JPSC-JSSC आंदोलन में नया मोड़: छात्रों की वार्ता कमेटी पर सरकार नाराज, बोले- पत्रकार-वकील क्यों?

रांची में JPSC-JSSC परीक्षा विवाद को लेकर छात्रों का आंदोलन तेज हो गया है। सरकार से वार्ता के लिए बनाई गई छात्रों की कमेटी में पत्रकार और वकील को शामिल किए जाने पर सरकार ने आपत्ति जताई है। छात्र खुले और पारदर्शी संवाद पर अड़े हैं, जबकि विधानसभा से लेकर सड़क तक इस मुद्दे पर सियासत गरमा गई है।

JPSC-JSSC आंदोलन में नया मोड़: छात्रों की वार्ता कमेटी पर सरकार नाराज, बोले- पत्रकार-वकील क्यों?
JPSC-JSSC आंदोलन में सरकार-छात्र आमने-सामने।

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  • JPSC-JSSC आंदोलन के बीच छात्रों ने 8 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल घोषित किया
  • पत्रकार और कानूनविद को केवल अभिभावक एवं मार्गदर्शक की भूमिका दी गई
  • सरकार ने कमेटी में पत्रकार और वकील के शामिल होने पर जताई आपत्ति
  • छात्रों की दो टूक- बंद कमरे में नहीं, सार्वजनिक और पारदर्शी वार्ता होगी

रांची (Threesocieties.com Desk):  झारखंड में JPSC और JSSC की प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली और पेपर लीक को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच वार्ता की तैयारी तो हो गई, लेकिन बातचीत शुरू होने से पहले ही नया विवाद खड़ा हो गया। सरकार ने छात्रों द्वारा गठित प्रतिनिधिमंडल में पत्रकारों और अधिवक्ता को शामिल किए जाने पर नाराजगी जताई है। हालांकि सरकार ने बातचीत से इनकार नहीं किया है, बल्कि छात्रों से समिति के स्वरूप पर पुनर्विचार करने का संदेश भेजा है।

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दूसरी ओर आंदोलनकारी छात्र भी अपने रुख पर कायम हैं। उनका कहना है कि पत्रकार और कानूनविद केवल अभिभावक एवं मार्गदर्शक की भूमिका में रहेंगे। सरकार के सामने आंदोलन से जुड़ी हर बात केवल छात्र प्रतिनिधि ही रखेंगे।

आठ छात्र होंगे वार्ता का चेहरा

छात्रों की ओर से घोषित प्रतिनिधिमंडल में आठ छात्र शामिल किए गए हैं। इनमें रविंद्र पासवान, पीयूष कुमार सिंह, रविंद्र कुमार रवि, राजेश प्रसाद, नीतू कुजूर, कार्तिक सोरेन, संदीप कुमार और शालू सिंह शामिल हैं। छात्रों का कहना है कि आंदोलन पूरी तरह छात्रों का है और सरकार से होने वाली बातचीत में उनकी ओर से यही प्रतिनिधि अपनी बात रखेंगे।

पत्रकार और अधिवक्ता रहेंगे केवल मार्गदर्शक

प्रतिनिधिमंडल में रांची प्रेस क्लब के अध्यक्ष शंभूनाथ चौधरी, वरिष्ठ पत्रकार विकास वर्मा तथा अधिवक्ता अजीत कुमार को अभिभावक एवं सलाहकार के रूप में शामिल किया गया है। छात्रों ने स्पष्ट किया है कि ये लोग वार्ता के दौरान किसी भी प्रकार की बातचीत नहीं करेंगे। उनका काम केवल छात्रों का मार्गदर्शन करना होगा। छात्रों ने यह भी तय किया है कि पत्रकार प्रतिनिधि बैठक में कैमरा, माइक, रिकॉर्डिंग डिवाइस या अन्य मीडिया उपकरण लेकर प्रवेश नहीं करेंगे।

सरकार क्यों हुई नाराज?

