26 दिन बाद टूटा सोनम वांगचुक का अनशन, आधी रात मेदांता पहुंचे जेपी नड्डा ने जूस पिला खत्म कराया उपवास
सोनम वांगचुक ने NEET पेपर लीक मामले में 26 दिनों से जारी भूख हड़ताल केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात के बाद समाप्त कर दी। सरकार ने शिक्षा सुधार, पेपर लीक पर संसद में चर्चा और प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई नहीं करने का आश्वासन दिया।
HighLights:
- 26 दिनों की भूख हड़ताल के बाद सोनम वांगचुक ने तोड़ा अनशन।
- सरकार ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई नहीं करने का दिया आश्वासन।
- संसद में पेपर लीक और शिक्षा सुधार पर चर्चा कराने की बात कही गई।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वांगचुक के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।
नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk): सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने आखिरकार 26 दिनों से जारी अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी। गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में उन्होंने जूस पीकर अपना अनशन तोड़ा। वांगचुक नीट (NEET) पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग को लेकर पिछले 26 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे थे।
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Just now in the presence of Union Ministers Sh. JP Nadda, Dr. Jitendra Singh and the senior leaders of Apex Body of Leh Ladakh I finally broke my fast after 26 days. Earlier 65 members of parliament from different political parties had visited or signed letters urging me to break… pic.twitter.com/RFCet7Oksy
— Sonam Wangchuk (@Wangchuk66) July 23, 2026
मंगलवार देर रात करीब 12:30 बजे जेपी नड्डा मेदांता अस्पताल पहुंचे और वांगचुक से लंबी बातचीत की। बैठक में लेह-लद्दाख एपेक्स बॉडी के वरिष्ठ प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। कई दौर की चर्चा के बाद वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त करने का फैसला लिया।
वांगचुक बोले- देशहित और शांति के लिए लिया फैसला
अनशन समाप्त करने के बाद सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि उन्होंने विभिन्न शर्तों पर लंबी वार्ता के बाद यह निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि देश में संभावित हिंसा और तनाव को देखते हुए यह फैसला जरूरी था। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ दिनों में विभिन्न राजनीतिक दलों के 65 सांसदों ने उनसे मुलाकात कर या पत्र लिखकर अनशन समाप्त करने की अपील की थी। वांगचुक ने कहा कि जल्द ही वह एक विस्तृत वीडियो जारी कर पूरी बातचीत और सरकार द्वारा दिए गए आश्वासनों की जानकारी देंगे।
सरकार ने दिए ये बड़े आश्वासन
बैठक के दौरान केंद्र सरकार की ओर से कई महत्वपूर्ण आश्वासन दिए गए। इनमें प्रमुख रूप से—
जंतर-मंतर और संसद मार्च में शामिल शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर कोई नया मामला दर्ज नहीं किया जाएगा।
संसद में पेपर लीक रोकने और शिक्षा सुधारों पर व्यापक चर्चा कर समाधान तलाशा जाएगा।
पेपर लीक से प्रभावित छात्रों के हितों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
आत्महत्या करने वाले NEET अभ्यर्थियों के परिवारों को उचित सहायता और मुआवजा देने पर विचार किया जाएगा।
इन आश्वासनों के बाद वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया।
पीएम मोदी ने की जल्द स्वस्थ होने की कामना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर सोशल मीडिया पर संदेश जारी किया। उन्होंने लिखा कि वह डॉक्टरों की सलाह का पालन करें और जल्द स्वस्थ होकर सामान्य जीवन में लौटें। प्रधानमंत्री ने उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हुए कहा कि सरकार परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने संकेत दिया कि पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून लाने वाला विधेयक जल्द संसद में पेश किया जाएगा। इस प्रस्तावित कानून में परीक्षा माफिया के खिलाफ कठोर दंड का प्रावधान किया जाएगा।
शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रखने की अपील
अनशन समाप्त करने से पहले सोनम वांगचुक ने आंदोलनकारियों से शांति बनाए रखने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि कुछ असामाजिक तत्व आंदोलन को हिंसक बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनका आंदोलन पूरी तरह अहिंसक है। उन्होंने कहा कि "शांति ही मेरा रास्ता है। किसी भी स्थिति में हिंसा का सहारा नहीं लिया जाना चाहिए।"
पत्नी गीतांजलि ने छात्रों की सराहना की
वांगचुक की पत्नी गीतांजलि एंग्मो ने भी आंदोलन में शामिल छात्रों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं ने अनुशासन, सहयोग और जिम्मेदारी का परिचय देकर यह साबित किया है कि भारत का भविष्य सुरक्षित हाथों में है। उन्होंने छात्रों के माता-पिता का भी आभार जताया।
सफदरजंग से मेदांता किया गया था शिफ्ट
लगातार बिगड़ती तबीयत के कारण अदालत के निर्देश पर सोनम वांगचुक को पहले दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल से गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा था। इसी दौरान केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह उनसे मिलने पहुंचे और बातचीत के बाद अनशन समाप्त कराने में सफल रहे।
राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर महत्वपूर्ण घटनाक्रम
सोनम वांगचुक का 26 दिन लंबा अनशन देशभर में शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन गया। सरकार द्वारा दिए गए आश्वासनों के बाद फिलहाल आंदोलन में एक बड़ा मोड़ आया है, लेकिन अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शिक्षा सुधार और पेपर लीक रोकने को लेकर सरकार अपने वादों को कितनी जल्दी अमल में लाती है।
CJP ने 20 जून से जंतर-मंतर पर धरना शुरू किया था, जिसमें मुख्य मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की थी। यह मांग NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं व पेपर लीक के मुद्दे पर उठाई गई थी। 28 जून को सोनम वांगचुक ने इस प्रदर्शन में शामिल होकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। 26 दिनों की हड़ताल के दौरान वांगचुक की सेहत बिगड़ी थी, उनका वजन कम हुआ और चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया था। आज उन्होंने मेदांता अस्पताल में भूख हड़ताल समाप्त की, जहां BJP के जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह भी मौजूद रहे।
CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा- जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी रहेगा
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिनों की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल समाप्त कर दी है। दीपके ने वांगचुक के इस फैसले की सराहना की। अभिजीत दीपके ने आगे कहा कि सोनम वांगचुक के हड़ताल खत्म करने के बावजूद CJP का शांतिपूर्ण प्रदर्शन जंतर मंतर पर तब तक जारी रहेगा, जब तक शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते। संगठन छात्रों, युवाओं और आम नागरिकों के मुद्दों पर लगातार आवाज उठाता रहा है।
सरकार हमारी मांग पर सहमत है: सौरव दास
कॉकरोच जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा, "कल एक चर्चा बुलाई गई है। हमें बहुत खुशी है कि सरकार हमारी इस मांग पर सहमत हो गई है कि यह चर्चा किसी न्यूट्रल जगह पर हो। इसके लिए कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया को चुना गया है।" CJP की प्रवक्ता वैष्णवी गौर ने कहा, "सरकार किसी न्यूट्रल जगह पर हमसे मिलने को तैयार हो गई है। हम अपनी मांगें रखेंगे, जिन पर हम पहले दिन से ही कायम हैं। हमारी चार मांगें हैं: पहली, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा। दूसरी, मृतक के परिवारों के लिए मुआवज़ा और बेगुनाह प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी FIR वापस ली जानी चाहिए।"
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