18 लाख के पैकेज से ब्रिटेन के वारविक तक, बेगूसराय के केशव वत्स की शानदार सफलता की कहानी
गूसराय के केशव वत्स का ब्रिटेन के प्रतिष्ठित वारविक बिजनेस स्कूल में चयन हुआ है। 18 लाख के पैकेज से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच और AI-Data Science तक जानिए उनकी सफलता की पूरी कहानी।
HighLights:
- बेगूसराय के केशव वत्स का ब्रिटेन के प्रतिष्ठित वारविक बिजनेस स्कूल में चयन
- बिजनेस एनालिटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में करेंगे स्नातकोत्तर अध्ययन
- 10वीं में 97 प्रतिशत अंक से लेकर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक शानदार प्रदर्शन
- HCLTech में AI और डेटा साइंस प्रोजेक्ट पर काम के बाद मिला करीब 18 लाख रुपये का नियुक्ति-पूर्व प्रस्ताव
बेगूसराय (Threesocieties.com Desk): बिहार के बेगूसराय की धरती ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है। बीहट के गुरुदासपुर टोला से निकलकर केशव वत्स ने अपनी मेहनत, लगन और शैक्षणिक उपलब्धियों के दम पर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे बेगूसराय का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। केशव का चयन ब्रिटेन के प्रतिष्ठित वारविक विश्वविद्यालय के वारविक बिजनेस स्कूल (Warwick Business School-WBS) में बिजनेस एनालिटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के लिए हुआ है।
सितंबर 2026 से शुरू होने वाले इस पाठ्यक्रम के जरिए केशव डेटा, तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बिजनेस एनालिटिक्स के क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता को और मजबूत करेंगे। बिजनेस एनालिटिक्स के क्षेत्र में वारविक की प्रतिष्ठा ने इस उपलब्धि को और खास बना दिया है।
बचपन से ही दिखी प्रतिभा, पढ़ाई में लगातार शानदार प्रदर्शन
केशव वत्स की सफलता किसी एक परीक्षा या उपलब्धि का परिणाम नहीं है। बचपन से ही पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं में उनकी प्रतिभा लगातार सामने आती रही है। उन्होंने 10वीं की परीक्षा में 97 प्रतिशत अंक हासिल किए। गणित और विज्ञान के प्रति उनकी विशेष रुचि रही। उन्होंने क्षेत्रीय गणित ओलंपियाड और अंतरराष्ट्रीय जूनियर विज्ञान ओलंपियाड जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में सफलता हासिल की। इसके अलावा राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा में राज्य स्तर पर चौथा स्थान प्राप्त किया।
राष्ट्रीय स्तर की विज्ञान प्रतिभा खोज परीक्षा में भी उन्होंने सफलता हासिल की। रेसोस्टार्ट और टैलेंटेक्स जैसी प्रतियोगिताओं में शीर्ष 20 में स्थान बनाकर उन्होंने अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। प्रतियोगी परीक्षाओं में भी उनका प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा। संयुक्त प्रवेश परीक्षा में उन्होंने 98 प्रतिशत अंक हासिल किए, जबकि वर्ष 2021 में आयोजित NEET में उन्हें 604 अंक प्राप्त हुए।
TISS से मजबूत हुई डेटा और एनालिटिक्स की नींव
स्कूली शिक्षा के बाद केशव ने मुंबई स्थित टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) से विश्लेषण एवं सतत विकास अध्ययन में चार वर्षीय स्नातक शिक्षा पूरी की। TISS में पढ़ाई के दौरान उन्होंने डेटा साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एनालिटिक्स और सतत विकास जैसे आधुनिक एवं तेजी से उभरते क्षेत्रों में अपनी समझ विकसित की। इसी दौरान उनके भीतर तकनीक और सामाजिक विकास को जोड़कर काम करने की रुचि भी मजबूत हुई। यही शैक्षणिक पृष्ठभूमि आगे चलकर उन्हें बिजनेस एनालिटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में उच्च शिक्षा की ओर ले गई।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी बनाई पहचान
केशव की उपलब्धियां सिर्फ पढ़ाई और तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी अपनी नेतृत्व क्षमता का प्रदर्शन किया है। वर्ष 2025 में कुआलालंपुर, मलेशिया में आयोजित एशिया पैसिफिक लीडर्स समिट में उन्होंने भाग लिया। वैश्विक चुनौतियों और संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों पर केंद्रित इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर उनकी भागीदारी महत्वपूर्ण रही। समिट में भागीदारी के बाद उन्हें एशिया पैसिफिक लीडर्स एंबेसडर 2025 के रूप में सम्मानित किया गया। इससे उनकी नेतृत्व क्षमता और वैश्विक मुद्दों के प्रति उनकी समझ को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली।
