IIT-ISM धनबाद में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ बोले: ‘इनोवेशन का दौर है, बदलाव का इंतजार किया तो बहुत देर हो जाएगी’

IIT-ISM धनबाद में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने कहा कि आने वाला समय इनोवेशन और स्वदेशी तकनीक का है। NatFoE-2026 और IMP-2026 में रक्षा निर्यात, AI, ड्रोन, मैन्युफैक्चरिंग और आत्मनिर्भर भारत पर जोर दिया गया।

IIT-ISM धनबाद में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ बोले: ‘इनोवेशन का दौर है, बदलाव का इंतजार किया तो बहुत देर हो जाएगी’
IIT-ISM धनबाद में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ का बड़ा संदेश।

Advertisement

       HighLights:

  • IIT-ISM धनबाद में NatFoE-2026 और IMP-2026 का भव्य आगाज
  • रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने कहा- अगले 100 वर्षों की तकनीक आज से तैयार करनी होगी
  • 646 करोड़ से बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये हुआ भारत का रक्षा निर्यात
  • 102 देशों को भारत कर रहा रक्षा उपकरणों का निर्यात

धनबाद (Threesocieties.com Desk): IIT (ISM) धनबाद में शनिवार को तकनीक, इनोवेशन और स्वदेशी निर्माण की दिशा में देश के भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण मंथन शुरू हुआ। संस्थान के शताब्दी समारोह के अवसर पर National Frontiers of Engineering (NatFoE) 2026 के 20वें संस्करण और Innovation in Manufacturing Practices (IMP) 2026 का शुभारंभ हुआ। तीन दिवसीय यह आयोजन 8 से 10 अगस्त तक चलेगा।

यह भी पढ़ें: BCCL में INMOSSA की नई टीम घोषित, कुश कुमार सिंह बने डिप्टी जनरल सेक्रेटरी; बोले- पुराने जोश के साथ हुई वापसी

कार्यक्रम में केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने युवाओं, इंजीनियरों और रिसर्चर्स से अगले 100 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखकर आज से ही नई तकनीक विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि आने वाला समय इनोवेशन और स्वदेशी तकनीक का है और बदलाव का इंतजार करना देश के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

‘टेक्नोलॉजी तेजी से बदल रही, इंतजार किया तो बहुत देर हो जाएगी’

रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने कहा कि दुनिया में तकनीक हर घंटे बदल रही है। ऐसे दौर में यदि भारत बदलाव का इंतजार करता रहा तो बहुत देर हो जाएगी। देश को भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए आज से ही नई तकनीक और स्वदेशी समाधान विकसित करने होंगे।उन्होंने रिसर्चर्स और विद्यार्थियों से कहा कि रिसर्च केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को लैब से बाहर निकलकर ऐसी तकनीक तैयार करनी होगी, जिसका सीधा फायदा देश और समाज को मिले।उन्होंने कहा कि IIT-ISM जैसे संस्थानों की जिम्मेदारी केवल अपने पिछले 100 वर्षों की उपलब्धियों को याद करना नहीं है, बल्कि अगले 100 वर्षों की दिशा तय करना भी है।

‘2047 का भारत कैसा होगा, इसकी नींव आज के युवा रखेंगे’

IIT-ISM के शताब्दी समारोह का उल्लेख करते हुए संजय सेठ ने कहा कि किसी संस्थान का 100 वर्ष पूरा करना सामान्य उपलब्धि नहीं है। यह एक महत्वपूर्ण माइलस्टोन है। उन्होंने कहा कि अब पीछे मुड़कर यह देखने की जरूरत नहीं है कि पिछले 100 वर्षों में क्या हासिल किया गया। असली सवाल यह होना चाहिए कि अगले 100 वर्षों में देश और संस्थान को क्या हासिल करना है। रक्षा राज्य मंत्री ने कहा कि वर्ष 2047 में जब भारत आजादी के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब देश कैसा होगा, इसकी नींव आज के युवा तैयार करेंगे। इसलिए युवाओं को केवल नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि नई तकनीक और समाधान तैयार करने वाला बनना होगा।

646 करोड़ से 38,424 करोड़ पहुंचा रक्षा निर्यात

रक्षा क्षेत्र में भारत की बदलती तस्वीर का उदाहरण देते हुए संजय सेठ ने कहा कि कुछ वर्षों पहले तक भारत रक्षा उपकरणों का बड़ा आयातक था। वर्ष 2013 में भारत का रक्षा निर्यात महज 646 करोड़ रुपये था, लेकिन अब यह बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये हो चुका है।उन्होंने कहा कि आज भारत 102 देशों को रक्षा सामग्री का निर्यात कर रहा है। यह बदलाव देश में विकसित हो रही स्वदेशी तकनीक, स्टार्टअप और MSME की क्षमता को दर्शाता है।उन्होंने बताया कि भारत का रक्षा उत्पादन पिछले वर्ष करीब 1.78 लाख करोड़ रुपये रहा है और वर्ष 2029 तक इसे बढ़ाकर 3 लाख करोड़ रुपये करने का लक्ष्य रखा गया है।

