का मालिकाना अधिकार नोएडा और ग्रेटर नोएडा को सौंप सकता है. इसका कारण यह समूह 42000 घर खरीदने वालों के प्रति जवाबदेही पूरी करने में विफल रहा था. सुप्रीम कोर्ट ने पहले की सुनवाई के दौरान आम्रपाली ग्रुप के खिलाफ कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि आपने आसमान की ऊंचाई तक लोगों को चीट किया है. आपने बायर्स, बैंक और अथॉरिटी सबको चीट किया है. आप लोगों ने गंभीर फ्रॉड किया है. जो भी पावरफुल लोग आपलोगों के पीछे खड़े हैं हम किसी को नहीं छोड़ेंगे, सबके खिलाफ क्रिमिनल केस चलेगा. अथॉरिटी और बैंकर्स ने भी लोगों का विश्वास तोड़ने का काम किया इस कारण बायर्स ने सफर किया है. उल्लेखनीय है कि आम्रपाली के हजारो बायर्स फ्लैट के लिए पैसे देने के बावजूद उन्हें फ्लैट नहीं मिला है. ये बायर्स फ्लैट के लिए कई सालों से चक्कर लगा रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया और आम्रपाली के डायरेक्टर की संपत्तियों को कुर्क करने का आदेश दिया. आम्रपाली के सीएमडी समेत अन्य अभी जेल में बंद हैं.




