कंधे पर बेटे को बैठाकर उफनती नदी पार करता पिता, बिहार का Video बना विकास के दावों पर बड़ा सवाल

बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के दोन क्षेत्र का एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें एक पिता अपने बेटे को कंधे पर बैठाकर उफनती हरहा नदी पार कर स्कूल छोड़ने जाता दिखाई देता है। पुल के अभाव में हर साल 22 गांवों के हजारों लोग जान जोखिम में डालने को मजबूर हैं।

कंधे पर बेटे को बैठाकर उफनती नदी पार करता पिता, बिहार का Video बना विकास के दावों पर बड़ा सवाल
स्कूल पहुंचाने के लिए पिता ने लगाई जान की बाजी।

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  • पश्चिम चंपारण के दोन क्षेत्र का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
  • पिता ने बेटे को कंधे पर बैठाकर उफनती हरहा नदी पार कराई
  • पुल नहीं होने से हर साल ग्रामीणों को जान जोखिम में डालनी पड़ती है
  • पढ़ाई के लिए बच्चों को दो-दो नदियां पार करनी पड़ती हैं
  • मानसून में 22 गांव मुख्यधारा से कट जाते हैं

बोतिया (Threesocieties.com Desk):  बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के सुदूरवर्ती दोन क्षेत्र से सामने आई एक तस्वीर और वीडियो ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों की बदहाल बुनियादी सुविधाओं की हकीकत उजागर कर दी है। वायरल वीडियो में एक पिता अपने मासूम बेटे को कंधे पर बैठाकर तेज बहाव वाली हरहा नदी पार करता दिखाई दे रहा है। यह दृश्य केवल एक परिवार की मजबूरी नहीं, बल्कि उन हजारों ग्रामीणों की पीड़ा है, जो आज भी पुल, सड़क और बेहतर संपर्क मार्ग जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।

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बताया जा रहा है कि यह वीडियो बीते सोमवार का है, जो गुरुवार को इंटरनेट मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से सवाल पूछने शुरू कर दिए हैं कि आखिर आजादी के इतने वर्षों बाद भी लोग ऐसी परिस्थितियों में जीवन जीने को क्यों मजबूर हैं।

बेटे की पढ़ाई न रुके, इसलिए पिता ने उठाया जानलेवा जोखिम

वीडियो में गोबरहिया थाना क्षेत्र के ढोकनी दोन गांव निवासी देवराज महतो अपने बेटे शुभम कुमार को कंधे पर बैठाकर उफनती हरहा नदी पार करते नजर आ रहे हैं। नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ है और तेज बहाव किसी भी समय बड़ा हादसा कर सकता था।

जानकारी के अनुसार, विद्यालय की छुट्टियां समाप्त होने के बाद देवराज महतो अपने बेटे को बेलाटांडी मॉडल आवासीय विद्यालय छोड़ने जा रहे थे, जहां शुभम तीसरी कक्षा का छात्र है। गांव से विद्यालय की दूरी करीब सात किलोमीटर है और रास्ते में हरहा नदी पड़ती है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि इस नदी पर आज तक पुल का निर्माण नहीं हो सका है।

हर बरसात में बढ़ जाती है परेशानी

पश्चिम चंपारण के इस इलाके में लगातार हो रही बारिश के कारण गंडक, मसान, हरहा, कोशिल और झिकरी समेत कई पहाड़ी नदियां उफान पर हैं। जैसे ही मानसून आता है, रामनगर प्रखंड का दोन क्षेत्र मुख्यधारा से कटने लगता है। बरसात के मौसम में नदी पार करना यहां के लोगों की मजबूरी बन जाती है। बच्चों को स्कूल, किसानों को खेत और मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए जान जोखिम में डालनी पड़ती है।

दो-दो नदियां पार कर स्कूल जाते हैं बच्चे

देवराज महतो बताते हैं कि ढोकनी दोन गांव में प्राथमिक विद्यालय तो हैं, लेकिन मध्य विद्यालय और उच्च विद्यालय नहीं हैं। आगे की पढ़ाई के लिए बच्चों को गोबरहिया जाना पड़ता है, जिसके लिए दो नदियां पार करनी पड़ती हैं। इसका सबसे ज्यादा असर छात्राओं पर पड़ता है। बरसात के दिनों में कई छात्राएं स्कूल पहुंचने के लिए उफनती नदी पार करने को मजबूर होती हैं। कई बार उन्हें कपड़े संभालते हुए पानी के तेज बहाव से गुजरना पड़ता है, जो बेहद खतरनाक और शर्मनाक स्थिति है।

22 गांव हर साल हो जाते हैं पानी से घिरे

दोन क्षेत्र के लोगों का कहना है कि मानसून के दौरान हर वर्ष करीब 22 गांव चारों ओर से पानी से घिर जाते हैं। पुल और बेहतर सड़क संपर्क के अभाव में शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और रोजमर्रा की जिंदगी पूरी तरह प्रभावित हो जाती है। कई बार गर्भवती महिलाओं, गंभीर मरीजों और बुजुर्गों को भी इसी तरह नदियां पार कर अस्पताल पहुंचाना पड़ता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वर्षों से पुल निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई।

वायरल वीडियो ने फिर उठाए बड़े सवाल

सोशल मीडिया पर वायरल यह वीडियो केवल एक वायरल क्लिप नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत की उस सच्चाई का आईना है जहां आज भी शिक्षा तक पहुंचने के लिए बच्चों और अभिभावकों को अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ती है। सरकारें शिक्षा, सड़क और ग्रामीण विकास के बड़े-बड़े दावे करती हैं, लेकिन पश्चिम चंपारण के दोन क्षेत्र की यह तस्वीर बताती है कि विकास की असली परीक्षा आज भी देश के दूर-दराज गांवों में बाकी है। स्थानीय लोगों की मांग है कि हरहा नदी पर जल्द से जल्द पुल का निर्माण कराया जाए ताकि आने वाली पीढ़ियों को इस तरह अपनी जान जोखिम में डालकर शिक्षा हासिल न करनी पड़े।