शोध के क्षेत्र में भी सक्रिय रहे केशव
केशव ने पढ़ाई के साथ-साथ शोध के क्षेत्र में भी काम किया है। IIT बांबे और IIT कानपुर के सहयोग से आयोजित संकेत सम्मेलन में उन्होंने अपना शोध प्रस्तुत किया। शोध प्रस्तुति के लिए उन्हें सम्मान भी प्राप्त हुआ। इसके अलावा उत्तराखंड में आयोजित विश्व आपदा प्रबंधन शिखर सम्मेलन में उन्होंने आपदा एवं बाढ़ पूर्वानुमान से जुड़े विषय पर शोध प्रस्तुत किया। इससे स्पष्ट है कि केशव की रुचि केवल डिग्री हासिल करने तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए डेटा और तकनीक के इस्तेमाल की दिशा में भी काम किया।
HCLTech में AI और डेटा साइंस पर किया काम
तकनीकी क्षेत्र में केशव ने HCLTech में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा साइंस से जुड़े प्रोजेक्ट पर काम किया। इस दौरान उन्होंने अपनी तकनीकी क्षमता और व्यावहारिक ज्ञान का प्रदर्शन किया। उनके प्रदर्शन से प्रभावित होकर उन्हें करीब 18 लाख रुपये सालाना का नियुक्ति-पूर्व प्रस्ताव मिला। यह उपलब्धि उस समय और महत्वपूर्ण हो जाती है, जब उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर के संस्थान में जाने का फैसला किया। 18 लाख रुपये के पैकेज का अवसर मिलने के बावजूद केशव ने अपने करियर को केवल तत्काल नौकरी तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने उच्च शिक्षा के माध्यम से अपनी विशेषज्ञता को और व्यापक बनाने का निर्णय लिया।
इंपीरियल बिजनेस स्कूल का विकल्प भी था, फिर वारविक क्यों चुना?
केशव को लंदन स्थित इंपीरियल बिजनेस स्कूल से भी प्रवेश का अवसर मिला था। इसके बावजूद उन्होंने वारविक बिजनेस स्कूल को अपनी उच्च शिक्षा के लिए चुना। बिजनेस एनालिटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में वारविक की प्रतिष्ठा, पाठ्यक्रम की गुणवत्ता के साथ छात्रवृत्ति और आर्थिक सहायता भी उनके निर्णय में महत्वपूर्ण रही। इस तरह केशव अब सितंबर 2026 से ब्रिटेन में अपने नए अकादमिक सफर की शुरुआत करेंगे और डेटा एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में नई संभावनाओं पर काम करेंगे।
परिवार में भी शिक्षा और उपलब्धियों की मजबूत विरासत
केशव वत्स की सफलता के पीछे परिवार का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनके पिता मनोज कुमार रेलवे क्षेत्र में संवेदक हैं, जबकि माता रीमा शर्मा गृहिणी हैं। उनके दादा देव नंदन सिंह पहलवान और संवेदक रहे हैं। वहीं दादी स्वर्गीय सुशीला देवी सरकारी विद्यालय में शिक्षिका थीं। उनके नाना स्वर्गीय रामानंद शर्मा जिला शिक्षा पदाधिकारी के पद पर रहे थे। परिवार में शिक्षा और अनुशासन की इस मजबूत पृष्ठभूमि ने केशव को आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
बीहट से ब्रिटेन तक का सफर बना प्रेरणा
केशव वत्स की कहानी सिर्फ एक छात्र के विदेश जाकर पढ़ाई करने की कहानी नहीं है। यह छोटे शहर और स्थानीय परिवेश से निकलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने की प्रेरक मिसाल है। 10वीं में 97 प्रतिशत अंक से शुरू हुआ उनका सफर राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं, NEET, TISS की उच्च शिक्षा, शोध कार्य, अंतरराष्ट्रीय नेतृत्व मंच और HCLTech में AI एवं डेटा साइंस के अनुभव से होते हुए अब ब्रिटेन के वारविक बिजनेस स्कूल तक पहुंच चुका है।
करीब 18 लाख रुपये के नियुक्ति-पूर्व प्रस्ताव और इंपीरियल बिजनेस स्कूल से प्रवेश के अवसर के बावजूद उच्च शिक्षा को प्राथमिकता देकर केशव ने यह संकेत दिया है कि उनकी नजर केवल नौकरी पर नहीं, बल्कि तकनीक और बिजनेस एनालिटिक्स के क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल कर लंबी पारी खेलने पर है।बीहट के गुरुदासपुर टोला से ब्रिटेन तक का यह सफर निश्चित रूप से बेगूसराय के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। केशव अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एनालिटिक्स के क्षेत्र में अपनी नई पहचान बनाने की तैयारी में हैं।