सरकार का मानना है कि जब मामला छात्रों से जुड़ा है तो बातचीत भी केवल छात्र प्रतिनिधियों के साथ होनी चाहिए। पत्रकार और अधिवक्ता को कमेटी में शामिल किए जाने पर सरकार ने आपत्ति दर्ज कराई है। हालांकि सरकार ने वार्ता का रास्ता बंद नहीं किया है और उम्मीद जताई जा रही है कि दोनों पक्ष बातचीत के प्रारूप पर सहमति बना सकते हैं।

बंद कमरे में नहीं होगी बातचीत

आंदोलनकारी छात्रों ने साफ कर दिया है कि वे सरकार से बंद कमरे में बातचीत नहीं करेंगे। उनका कहना है कि यह लाखों युवाओं के भविष्य का सवाल है, इसलिए पूरी वार्ता सार्वजनिक और पारदर्शी होनी चाहिए। छात्रों ने मांग की है कि बातचीत मीडिया की मौजूदगी में खुले स्थान पर कराई जाए ताकि पूरी प्रक्रिया जनता के सामने रहे।

सरकार ने दिया पांच सदस्यीय टीम का प्रस्ताव

सरकार की ओर से सदर एसडीओ कुमार रजत आंदोलन स्थल पहुंचे थे। उन्होंने छात्रों को बताया कि सरकार पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत करने के लिए तैयार है। छात्रों ने वार्ता पर सहमति तो जताई, लेकिन पारदर्शिता की अपनी शर्तें भी सामने रख दीं।

राहुल गांधी ने वीडियो कॉल पर की बात

आंदोलन के दौरान महानगर कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. कुमार राजा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की छात्रों से वीडियो कॉल पर बातचीत कराई। करीब दो मिनट तक चली बातचीत में छात्रों ने अपनी मांगें रखीं। राहुल गांधी ने समाधान के लिए सकारात्मक पहल का भरोसा दिलाया।

देवेंद्र महतो का अनशन जारी

छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो का आमरण अनशन अभी भी जारी है। सोशल मीडिया पर उनके अनशन समाप्त होने की खबरों को आंदोलनकारियों ने अफवाह बताया है। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने वीडियो कॉल के माध्यम से देवेंद्र महतो से केवल जल और नमक लेने का आग्रह किया ताकि उनका स्वास्थ्य सुरक्षित रह सके। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक सरकार लिखित रूप से मांगें स्वीकार नहीं करती, तब तक अनशन जारी रहेगा।

विधानसभा में भी गूंजा JPSC-JSSC मुद्दा

छात्र आंदोलन अब सड़क से विधानसभा तक पहुंच गया है। मानसून सत्र के दौरान विपक्ष ने सरकार को घेरा। भाजपा विधायक विशेष मास्क पहनकर सदन पहुंचे, जिस पर लिखा था— "न्याय चाहिए, धोखा नहीं। JPSC-JSSC की CBI जांच कराओ।" इस मुद्दे पर सदन में जोरदार हंगामा हुआ और कार्यवाही भी प्रभावित रही।

'नौकरी का रेट चार्ट' लेकर पहुंचे विधायक

आजसू विधायक निर्मल महतो गले में कथित "नौकरी का रेट चार्ट" टांगकर विधानसभा पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में भर्ती प्रक्रिया पर युवाओं का भरोसा खत्म हो चुका है और सरकार पारदर्शिता सुनिश्चित करने में विफल रही है।

अब सबकी नजर वार्ता पर

सरकार और छात्रों के बीच प्रतिनिधिमंडल को लेकर खींचतान के बावजूद वार्ता की संभावना बनी हुई है। यदि दोनों पक्ष प्रतिनिधिमंडल और वार्ता के प्रारूप पर सहमत हो जाते हैं, तो लंबे समय से चल रहे JPSC-JSSC आंदोलन के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हो सकती है। फिलहाल छात्र अपनी मांगों पर अडिग हैं और सरकार के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं।