JPSC-JSSC Scam: 100 अभ्यर्थियों से 1.20 करोड़ की वसूली! 30 कॉपियां बाहर लिखीं, 40 में सॉफ्टवेयर से खेल
ACF-FRO परीक्षा में 100 अभ्यर्थियों को पास कराने की कथित साजिश, 1.20 करोड़ की वसूली और 30 कॉपियां बाहर लिखवाने का आरोप। इधर JSSC-CGL मामले में CID ने आयोग कार्यालय से दस्तावेज जब्त कर जांच तेज कर दी है।
HighLights:
- JPSC ACF-FRO परीक्षा में करीब 100 अभ्यर्थियों को पास कराने की कथित साजिश
- करीब 1.20 करोड़ रुपये की वसूली का दावा,दिल्ली और लखनऊ से विशेष टीम आयी थी
- JSSC-CGL मामले में CID की SIT ने आयोग कार्यालय से अहम दस्तावेज जब्त किए
- 300 से अधिक संदिग्धों, बिचौलियों और सफल अभ्यर्थियों से पूछताछ
रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की सहायक वन संरक्षक (ACF) और वन क्षेत्र पदाधिकारी (FRO) नियुक्ति परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच के दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। पूछताछ में सामने आए तथ्यों के अनुसार, अधिकारियों, दलालों और एजेंटों के कथित सिंडिकेट ने करीब 100 अभ्यर्थियों को परीक्षा में पास कराने की साजिश रची थी।
जांच में करीब 1.20 करोड़ रुपये की वसूली किए जाने की बात सामने आई है। आरोप है कि प्रारंभिक परीक्षा में अभ्यर्थियों को पास कराने के नाम पर प्रत्येक से करीब पांच-पांच लाख रुपये लिए गए। इसके बाद मुख्य परीक्षा में भी उत्तर पुस्तिकाओं के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ की गई।
30 अभ्यर्थियों की कॉपियां स्ट्रांग रूम से बाहर निकालने का आरोप
पूछताछ में सबसे गंभीर खुलासा करीब 30 अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं को स्ट्रांग रूम से बाहर निकालने को लेकर हुआ है। जांच एजेंसी को दिए गए बयानों के अनुसार, उत्तर पुस्तिकाएं बाहर ले जाकर लिखवाई गईं और बाद में उन्हें दोबारा स्ट्रांग रूम में रख दिया गया। परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी TDPL के एक कर्मी प्रदीप वर्मा ने कथित तौर पर पूछताछ में स्वीकार किया कि उसने करीब 30 अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाएं स्ट्रांग रूम से निकाली थीं। इन कॉपियों को बाहर लिखवाने के बाद वापस जमा किए जाने का आरोप है।
40 उत्तर पुस्तिकाओं के सॉफ्टवेयर में कथित हेराफेरी
मामले में केवल कॉपियां बाहर लिखवाने का आरोप ही नहीं है। पूछताछ में करीब 40 उत्तर पुस्तिकाओं के सॉफ्टवेयर में कथित हेराफेरी किए जाने की बात भी सामने आई है। एक आरोपित संजय के कथित बयान के अनुसार, FRO मुख्य परीक्षा में करीब 25 और ACF मुख्य परीक्षा में करीब 15 अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं में बदलाव कर उन्हें पास कराने की कोशिश की गई। इस तरह जांच में सामने आए आरोपों के मुताबिक करीब 100 अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाने की पूरी योजना तैयार की गई थी।
दिल्ली-लखनऊ से बुलाई गई थी विशेष टीम
जांच में यह भी सामने आया है कि अभ्यर्थियों की खाली OMR शीट भरने के लिए दिल्ली और लखनऊ से विशेष टीम बुलाए जाने का आरोप है। परीक्षा संचालन से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ के दौरान इस संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की बात कही जा रही है। इसके अलावा मुख्य परीक्षा के प्रश्नों को रांची और हजारीबाग के परीक्षा केंद्रों से बाहर ले जाकर लिखवाए जाने की भी जानकारी जांच में सामने आने का दावा किया गया है।
अधिकारियों, दलालों और एजेंटों के सिंडिकेट पर जांच
पूरे मामले में अधिकारियों, दलालों और एजेंटों के बीच कथित गठजोड़ की जांच की जा रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर वसूली गई रकम किस-किस तक पहुंची और परीक्षा प्रक्रिया में किस स्तर पर किसकी भूमिका थी। परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी TDPL के निदेशक रामवीर सिंह और अभय तिवारी से पूछताछ में भी परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़े कई तथ्य सामने आने की बात कही गई है।
JSSC-CGL मामले में भी CID का शिकंजा, आयोग कार्यालय से दस्तावेज जब्त
