कोयला माफियाओं की अब खैर नहीं! CISF को मिले नए कानूनी अधिकार, मौके पर होगी तलाशी, जब्ती और केस दर्ज

कोयला चोरी और अवैध खनन पर लगाम कसने के लिए केंद्र सरकार ने CISF को MMDR Act के तहत बड़े कानूनी अधिकार दिए हैं। अब CISF सीधे तलाशी, जब्ती, अवैध खनिज जब्त करने और अदालत में केस दर्ज कर सकेगी। धनबाद, BCCL और ECL क्षेत्रों में जीरो कोल लीकेज मिशन के तहत सख्त कार्रवाई शुरू।

कोयला माफियाओं की अब खैर नहीं! CISF को मिले नए कानूनी अधिकार, मौके पर होगी तलाशी, जब्ती और केस दर्ज
अब CISF करेगी सीधे रेड, जब्ती और मुकदमा।

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       HighLights:

  • केंद्र सरकार ने CISF को MMDR Act के तहत बड़ी कानूनी शक्तियां दीं
  • अब CISF सीधे तलाशी, जब्ती और अदालत में केस दर्ज करा सकेगी
  • अवैध खनन, कोयला चोरी और तस्करी पर चलेगा जीरो टॉलरेंस अभियान
  • धनबाद, आसनसोल और ECL-BCCL क्षेत्रों में कार्रवाई होगी और तेज
  • QRT की तैनाती और GST के ई-वे बिल वेरिफिकेशन से होगी निगरानी

नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk): देश की ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय संपदा की रक्षा को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। अवैध कोयला खनन, कोयला चोरी और तस्करी पर पूरी तरह लगाम लगाने के उद्देश्य से केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) को खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 (MMDR Act) के तहत व्यापक कानूनी अधिकार प्रदान किए गए हैं। सरकार के इस फैसले को 'जीरो कोल लीकेज मिशन' की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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अब तक कोयला चोरी के मामलों में CISF को स्थानीय प्रशासन और अन्य एजेंसियों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन नए अधिकार मिलने के बाद बल स्वतंत्र रूप से कार्रवाई कर सकेगा। इससे कोयला चोरी के खिलाफ अभियान और अधिक प्रभावी होने की उम्मीद जताई जा रही है।

अब CISF सीधे करेगी कार्रवाई

नए प्रावधानों के तहत CISF अधिकारियों को संदिग्ध स्थानों पर बिना देरी के पहुंचकर तलाशी लेने, अवैध रूप से निकाले गए कोयले और अन्य खनिजों को जब्त करने तथा चोरी में प्रयुक्त मशीनरी, वाहनों और उपकरणों को मौके पर ही सीज करने का अधिकार मिल गया है।सबसे अहम बदलाव यह है कि अब ऐसे मामलों में CISF स्वयं अदालत में शिकायत दर्ज कर कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ा सकेगी। इससे अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया पहले की तुलना में काफी तेज और प्रभावी हो जाएगी।

धनबाद और ECL-BCCL क्षेत्रों पर विशेष फोकस

झारखंड का धनबाद, पश्चिम बंगाल का आसनसोल तथा BCCL और ECL के कई क्षेत्र लंबे समय से अवैध खनन और कोयला चोरी की समस्या से प्रभावित रहे हैं। इन इलाकों में संगठित गिरोहों द्वारा राष्ट्रीय संपदा की लगातार चोरी किए जाने की शिकायतें मिलती रही हैं।इसी को देखते हुए सरकार ने इन संवेदनशील क्षेत्रों में CISF की तैनाती और निगरानी को और मजबूत करने का निर्णय लिया है।

डीआईजी के.पी. सिंह ने लिया सुरक्षा व्यवस्था का जायजा

नए अधिकार मिलने के बाद CISF के डीआईजी के.पी. सिंह आसनसोल के शीतलपुर स्थित CISF मुख्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने वरिष्ठ कमांडेंट राहुल सिंह गौतम सहित अधिकारियों और जवानों के साथ बैठक कर नई व्यवस्था के तहत कार्रवाई की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की। इसके बाद उन्होंने ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) मुख्यालय पहुंचकर CMD सतीश झा से मुलाकात की और कोयला क्षेत्रों में संयुक्त अभियान, सुरक्षा व्यवस्था और समन्वय को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श किया।

गृह मंत्री की समीक्षा बैठक के बाद लागू हुई रणनीति

सूत्रों के अनुसार यह निर्णय हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तथा केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के बाद लिया गया। बैठक में अवैध खनन, कोयला चोरी और तस्करी पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले किए गए थे। सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि राष्ट्रीय संपदा की चोरी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी और इसके खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई जाएगी।

QRT और डिजिटल निगरानी भी होगी मजबूत

नई रणनीति के तहत कोयला क्षेत्रों में क्विक रिस्पांस टीम (QRT) की तैनाती बढ़ाई जाएगी, ताकि सूचना मिलते ही तत्काल कार्रवाई की जा सके। इसके साथ ही अवैध परिवहन रोकने के लिए GST विभाग के साथ समन्वय स्थापित किया जाएगा। अब कोयला ले जाने वाले वाहनों के ई-वे बिल का मौके पर सत्यापन किया जाएगा, जिससे फर्जी दस्तावेजों के जरिए होने वाली तस्करी पर भी अंकुश लगाया जा सके।

कोयला माफियाओं के लिए बढ़ेगी मुश्किल

विशेषज्ञों का मानना है कि CISF को मिले ये अधिकार कोयला चोरी के खिलाफ अभियान में बड़ा बदलाव साबित हो सकते हैं। अब कार्रवाई के लिए अलग-अलग एजेंसियों पर निर्भरता कम होगी और मौके पर ही कानूनी प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी। यदि इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू किया गया तो धनबाद, BCCL, ECL और अन्य कोयला क्षेत्रों में सक्रिय अवैध खनन गिरोहों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई संभव होगी। सरकार की मंशा साफ है कि राष्ट्रीय संपदा की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और कोयला चोरी के खिलाफ अब किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।