झारखंड के मंत्री सुदिव्य सोनू का हार्ट अटैक से निधन, आज गिरिडीह में अंतिम विदाई
झारखंड के कैबिनेट मंत्री और झामुमो नेता सुदिव्य कुमार सोनू का हार्ट अटैक से निधन हो गया। गिरिडीह में रविवार दोपहर 3 बजे अंतिम संस्कार होगा। CM हेमंत सोरेन, कल्पना सोरेन समेत कई नेता अंतिम विदाई देंगे। जानें सुदिव्य सोनू का राजनीतिक सफर और योगदान।
HighLights:
- झारखंड के कैबिनेट मंत्री और झामुमो के वरिष्ठ नेता सुदिव्य कुमार सोनू का हार्ट अटैक से निधन
- रविवार दोपहर 3 बजे गिरिडीह में होगा अंतिम संस्कार
- मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, कल्पना सोरेन समेत कई मंत्री, विधायक और झामुमो नेता पहुंचेंगे
- 2019 और 2024 में गिरिडीह से विधायक चुने गए थे सुदिव्य सोनू
गिरिडीह (Threesocieties.com Desk): झारखंड की राजनीति के लिए रविवार की सुबह बेहद दुखद खबर लेकर आई। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार में कैबिनेट मंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के वरिष्ठ नेता सुदिव्य कुमार सोनू का शनिवार देर रात हृदयाघात से निधन हो गया। अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें गिरिडीह के मर्सी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों के तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
सुदिव्य कुमार सोनू के निधन की खबर मिलते ही गिरिडीह से लेकर रांची तक राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई। झामुमो कार्यकर्ता, समर्थक और बड़ी संख्या में आम लोग उनके आवास और अस्पताल पहुंचने लगे। पार्टी ने अपने समर्पित नेता के असामयिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
आज गिरिडीह में अंतिम संस्कार
सुदिव्य कुमार सोनू का अंतिम संस्कार रविवार दोपहर 3 बजे गिरिडीह में किया जाएगा। उनकी अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में समर्थकों और झामुमो कार्यकर्ताओं के शामिल होने की संभावना है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, कल्पना सोरेन समेत सरकार के कई मंत्री, विधायक और झामुमो के वरिष्ठ नेता सुदिव्य सोनू को अंतिम विदाई देने गिरिडीह पहुंचेंगे। उनके निधन से गिरिडीह में शोक का माहौल है। सुबह से ही उनके आवास और अस्पताल के आसपास समर्थकों की भीड़ जुटने लगी।
अचानक बिगड़ी थी तबीयत
जानकारी के मुताबिक सुदिव्य कुमार सोनू शनिवार देर रात गिरिडीह स्थित अपने आवास पर थे। इसी दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। परिजन उन्हें तत्काल स्थानीय मर्सी अस्पताल लेकर पहुंचे। अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन उनकी हालत बेहद गंभीर थी। इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। उनकी तबीयत इतनी तेजी से बिगड़ी कि उन्हें बेहतर इलाज के लिए रांची ले जाने का भी मौका नहीं मिल सका।
CM हेमंत सोरेन ने बताया 'बड़े भाई' जैसा
सुदिव्य कुमार सोनू के निधन पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने अपने शोक संदेश में सुदिव्य सोनू को सिर्फ राजनीतिक साथी नहीं, बल्कि बड़े भाई जैसा बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके निधन की खबर को स्वीकार कर पाना बेहद कठिन है। उन्होंने कहा कि सोनू भैया का जाना उनके जीवन में ऐसी रिक्तता छोड़ गया है, जिसे शब्दों में व्यक्त करना संभव नहीं।