इधर, झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की CGL परीक्षा में कथित पेपर लीक और गड़बड़ी के मामले में भी CID की जांच तेज हो गई है। CID की विशेष जांच टीम ने नामकुम स्थित JSSC के मुख्यालय पहुंचकर परीक्षा से जुड़े रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच की।जांच टीम ने आयोग के सचिव सुधीर कुमार गुप्ता से पूछताछ की। इसके अलावा अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान भी दर्ज किए गए हैं।
रिकॉर्ड रूम और संबंधित शाखाओं में खंगाले दस्तावेज
CID टीम ने आयोग के रिकॉर्ड रूम समेत अन्य संबंधित शाखाओं में रखे दस्तावेजों की जांच की। जांच के दौरान CGL परीक्षा से जुड़े कई अहम दस्तावेज जब्त किए गए हैं। सूत्रों के अनुसार, जांच टीम को कुछ OMR शीट और अन्य महत्वपूर्ण कागजात भी मिले, जिन्हें जांच के लिए कब्जे में लिया गया है। जब्त दस्तावेजों की रिसीविंग भी संबंधित अधिकारियों से कराई गई है। CID ने परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसियों की नियुक्ति से संबंधित दस्तावेज भी अपने कब्जे में लिए हैं। इनमें वेबेल, ICN समेत अन्य कंपनियों की नियुक्ति, उन्हें दिए गए काम और उनके द्वारा आयोजित परीक्षाओं से जुड़े रिकॉर्ड शामिल बताए जा रहे हैं।
सचिव के आवास पर भी हुई थी तलाशी
JSSC कार्यालय पहुंचने से पहले CID की टीम आयोग के सचिव सुधीर कुमार गुप्ता के रांची स्थित आवास पर भी पहुंची थी। टीम ने वहां उपलब्ध दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच की। हालांकि आवास पर हुई कार्रवाई में क्या-क्या बरामद हुआ, इसे लेकर आधिकारिक स्तर पर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
300 से अधिक संदिग्धों से पूछताछ
JSSC-CGL मामले की जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है। CID की SIT अब तक 300 से अधिक संदिग्धों, बिचौलियों और सफल अभ्यर्थियों से पूछताछ कर चुकी है। जांच टीम संदिग्ध अभ्यर्थियों के परीक्षा केंद्रों की जानकारी के साथ उनके मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) भी खंगाल रही है। इसका उद्देश्य परीक्षा के दौरान अभ्यर्थियों के कथित संपर्कों और किसी सॉल्वर गैंग या बिचौलिये से संभावित कनेक्शन का पता लगाना है।
परीक्षा एजेंसी के दो कर्मचारी भी जांच के घेरे में
JSSC-CGL परीक्षा संचालन से जुड़ी आउटसोर्स एजेंसी ICN के दिल्ली से गिरफ्तार दो कर्मचारियों सोमांश प्रकाश और राहुल कुमार से भी पूछताछ की गई है। उनकी पुलिस रिमांड अवधि पूरी होने के बाद उन्हें विशेष CID अदालत में पेश किए जाने की प्रक्रिया की बात सामने आई है। पूछताछ के दौरान प्रश्नपत्र की सुरक्षा, वितरण व्यवस्था और कथित पेपर लीक सिंडिकेट से जुड़े अहम सुराग मिलने का दावा किया गया है।
पहले भी JSSC कार्यालय में हो चुकी है कार्रवाई
JSSC की विभिन्न परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच के सिलसिले में CID इससे पहले भी आयोग कार्यालय में कार्रवाई कर चुकी है। 17 अगस्त को भी CID ने JSSC कार्यालय में छापेमारी की थी। उस दौरान आयोग के सचिव से लंबी पूछताछ की गई थी और कई दस्तावेज तथा डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए थे। अब जांच टीम पहले से जब्त दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों का मिलान कर रही है। CID यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित अनियमितता परीक्षा प्रक्रिया के किस स्तर पर हुई और इसमें किन लोगों की भूमिका रही।
JPSC और JSSC दोनों मामलों में बढ़ी जांच की रफ्तार
JPSC की ACF-FRO परीक्षा में कथित तौर पर अभ्यर्थियों से पैसे लेकर उन्हें पास कराने, उत्तर पुस्तिकाओं को स्ट्रांग रूम से बाहर निकालने और सॉफ्टवेयर में हेराफेरी जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं। वहीं JSSC-CGL मामले में CID परीक्षा से जुड़े दस्तावेजों, OMR शीट, एजेंसियों की नियुक्ति और डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। दोनों मामलों में जांच एजेंसियां कथित सिंडिकेट के पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल लोगों की भूमिका का पता लगाने में जुटी हैं। जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और भी खुलासे होने की संभावना है।
नोट: उपरोक्त आरोप जांच में सामने आए कथित तथ्यों और पूछताछ में बताए गए बयानों पर आधारित हैं। आरोपों की अंतिम पुष्टि संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।
Threesocieties News Desk 



