Dhanbad RPF की बड़ी कार्रवाई: दून एक्सप्रेस के 6 बैगों में मिले 120 जिंदा कछुए, तस्करों की तलाश तेज

Dhanbad RPF ने 'ऑपरेशन वाइलेप' के तहत दून एक्सप्रेस से छह लावारिस बैगों में छिपाकर रखे 120 जीवित इंडियन फ्लैपशेल कछुए बरामद किए। कछुओं को वन विभाग को सौंप दिया गया है और तस्करों की तलाश जारी है।

Dhanbad RPF की बड़ी कार्रवाई: दून एक्सप्रेस के 6 बैगों में मिले 120 जिंदा कछुए, तस्करों की तलाश तेज
लावारिस बैगों से बरामद हुए 120 जीवित कछुए।

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  • दून एक्सप्रेस से 120 जीवित कछुए बरामद,छह लावारिस बैगों में छिपाकर रखे गए थे कछुए।
  • सभी कछुए इंडियन फ्लैपशेल प्रजाति के बताए गए,हर बोरे में 20-20 कछुए रखे गए थे
  • RPF ने 'ऑपरेशन वाइलेप' के तहत की कार्रवाई,बरामद कछुए वन विभाग को सौंपे गए।
  • तस्करों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए जांच जारी

धनबाद (Threesocieties.com Desk): धनबाद रेल मंडल में वन्यजीव तस्करी के खिलाफ रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की कार्रवाई में बड़ी सफलता मिली है। 'ऑपरेशन वाइलेप' के तहत RPF की टास्क टीम ने दून एक्सप्रेस से छह लावारिस बैगों में छिपाकर रखे गए 120 जीवित इंडियन फ्लैपशेल प्रजाति के कछुए बरामद किए हैं। बरामद कछुओं को आगे की कार्रवाई के लिए वन विभाग को सौंप दिया गया है। वहीं, बैगों को लावारिस छोड़कर फरार हुए तस्करों की पहचान और तलाश की जा रही है।

दून एक्सप्रेस में लावारिस पड़े थे छह बैग

जानकारी के अनुसार, मंडल सुरक्षा आयुक्त के निर्देशन में गठित RPF की टास्क टीम ट्रेन संख्या 13010 योग नगरी ऋषिकेश-कोलकाता दून एक्सप्रेस में गश्ती और चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान 28-29 अगस्त की मध्य रात्रि में गोमो से धनबाद स्टेशन के बीच टीम को ट्रेन के पिछले हिस्से में स्थित महिला कोच में कुछ लावारिस थैले और बोरे दिखाई दिए। रात करीब 12:30 बजे RPF टीम ने संदिग्ध सामान की जांच शुरू की। कोच में मौजूद यात्रियों से इन बैगों और बोरों के संबंध में पूछताछ की गई, लेकिन किसी भी यात्री ने सामान पर अपना अधिकार नहीं जताया। यात्रियों से सामान के मालिक के बारे में भी कोई जानकारी नहीं मिल सकी।

बाहर से ही हुआ कछुओं का संदेह

RPF जवानों ने जब लावारिस बैगों को बाहर से टटोलकर देखा तो उनके भीतर जीवित जीव होने का संदेह हुआ। इसके बाद ट्रेन के धनबाद स्टेशन पहुंचने का इंतजार किया गया। ट्रेन के धनबाद स्टेशन पहुंचने के बाद पोस्ट स्तरीय टास्क टीम की मदद से सभी संदिग्ध बैगों और बोरों को प्लेटफॉर्म नंबर दो पर उतारा गया। गवाहों की मौजूदगी में जब इन बैगों को खोला गया तो RPF टीम भी हैरान रह गई।

छह बैगों में 20-20 कछुए, कुल 120 बरामद

जांच के दौरान पाया गया कि प्रत्येक बैग के अंदर जूट के बोरों में कछुओं को भरकर रखा गया था। हर बोरे में 20-20 कछुए रखे गए थे। छह बैगों से कुल 120 जीवित इंडियन फ्लैपशेल कछुए बरामद किए गए। RPF के अनुसार, बरामद सभी कछुए जीवित थे। उन्हें सुरक्षित तरीके से बाहर निकालकर संबंधित विभाग को सौंपने की प्रक्रिया पूरी की गई।

वन विभाग को सौंपे गए कछुए

बरामद वन्यजीवों को आगे की आवश्यक कानूनी कार्रवाई के लिए वन विभाग को सौंप दिया गया है। अब वन विभाग और संबंधित सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन कछुओं को कहां से लाया गया था और इन्हें कहां ले जाया जा रहा था। RPF यह भी जांच कर रही है कि छह बैगों को ट्रेन में किसने रखा था और तस्करी के पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं। यात्रियों से पूछताछ के साथ-साथ अन्य उपलब्ध सुरागों के आधार पर तस्करों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।

'ऑपरेशन वाइलेप' के तहत कार्रवाई

वन्यजीवों की अवैध तस्करी और परिवहन पर रोक लगाने के लिए RPF की ओर से विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत धनबाद रेल मंडल में 'ऑपरेशन वाइलेप' के तहत ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों पर विशेष निगरानी एवं जांच की जा रही है। दून एक्सप्रेस में हुई यह कार्रवाई इसी अभियान का हिस्सा थी। RPF की सतर्कता के कारण लावारिस बैगों में छिपाकर ले जाए जा रहे 120 जीवित कछुओं को बरामद किया जा सका।

तस्करों ने अपनाया लावारिस सामान छोड़ने का तरीका

प्रारंभिक तौर पर जिस तरह से बैगों को महिला कोच में लावारिस छोड़कर तस्कर गायब हुए, उससे आशंका है कि कार्रवाई की भनक लगने के बाद सामान को छोड़ दिया गया हो। हालांकि, इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। RPF और वन विभाग अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि कछुओं को ट्रेन में किस स्टेशन से चढ़ाया गया था और तस्करी का अंतिम ठिकाना क्या था।

वन्यजीव तस्करी पर RPF की नजर

रेल मार्ग का इस्तेमाल कई बार अवैध वन्यजीवों के परिवहन के लिए किए जाने की आशंका रहती है। ऐसे में RPF की ओर से ट्रेनों और स्टेशनों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। दून एक्सप्रेस में 120 जीवित कछुओं की बरामदगी को इसी सतर्कता का परिणाम माना जा रहा है।

धनबाद रेल मंडल में हुई इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह सामने ला दिया है कि तस्कर रेलवे नेटवर्क का इस्तेमाल वन्यजीवों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए कर सकते हैं। RPF की टीम अब बरामदगी के साथ-साथ इस पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है।