कोयला संकट के बीच BCCL का बड़ा एक्शन, BNR-बुर्रागढ़ साइडिंग से बढ़ेगा डिस्पैच
पावर प्लांटों में कोयले की कमी के बीच BCCL ने डिस्पैच बढ़ाने का फैसला किया है। CMD मनोज कुमार अग्रवाल ने BNR साइडिंग से 3.5 और बुर्रागढ़ से 2-3 रेक प्रतिदिन डिस्पैच के निर्देश दिए।
HighLights:
- पावर प्लांटों में जरूरत का सिर्फ 48% कोयला स्टॉक
- BCCL CMD मनोज कुमार अग्रवाल ने BNR साइडिंग का किया निरीक्षण
- BNR से कोयला डिस्पैच 2 से बढ़ाकर 3.5 रेक प्रतिदिन करने का निर्देश
- बुर्रागढ़ साइडिंग से डिस्पैच 1.5 से बढ़ाकर 2-3 रेक प्रतिदिन होगा
धनबाद (Threesocieties.com Desk): देशभर के थर्मल पावर प्लांटों में कोयले के घटते स्टॉक के बीच भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) ने बिजली क्षेत्र को कोयले की आपूर्ति बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। पावर सेक्टर की बढ़ती मांग को देखते हुए BCCL ने अपनी प्रमुख साइडिंग से कोयला डिस्पैच बढ़ाने की तैयारी तेज कर दी है।
BCCL के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक (CMD) मनोज कुमार अग्रवाल ने 7 सितंबर 2026 को कुसुंडा एरिया स्थित BNR साइडिंग और बस्ताकोला एरिया की बुर्रागढ़ साइडिंग का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने दोनों साइडिंग पर चल रहे कोयला डिस्पैच, परिचालन व्यवस्था और बढ़ती जरूरतों की विस्तृत समीक्षा की। सीएमडी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि बिजली संयंत्रों की बढ़ती मांग को देखते हुए कोयला डिस्पैच की क्षमता तत्काल बढ़ाई जाए।
BNR साइडिंग से अब 3.5 रेक प्रतिदिन डिस्पैच का लक्ष्य
निरीक्षण के दौरान BNR साइडिंग से होने वाले कोयला डिस्पैच को बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। वर्तमान में यहां से दो रेक प्रतिदिन कोयला डिस्पैच किया जा रहा है। CMD मनोज कुमार अग्रवाल ने इसे बढ़ाकर 3.5 रेक प्रतिदिन करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने और परिचालन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने को कहा गया है। इससे बिजली संयंत्रों तक कोयले की आपूर्ति में तेजी आने की उम्मीद है।
बुर्रागढ़ साइडिंग से भी बढ़ेगा कोयला डिस्पैच
बस्ताकोला एरिया की बुर्रागढ़ साइडिंग का भी CMD ने निरीक्षण किया। वर्तमान में यहां से करीब 1.5 रेक प्रतिदिन कोयला डिस्पैच किया जा रहा है। बिजली क्षेत्र में बढ़ती कोयले की मांग को देखते हुए CMD ने बुर्रागढ़ साइडिंग से डिस्पैच को बढ़ाकर 2 से 3 रेक प्रतिदिन करने के निर्देश दिए। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि साइडिंग की क्षमता, उपलब्ध संसाधनों और परिचालन व्यवस्था का बेहतर समन्वय करते हुए डिस्पैच बढ़ाने की दिशा में तत्काल काम किया जाए।
पावर प्लांटों में आधे से भी कम कोयला स्टॉक