हेमंत सोरेन ने कहा कि सुदिव्य कुमार हमेशा स्नेह देने, मार्गदर्शन करने और कठिन समय में मजबूती से साथ खड़े रहने वाले साथी रहे। उनके साथ बिताए पल और उनसे मिली सीख हमेशा उनके साथ रहेगी। मुख्यमंत्री ने झारखंड आंदोलन के दौर से सुदिव्य सोनू के योगदान को याद करते हुए कहा कि वह दिशोम गुरु शिबू सोरेन के साथ मजबूती से खड़े रहे और झामुमो के समर्पित सिपाही के रूप में अपना पूरा जीवन झारखंड की अस्मिता, अधिकार और स्वाभिमान की लड़ाई को समर्पित किया।
संघर्ष से कैबिनेट मंत्री तक का सफर
सुदिव्य कुमार सोनू का राजनीतिक सफर संघर्ष और संगठन के प्रति समर्पण से भरा रहा। गिरिडीह में जन्मे सुदिव्य कुमार ने वर्ष 1989 में झामुमो से जुड़कर राजनीति की शुरुआत की थी। झारखंड आंदोलन के दौर में वह सक्रिय रहे और पार्टी के लिए लंबे समय तक जमीनी स्तर पर काम किया। पार्टी और आंदोलन से जुड़े रहने के दौरान उन्होंने कई चुनौतियों का सामना किया। झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन से उनका बेहद करीबी रिश्ता रहा। पार्टी में उन्होंने धीरे-धीरे अपनी अलग पहचान बनाई और संगठन के मजबूत नेताओं में शामिल हुए।
दो बार गिरिडीह से बने विधायक
सुदिव्य कुमार सोनू ने वर्ष 2019 में पहली बार गिरिडीह विधानसभा सीट से जीत दर्ज की। इसके बाद वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने लगातार दूसरी बार जीत हासिल की। 2024 में जीत के बाद उन्हें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया। गिरिडीह से लंबे अंतराल के बाद झामुमो के किसी नेता को मंत्री पद मिलने से उनके समर्थकों में खासा उत्साह था। मंत्री बनने के बाद उन्होंने कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली।
इन महत्वपूर्ण विभागों की संभाल रहे थे जिम्मेदारी
सुदिव्य कुमार सोनू के पास सरकार में कई अहम विभाग थे। वह पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य, नगर विकास तथा उच्च एवं तकनीकी शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। खासकर पर्यटन के क्षेत्र में उनके कार्यकाल के दौरान झारखंड के प्राकृतिक, सांस्कृतिक और जनजातीय पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।
'झारखंड के हर मोड़ पर है एक कहानी'
पर्यटन मंत्री के रूप में सुदिव्य सोनू झारखंड के पर्यटन को नए नजरिए से विकसित करने की बात करते थे। उनका मानना था कि राज्य के गांवों, जंगलों, पहाड़ों और जनजातीय संस्कृति में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं।
उनका चर्चित कथन था—'झारखंड के हर मोड़ पर है एक कहानी'।
उन्होंने धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ इको-टूरिज्म, ट्राइबल टूरिज्म और माइंस टूरिज्म को भी बढ़ावा देने की दिशा में पहल की।
पर्यटन क्षेत्र में कई योजनाओं पर किया काम
मंत्री के रूप में सुदिव्य सोनू ने राज्य के पर्यटन को विस्तार देने के लिए कई योजनाओं को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। उनके कार्यकाल में:
- इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने की पहल हुई।
- ट्राइबल टूरिज्म और माइंस टूरिज्म सर्किट विकसित करने पर जोर दिया गया।
- रजरप्पा, पंचघाघ और नेतरहाट जैसे पर्यटन स्थलों पर स्काईवॉक/ग्लास ब्रिज की योजनाओं को आगे बढ़ाया गया।
- नेतरहाट उत्सव की दिशा में पहल की गई।
- होमस्टे पॉलिसी और नई पर्यटन नीति पर काम हुआ।
- पश्चिम बंगाल के पर्यटकों को झारखंड की ओर आकर्षित करने के लिए पर्यटन रोड शो आयोजित किए गए।
