धनबाद: गैंग्स गोली की शिकार पप्पू पाचक की 18 माह बाद मौत
गैंग्स ऑफ वासेपुर की गोलीबारी में जख्मी भूली पांडरपाला निवासी मो सल्लाउद्दीन के पुत्र पप्पू खान उर्फ पप्पू पाचक की मौत शुक्रवार की शाम इलाज के दौरान असर्फी हॉस्पीटल में हो गयी. पप्पू को वर्ष 2017 की 25 जून की शाम चांद रात को ईद की खरीददारी करते समय फहीम गैंग ने गोली मारी थी. पप्पू को 17 गोलियां लगी थी. पांच गोलियां शरीर में कई दिनों तक रह गयी थी. उससे शरीर में इन्फेक्शन हो गया था. मिशन हॉस्पीटल दुर्गापुर में कई माह तक पप्पू का इलाज चला था. हॉस्पीटल से भले ही उसे छोड़ दिया गया था लेकिन वह बेड पर ही था. पुराना बाजार में ईद की खरीदारी के गैंग्स के लोग उसकी कार के पास पहुंचे और ताबड़तोड़ गोलिया बरसायी. गंभीर रुप से जख्मी पप्पू को इलाज के लिए मिशन भेजा गया था. परिजन बेहतर इलाज के लिए उसे दुर्गापुर मिशन अस्पताल ले गये. उसके शरीर में 17 गोलियां लगी थी. वह लगातार बीमार चल रहा था. कभी बेड से उठ नहीं पाता था. बुधवार की रात पप्पू की तबीयत ज्यादा खराब हो गयी और उसे असर्फी अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जहां शुक्रवार को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गयी. पप्पू के भाई ग्यास की 10 साल पहले हुई थी मर्डर पप्पू छह भाई हैं. गैंगस्टर फहीम खान कुनबे के साथ पिछले कई वर्षों से रंजिश चल रही थी. इसी दौरान 20 मई 2008 को इसके छोटे भाई गयास खान की हत्या कर लाश को फेंक दिया गया था. इस मामला में भी वासेपुर के कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया गया था. उसके बाद फहीम खान व पप्पू खान के बीच लगातार रंजिश चलती रही. इसी का नतीजा था कि पप्पू खान पर भी जानलेवा हमला हुआ और उसकी आज मौत हो गयी. पप्पू के भाई मिस्टर खान ने आरोप लगाया है कि भाई की मौत का जिम्मेवार फहीम खान का पूरा कुनबा व पुलिस प्रशासन है. भाभी शमा परवीन की ओर से मामले में फहीम खान, उसका बेटा इकबाल खान, भाई शेर खान और भतीजा चीकू खान के खिलाफ साजिश रचने और जानलेवा हमला करने का एफआइआर दर्ज किया गया था. शमा परवीन ने पुलिस को बताया था उनके पति पप्पू खान से फहीम खान की पहले भी कानूनी लड़ाई हो चुकी है. वर्ष 2008 में देवर गयास की मर्डर कर दी गई थी. 2009 में उनके घर पर बम से भी हमला हुआ था. इसलिए आशंका है कि सभी आरोपियों ने उनके पति पर हमला कराया होगा.पुलिस चिक्कू खान, शेर खान व सानू खान को जेल भेजी थी. पुलिस की लापरवाही के कारण इकबाल खान व रज्जन जेल जाने से बचा और उसी बेल हो गयी. पुलिस केस ही सही जांच करने के बजाय एक्युज्ड के फेवर में काम कर की और चार्जशीट में मदद की.




