25 लाख के इनामी नक्सली अजय महतो की पत्नी बबिता ने किया सरेंडर, बोली- शोषण और मारपीट से टूट गया था भरोसा

Giridih News: 25 लाख के इनामी नक्सली अजय महतो की पत्नी अनिता किस्कू उर्फ बबिता ने झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण नीति से प्रभावित होकर पुलिस के सामने सरेंडर किया। बबिता ने संगठन में शोषण, हिंसा और मारपीट को छोड़ने की वजह बताया।

25 लाख के इनामी नक्सली अजय महतो की पत्नी बबिता ने किया सरेंडर, बोली- शोषण और मारपीट से टूट गया था भरोसा
माओवादियों को बड़ा झटका, एरिया कमेटी सदस्य बबिता ने छोड़ा संगठन।

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  • झारखंड सरकार की "नई दिशा-एक नई पहल" नीति से प्रभावित होकर लिया फैसला
  • संगठन में शारीरिक और आर्थिक शोषण तथा ग्रामीणों से मारपीट से थी परेशान
  • 2009 में माओवादी संगठन से जुड़ी, 2017 में जंगल में अजय महतो से की थी शादी
  • हत्या, यूएपीए, आर्म्स एक्ट समेत 15 मामलों में थी वांछित

गिरिडीह (Threesocieties.com Desk): पारसनाथ जोन में चलाए जा रहे नक्सल विरोधी अभियान के बीच गिरिडीह पुलिस को एक और बड़ी सफलता मिली है। भाकपा (माओवादी) संगठन की सक्रिय एरिया कमेटी सदस्य अनिता किस्कू उर्फ बबिता ने झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति "नई दिशा-एक नई पहल" से प्रभावित होकर पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि यह सरेंडर माओवादी संगठन के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि बबिता 25 लाख रुपये के इनामी शीर्ष नक्सली अजय महतो उर्फ टाइगर की पत्नी है, जिसे गिरिडीह पुलिस तीन दिन पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।

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पुलिस केंद्र गिरिडीह में आयोजित कार्यक्रम के दौरान बबिता ने पुलिस अधीक्षक डॉ. बिमल कुमार, द्वितीय कमान अधिकारी अभिनव आनंद तथा अपर पुलिस अधीक्षक सुरजीत कुमार के समक्ष औपचारिक रूप से हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया।

2009 में हुई थी संगठन में एंट्री

बोकारो जिले की रहने वाली करीब 30 वर्षीय बबिता केवल चौथी कक्षा तक पढ़ी है। उसने बताया कि वर्ष 2009 में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान उसकी मुलाकात माओवादी कैडरों से हुई थी। धीरे-धीरे वह संगठन से जुड़ गई और सक्रिय सदस्य बन गई। इसके बाद उसे पारसनाथ जोन, लुगु पहाड़ी, झुमरा पहाड़ी और कोल्हान क्षेत्र में विभिन्न जिम्मेदारियां दी गईं।

जंगल में हुई थी अजय महतो से शादी

बबिता ने पुलिस को बताया कि वर्ष 2017 में उसने जंगल में ही शीर्ष माओवादी कमांडर अजय महतो उर्फ टाइगर से शादी की थी। शादी के बाद वह संगठन की महत्वपूर्ण सदस्य बन गई। उसे लेवी वसूली, ग्रामीणों में भय का माहौल बनाने और संगठन की गतिविधियों को मजबूत करने का जिम्मा सौंपा गया था।

शोषण और मारपीट से हुआ मोहभंग

आत्मसमर्पण के दौरान बबिता ने संगठन के भीतर की हकीकत भी बताई। उसके मुताबिक, समय के साथ शीर्ष माओवादी नेताओं द्वारा आर्थिक और शारीरिक शोषण बढ़ता गया। इतना ही नहीं, निर्दोष ग्रामीणों के साथ बेवजह मारपीट और अत्याचार भी उसे अंदर तक झकझोरने लगा। उसने कहा कि वह इन गतिविधियों से मानसिक रूप से परेशान रहने लगी थी। इसी बीच तीन दिन पहले उसके पति अजय महतो की गिरफ्तारी ने उसका मनोबल पूरी तरह तोड़ दिया और उसने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।

15 गंभीर मामलों में थी वांछित

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार बबिता के खिलाफ गिरिडीह, बोकारो और कोल्हान क्षेत्र के विभिन्न थानों में हत्या, लूट, आर्म्स एक्ट, विस्फोटक अधिनियम (Explosives Act) और यूएपीए (UAPA) समेत कुल 15 संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं। लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियां उसकी तलाश कर रही थीं।

एसपी बोले- नक्सल संगठन को बड़ा झटका

गिरिडीह के पुलिस अधीक्षक डॉ. बिमल कुमार ने कहा कि 25 लाख के इनामी नक्सली अजय महतो की गिरफ्तारी के तुरंत बाद उसकी पत्नी का आत्मसमर्पण करना सुरक्षा बलों के लिए बड़ी उपलब्धि है। इससे गिरिडीह, बोकारो, कोल्हान और सिंहभूम क्षेत्र में सक्रिय माओवादी कैडरों का मनोबल कमजोर होगा। उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाकर कई नक्सली पहले भी मुख्यधारा में लौट चुके हैं। पुलिस ने एक बार फिर सभी भटके हुए नक्सलियों से हिंसा छोड़कर आत्मसमर्पण करने और सम्मानजनक जीवन अपनाने की अपील की।

'नई दिशा-एक नई पहल' से बढ़ रहा भरोसा

झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति "नई दिशा-एक नई पहल" का उद्देश्य हिंसा का रास्ता छोड़ने वाले नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। इस योजना के तहत आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों को कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप पुनर्वास, प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं। हाल के वर्षों में इस नीति के तहत कई नक्सलियों ने हथियार छोड़कर सामान्य जीवन की ओर कदम बढ़ाया है।