BCCL की मुराईडीह परियोजना को मिलेगी रफ्तार! वन स्वीकृति के लिए दिल्ली में CMD की अहम बैठक
BCCL CMD Manoj Kumar Agrawal ने नई दिल्ली में MoEFCC के अधिकारियों के साथ मुराईडीह कोलियरी परियोजना की प्रथम चरण की वन स्वीकृति पर महत्वपूर्ण बैठक की। परियोजना से कोकिंग कोल उत्पादन बढ़ेगा और देश की ऊर्जा सुरक्षा व इस्पात उद्योग को मजबूती मिलेगी।
HighLights:
- बीसीसीएल के सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल ने नई दिल्ली में MoEFCC अधिकारियों के साथ की महत्वपूर्ण बैठक
- बरोरा क्षेत्र की मुराईडीह कोलियरी परियोजना के प्रथम चरण की वन स्वीकृति पर हुई सकारात्मक चर्चा
- परियोजना से उच्च गुणवत्ता वाले कोकिंग कोयले का उत्पादन बढ़ेगा
- देश की ऊर्जा सुरक्षा, इस्पात उद्योग और आत्मनिर्भर भारत मिशन को मिलेगा बड़ा लाभ
- वन स्वीकृति मिलने के बाद परियोजना के शीघ्र क्रियान्वयन की उम्मीद बढ़ी
धनबाद/नई दिल्ली(Threesocieties.com Desk): भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और उच्च गुणवत्ता वाले कोकिंग कोयले के उत्पादन को बढ़ाने की दिशा में भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। 16 जुलाई 2026 को बीसीसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक (CMD) मनोज कुमार अग्रवाल ने नई दिल्ली स्थित पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के इंदिरा पर्यावरण भवन में महानिरीक्षक (वन संरक्षण) आर. रघु प्रसाद के साथ महत्वपूर्ण बैठक की।
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बैठक का मुख्य उद्देश्य धनबाद के बरोरा क्षेत्र स्थित मुराईडीह कोलियरी परियोजना के प्रथम चरण के लिए वन स्वीकृति (Forest Clearance) से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करना था। इस दौरान परियोजना की मंजूरी प्रक्रिया को तेज करने और विभिन्न तकनीकी एवं प्रशासनिक पहलुओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
राष्ट्रीय महत्व की परियोजना
बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि मुराईडीह कोलियरी परियोजना केवल बीसीसीएल के लिए ही नहीं, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक विकास के लिहाज से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। परियोजना के शुरू होने से उच्च गुणवत्ता वाले कोकिंग कोयले का उत्पादन बढ़ेगा, जिसका सीधा लाभ देश के इस्पात उद्योग को मिलेगा। भारत में स्टील उत्पादन की बढ़ती मांग को देखते हुए घरेलू स्तर पर कोकिंग कोल उत्पादन बढ़ाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। ऐसे में यह परियोजना आयात पर निर्भरता कम करने और आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है।
वन स्वीकृति प्रक्रिया में तेजी लाने पर चर्चा
बैठक के दौरान परियोजना की वन स्वीकृति प्रक्रिया में आने वाली औपचारिकताओं को शीघ्र पूरा करने और संबंधित प्रक्रियाओं में तेजी लाने पर सकारात्मक चर्चा हुई। अधिकारियों ने परियोजना के राष्ट्रीय महत्व को देखते हुए विभिन्न बिंदुओं पर विचार साझा किए। बीसीसीएल प्रबंधन का मानना है कि वन स्वीकृति मिलने के बाद परियोजना का कार्य तेजी से आगे बढ़ेगा और उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
धनबाद और कोयला उद्योग को होगा लाभ
मुराईडीह कोलियरी परियोजना के शुरू होने से धनबाद और आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। परियोजना से रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, स्थानीय उद्योगों को गति मिलेगी और कोयला उत्पादन में भी वृद्धि होगी। इसके साथ ही बीसीसीएल की उत्पादन क्षमता मजबूत होने से देश की ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।
ऊर्जा सुरक्षा और इस्पात क्षेत्र को मिलेगा संबल
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में आधारभूत संरचना और स्टील सेक्टर के तेजी से विस्तार को देखते हुए कोकिंग कोल की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में मुराईडीह परियोजना से होने वाला अतिरिक्त उत्पादन घरेलू इस्पात उद्योग के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। इससे आयातित कोकिंग कोल पर निर्भरता कम होगी और विदेशी मुद्रा की भी बचत होगी।
बीसीसीएल की प्राथमिकता में प्रमुख परियोजना
बीसीसीएल लंबे समय से मुराईडीह कोलियरी परियोजना को आगे बढ़ाने के प्रयास में जुटा है। वन स्वीकृति की दिशा में मंत्रालय स्तर पर हुई यह बैठक परियोजना के शीघ्र क्रियान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। यदि सभी आवश्यक मंजूरियां समय पर मिल जाती हैं, तो आने वाले समय में यह परियोजना बीसीसीएल के लिए उत्पादन और राजस्व दोनों के लिहाज से मील का पत्थर साबित हो सकती है।
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