ऑपरेशन सिंदूर को बताया स्वदेशी रक्षा क्षमता का उदाहरण

संजय सेठ ने स्वदेशी रक्षा तकनीक की क्षमता का उल्लेख करते हुए ऑपरेशन सिंदूर को एक महत्वपूर्ण उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि भारत ने लंबे समय तक रक्षा क्षेत्र में विदेशी उपकरणों पर निर्भरता देखी है, लेकिन अब देश अपनी तकनीक और प्रणालियों को विकसित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों और युवा रिसर्चर्स से ड्रोन, एयरोस्पेस, साइबर सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे क्षेत्रों में नए प्रयोग करने का आह्वान किया।

NatFoE-2026 और IMP-2026 में देशभर से जुटे विशेषज्ञ

IIT (ISM) धनबाद और Indian National Academy of Engineering (INAE) के संयुक्त सहयोग से आयोजित NatFoE-2026 और IMP-2026 में देशभर के प्रमुख इंजीनियर, वैज्ञानिक, शिक्षाविद, रिसर्चर, इंडस्ट्री प्रतिनिधि, स्टार्टअप, MSME और छात्र हिस्सा ले रहे हैं।कार्यक्रम का उद्देश्य नई तकनीकों पर चर्चा के साथ रिसर्च को वास्तविक उत्पादों और तकनीकी समाधानों में बदलने के लिए एक प्रभावी मंच उपलब्ध कराना है।

INAE के प्रेसिडेंट जे.डी. पाटिल ने कहा कि NatFoE का उद्देश्य युवा इंजीनियरों और रिसर्चर्स को नई तकनीक पर काम करने के लिए प्रोत्साहित करना है। उन्होंने रणनीतिक और रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भरता के लिए एकेडमिया, इंडस्ट्री और स्टार्टअप के बीच मजबूत सहयोग को जरूरी बताया।

SAIL चेयरमैन बोले- इंडस्ट्री को लगातार बदलना होगा

SAIL के चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर अशोक कुमार पांडा ने कहा कि तेजी से बदलते बिजनेस और टेक्नोलॉजी के दौर में इंडस्ट्री के लिए लगातार खुद को बदलना जरूरी है। उन्होंने इंडिजिनस टेक्नोलॉजी, डिजिटाइजेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को इंडस्ट्री की सुरक्षा, दक्षता और उत्पादकता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण बताया।

देश की वास्तविक समस्याओं पर रिसर्च करें युवा

पद्मश्री प्रो. संघमित्रा बंदोपाध्याय ने युवाओं से देश की वास्तविक समस्याओं को ध्यान में रखकर रिसर्च करने की अपील की। उन्होंने जिम्मेदार और एथिकल इंजीनियरिंग को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने AI, मशीन लर्निंग और कम्प्यूटेशनल बायोलॉजी के क्षेत्र में अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि देश को ऐसी स्वदेशी तकनीक विकसित करने की जरूरत है, जो वास्तविक समस्याओं का समाधान कर सके।

IIT-ISM को माइनिंग से आगे मैन्युफैक्चरिंग पर भी देना होगा जोर

IIT (ISM) धनबाद के निदेशक प्रो. सुकुमार मिश्रा ने कहा कि NatFoE और IMP एकेडमिया, इंडस्ट्री, रिसर्च ऑर्गनाइजेशन और पॉलिसी मेकर्स को एक मंच पर लाने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने युवा रिसर्चर्स से विशेषज्ञों के साथ संवाद कर नए कोलैबोरेशन और रिसर्च की संभावनाएं तलाशने की अपील की। आयोजन के प्रमुख विषयों में Advanced Manufacturing, Critical Metals and Process Technologies तथा Stealth Defence Platforms के लिए Antenna, RF Structures और RCS Control Technologies की Manufacturing and Integration शामिल हैं।

IIT-ISM के लिए यह आयोजन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि संस्थान को अपनी पारंपरिक माइनिंग विशेषज्ञता के साथ अब एडवांस मैन्युफैक्चरिंग, क्रिटिकल मिनरल्स, डिफेंस टेक्नोलॉजी और स्वदेशी तकनीकी समाधान के क्षेत्र में अपनी भूमिका और मजबूत करने का अवसर मिल रहा है।

कार्यक्रम के अंत में प्रो. अमित राय दीक्षित ने धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने मुख्य अतिथि, सम्मानित अतिथियों, INAE, विशेषज्ञों, फैकल्टी, रिसर्चर्स, छात्रों और आयोजन से जुड़े सभी लोगों के प्रति आभार जताया। IIT-ISM धनबाद का यह आयोजन न केवल संस्थान के 100 वर्षों की यात्रा का उत्सव है, बल्कि आने वाले 100 वर्षों के लिए तकनीक, इनोवेशन और आत्मनिर्भर भारत की दिशा तय करने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।