दरअसल, देशभर के थर्मल पावर प्लांटों में कोयले के स्टॉक को लेकर चिंता बढ़ी हुई है। सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (CEA) के आंकड़ों के अनुसार, 2 सितंबर 2026 तक 50 से अधिक पावर प्लांटों में कोयले की कमी दर्ज की गई। इन संयंत्रों की कुल बिजली उत्पादन क्षमता करीब 224 GW बताई गई है। इन प्लांटों में 2 सितंबर तक करीब 28.2 मिलियन टन (MT) कोयला उपलब्ध था, जबकि निर्धारित स्टॉक करीब 58.7 MT होना चाहिए था। यानी निर्धारित आवश्यकता की तुलना में सिर्फ 48 प्रतिशत कोयला ही उपलब्ध था। यह स्टॉक करीब नौ दिनों की जरूरत के बराबर बताया गया है, जबकि सामान्य तौर पर थर्मल पावर प्लांटों में करीब 19 दिनों का कोयला स्टॉक बनाए रखना जरूरी माना जाता है।
मानसून में सप्लाई पर पड़ता है असर
मानसून के दौरान कोयले की उत्पादन और परिवहन व्यवस्था प्रभावित होने से पावर प्लांटों तक आपूर्ति पर दबाव बढ़ जाता है। वहीं, बिजली की मांग अधिक रहने पर कोयले की खपत भी बढ़ जाती है। ऐसे समय में कोयला कंपनियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बिजली संयंत्रों तक समय पर पर्याप्त मात्रा में कोयला पहुंचाने की होती है। इसी को देखते हुए कोयला कंपनियों ने कोयला डिस्पैच और सप्लाई की गति बढ़ाने पर जोर दिया है।
BCCL ने बढ़ाया पावर सेक्टर पर फोकस
BCCL प्रबंधन की ओर से बिजली क्षेत्र की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए कोयला डिस्पैच को प्राथमिकता दी जा रही है। कंपनी का फोकस केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि कोयले की समयबद्ध निकासी, साइडिंग की क्षमता और रेक लोडिंग को बेहतर बनाने पर भी है। CMD के निरीक्षण के दौरान इसी पूरी व्यवस्था की समीक्षा की गई। अधिकारियों से साइडिंग पर मौजूद संभावित बाधाओं की जानकारी ली गई और उन्हें दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया। प्रबंधन का मानना है कि साइडिंग स्तर पर डिस्पैच क्षमता बढ़ाने से बिजली संयंत्रों तक कोयले की आपूर्ति को और मजबूत किया जा सकेगा।
कोयला निकासी और परिवहन व्यवस्था पर जोर
CMD ने उपलब्ध संसाधनों के अधिकतम उपयोग, परिचालन व्यवस्था में सुधार तथा कोयले की निकासी और परिवहन के दौरान आने वाली संभावित बाधाओं को दूर करने पर जोर दिया। BCCL की रणनीति है कि जहां से अतिरिक्त रेक भेजने की क्षमता विकसित की जा सकती है, वहां तत्काल कदम उठाकर डिस्पैच बढ़ाया जाए। BNR और बुर्रागढ़ साइडिंग में डिस्पैच बढ़ाने के निर्देश इसी रणनीति का हिस्सा हैं।
देश की ऊर्जा जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण कदम
बिजली की बढ़ती मांग के बीच थर्मल पावर सेक्टर में कोयले की पर्याप्त उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण है। कोयले की आपूर्ति में किसी तरह की बाधा का सीधा असर बिजली उत्पादन पर पड़ सकता है। ऐसे में BCCL द्वारा BNR साइडिंग से 2 की जगह 3.5 रेक और बुर्रागढ़ साइडिंग से 1.5 की जगह 2-3 रेक प्रतिदिन डिस्पैच करने की तैयारी पावर सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
BCCL प्रबंधन का जोर है कि बिजली संयंत्रों को कोयले की आपूर्ति पर्याप्त मात्रा में और समय पर मिलती रहे। कंपनी की ओर से साइडिंग की क्षमता बढ़ाने और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।इससे न केवल कोयला निकासी और परिवहन व्यवस्था को गति मिलेगी, बल्कि देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में भी मदद मिलेगी। निरीक्षण के दौरान संबंधित क्षेत्रों के महाप्रबंधक और मुख्यालय के अधिकारी मौजूद थे।




