JPSC-JSSC आंदोलन पर सरकार-छात्रों की पहली बड़ी वार्ता, मांगों को बताया जायज; जारी रहेगा आंदोलन
रांची में JPSC-JSSC परीक्षा विवाद पर सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच डेढ़ घंटे चली हाई-लेवल बैठक सकारात्मक रही। सरकार ने मांगों पर गंभीरता से विचार का भरोसा दिया, लेकिन छात्रों ने आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
HighLights:
- 14वें दिन सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच पहली औपचारिक वार्ता हुई
- स्टेट गेस्ट हाउस में करीब डेढ़ घंटे चली हाई-लेवल बैठक
- सरकार ने छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने का भरोसा दिया
- छात्र बोले- कई मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा हुई, लेकिन आंदोलन जारी रहेगा
रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर पिछले 14 दिनों से आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों और राज्य सरकार के बीच शुक्रवार को पहली औपचारिक वार्ता हुई। मोरहाबादी स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में करीब डेढ़ घंटे तक चली इस हाई-लेवल बैठक में दोनों पक्षों ने परीक्षा विवाद, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और छात्रों की विभिन्न मांगों पर विस्तार से चर्चा की।
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बैठक समाप्त होने के बाद सरकार और छात्र प्रतिनिधियों ने बातचीत को सकारात्मक बताया। हालांकि, छात्रों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी सभी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
सरकार ने कहा- छात्रों की मांगों पर गंभीरता से होगा विचार
बैठक के बाद मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि सरकार ने छात्रों की सभी बातों को गंभीरता से सुना है। छात्रों की मांगों को समझा गया है और उन पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि इस पूरे मामले का समाधान बातचीत के जरिए निकले। सरकार छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार की ओर से बैठक में मंत्री दीपिका पांडे सिंह, सुदिव्य कुमार सोनू, चमरा लिंडा, संजय यादव तथा अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह शामिल हुए।
छात्र बोले- सरकार को हमारी मांगों की पूरी जानकारी नहीं थी
बैठक में शामिल छात्र नेता रवींद्र पासवान ने कहा कि यह पहली बैठक थी और बेहद सकारात्मक माहौल में हुई। उन्होंने कहा कि सरकार को उनकी मांगों की पूरी जानकारी नहीं थी। प्रतिनिधिमंडल ने एक-एक बिंदु पर अपनी बातें रखीं, जिसके बाद मंत्रियों ने आश्वासन दिया कि सभी मांगों पर विचार किया जाएगा। विभिन्न बिंदुओं पर सहमति बन गई है। कुल मिलाकर यह वार्ता सफल रही। छात्रों ने सरकार के सामने जो मांगे रखी थी, उनमें से कुछ बिन्दुओं पर सहमति बन गई है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने मांगों को गंभीरता से लिया है, लेकिन अभी किसी भी मांग पर अंतिम सहमति नहीं बनी है। इसलिए आंदोलन फिलहाल जारी रहेगा। इसी के साथ छात्र डेलिगेशन ने सरकार को 10 अगस्त तक का अल्टीमेटम दिया है। अगर 10 अगस्त तक छात्रों की मांगें पूरी नहीं होती है तो विधानसभा घेराव करेंगे।
कड़ी सुरक्षा के बीच हुई हाई-लेवल बैठक
वार्ता को लेकर स्टेट गेस्ट हाउस के बाहर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। शाम करीब 7:23 बजे सरकार का प्रतिनिधिमंडल गेस्ट हाउस पहुंचा, जबकि 7:45 बजे छात्रों का 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल अंदर गया। बैठक करीब डेढ़ घंटे चली और रात लगभग 9:25 बजे समाप्त हुई। बैठक में दोनों पक्षों के अलावा किसी अन्य व्यक्ति को प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई।
सरकार की ओर से शामिल प्रतिनिधि
मंत्री दीपिका पांडे सिंह, मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, मंत्री चमरा लिंडा,मंत्री संजय यादव व अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह।
छात्रों के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल रहे
रवींद्र पासवान, पीयूष कुमार, राजेश प्रसाद, नीतू कुजूर, अंकित राज, कार्तिक सोरेन, शालू कुमारी,रवींद्र कुमार रवि, आनंद कुमार, अंकित कुमार।
छात्रों की प्रमुख मांगें
आंदोलनरत छात्रों ने सरकार के सामने कई अहम मांगें रखीं, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
1. विवादित परीक्षाएं रद्द हों
14वीं JPSC परीक्षा
JPSC Backlog 2023 एवं 2025
FRO परीक्षा
11वीं से 13वीं JPSC
APP सहित अन्य विवादित परीक्षाएं
2. निष्पक्ष जांच
CBI और ED से समयबद्ध जांच।
JSSC CGL, PGT, माध्यमिक आचार्य, लैब असिस्टेंट, लेडी सुपरवाइजर, उत्पाद सिपाही सहित अन्य परीक्षाओं की जांच।
3. जवाबदेही तय हो
तीन महीने के भीतर जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
दोषियों पर सख्त कार्रवाई।
आयोग के दोषी अधिकारियों और सदस्यों को हटाया जाए।
4. भर्ती प्रणाली में बड़े सुधार
आउटसोर्स एजेंसी से परीक्षा कराना बंद हो।
OMR शीट और उत्तर पुस्तिका ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाए।
कटऑफ, नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूला और स्कोर कार्ड सार्वजनिक किए जाएं।
परीक्षा कैलेंडर जारी कर उसका पालन सुनिश्चित किया जाए।
पारदर्शिता के लिए कठोर कानून और SOP लागू किए जाएं।
5. अन्य मांगें
व्हिसलब्लोअर संतोष मस्ताना की सेवा बहाल की जाए।
उत्पाद सिपाही भर्ती के मृत अभ्यर्थियों के परिवारों को एक करोड़ रुपये मुआवजा मिले।
आयु सीमा और भर्ती नियमों में संशोधन किया जाए।
आंदोलन क्यों बना बड़ा मुद्दा?
JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, परीक्षा संचालन में अनियमितताओं और चयन प्रक्रिया पर उठे सवालों को लेकर हजारों अभ्यर्थी पिछले 14 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। अभ्यर्थियों का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित हुई है और निष्पक्ष जांच के बिना योग्य अभ्यर्थियों को न्याय नहीं मिलेगा। दूसरी ओर, राज्य सरकार का कहना है कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर CID पहले से कई मामलों की जांच कर रही है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई है। सरकार चाहती है कि छात्र आंदोलन समाप्त कर बातचीत के जरिए समाधान निकालें।
फिलहाल क्या स्थिति है?
सरकार और छात्रों के बीच पहली वार्ता सकारात्मक माहौल में समाप्त हुई है। हालांकि किसी मांग पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। सरकार ने मांगों पर विचार करने का भरोसा दिया है, जबकि छात्रों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी सभी प्रमुख मांगों पर ठोस फैसला नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। ऐसे में अब अगली वार्ता और सरकार के निर्णय पर पूरे राज्य के अभ्यर्थियों की नजरें टिकी हुई हैं।