- देश के दूसरे राज्यों के पर्यटन मॉडल का अध्ययन किया गया।
उनका फोकस झारखंड को केवल धार्मिक पर्यटन तक सीमित रखने के बजाय प्रकृति, संस्कृति, जनजातीय जीवन और एडवेंचर टूरिज्म से जोड़ने पर था।
कल्पना सोरेन की जीत में भी निभाई अहम भूमिका
सुदिव्य कुमार सोनू को झामुमो संगठन में बेहद सक्रिय नेता माना जाता था। गांडेय विधानसभा उपचुनाव में कल्पना सोरेन की जीत के दौरान भी उनकी संगठनात्मक भूमिका महत्वपूर्ण मानी गई थी। पार्टी के भीतर वह संगठन और सरकार के बीच समन्वय बनाने वाले नेताओं में शामिल थे। हाल के वर्षों में छात्र आंदोलनों और परीक्षा परिणामों से जुड़े विवादों के दौरान सरकार और छात्रों के बीच बातचीत में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
शिक्षा विभाग से जुड़े तीसरे मंत्री की कार्यकाल में मौत
सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के साथ झारखंड में शिक्षा विभाग से जुड़े मंत्री की कार्यकाल के दौरान मौत का एक और दुखद अध्याय जुड़ गया। इससे पहले स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता मंत्री जगन्नाथ महतो का 6 अप्रैल 2023 को निधन हुआ था। इसके बाद रामदास सोरेन का 15 अगस्त 2025 को दिल्ली में इलाज के दौरान निधन हुआ था। अब उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे सुदिव्य कुमार सोनू का भी कार्यकाल के दौरान निधन हो गया।
दीपिका पांडेय ने भी जताया दुख
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय ने सुदिव्य सोनू के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सुबह से ही झारखंड के लिए बेहद पीड़ादायक खबर सामने आई है। उन्होंने सुदिव्य कुमार को बेहद जानकार और जरूरत पड़ने पर कड़े फैसले लेने वाला नेता बताया। उन्होंने कहा कि सुदिव्य ने संघर्ष के बल पर यह मुकाम हासिल किया था और उनके अचानक चले जाने पर विश्वास करना मुश्किल है। दीपिका पांडेय ने यह भी बताया कि सुदिव्य सोनू ने हाल ही में अपने बेटे की शादी की चर्चा की थी। अचानक उनके निधन से कई काम अधूरे रह गए।
झामुमो ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि
झारखंड मुक्ति मोर्चा ने अपने समर्पित नेता और सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के निधन पर श्रद्धांजलि दी है। पार्टी ने कहा कि सुदिव्य कुमार का असामयिक निधन पूरे झामुमो परिवार के लिए गहरा आघात है। उनका जाना पार्टी, सरकार और झारखंड के लिए अपूरणीय क्षति है। झामुमो ने उनके संघर्ष, सेवा और योगदान को याद करते हुए कहा कि पार्टी के लिए उनके समर्पण को हमेशा याद किया जाएगा।
गिरिडीह में शोक, अंतिम दर्शन के लिए उमड़ रहे लोग
सुदिव्य कुमार सोनू के निधन की खबर फैलते ही गिरिडीह में उनके समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं की भीड़ जुटने लगी। लोग अपने नेता के अंतिम दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। एक जमीनी कार्यकर्ता से दो बार के विधायक और फिर कैबिनेट मंत्री तक का सफर तय करने वाले सुदिव्य सोनू का अचानक निधन झामुमो के साथ-साथ पूरे झारखंड के लिए बड़ी राजनीतिक क्षति माना जा रहा है। रविवार दोपहर 3 बजे गिरिडीह में उन्हें अंतिम विदाई दी जाएगी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और झामुमो के कई वरिष्ठ नेता इस अंतिम यात्रा में शामिल होकर अपने साथी को अंतिम जोहार देंगे।




