भरत तिवारी एनकाउंटर पर बड़ा खुलासा: पोस्टमार्टम में पांच गोलियां, पुलिस की 'आत्मरक्षा' वाली कहानी पर सवाल

भोजपुर के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद पुलिस की आत्मरक्षा में फायरिंग की कहानी पर सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्ट में पांच गोलियां लगने की पुष्टि हुई है, जबकि मामले की न्यायिक जांच और मानवाधिकार आयोग की पड़ताल जारी है।

भरत तिवारी एनकाउंटर पर बड़ा खुलासा: पोस्टमार्टम में पांच गोलियां, पुलिस की 'आत्मरक्षा' वाली कहानी पर सवाल
भरत तिवारी को लगी थीं पांच गोलियां।

      HighLights:

  • पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भरत भूषण तिवारी के पैर और जांघ में पांच गोलियां लगने की पुष्टि
  • पुलिस ने आत्मरक्षा में चार राउंड फायरिंग और एक राउंड थानाध्यक्ष द्वारा चलाने का दावा किया
  • पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस एफआईआर के बीच अंतर ने खड़े किए कई सवाल
  • न्यायिक जांच और राज्य मानवाधिकार आयोग पूरे मामले की पड़ताल करेगा
  • 13 जुलाई को राज्य मानवाधिकार आयोग में मामले की अगली सुनवाई होगी

आरा (Threesocieties.com Desk): भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में 17 जून को हुए चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद पुलिस कार्रवाई पर नए सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस की ओर से आत्मरक्षा में फायरिंग किए जाने का दावा किया गया था, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भरत भूषण तिवारी के पैर और जांघ में कुल पांच गोलियां लगने की पुष्टि हुई है।

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पुलिस प्राथमिकी के अनुसार, मुठभेड़ के दौरान एसटीएफ जवान ने आत्मरक्षा में चार राउंड फायरिंग की थी, जबकि तत्कालीन शाहपुर थानाध्यक्ष राजेश मालाकार ने भी एक राउंड फायर किया था। हालांकि प्राथमिकी में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि थानाध्यक्ष की गोली भरत को लगी थी या नहीं।

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इधर, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पांच गोलियां लगने का उल्लेख होने के बाद प्राथमिकी और मेडिकल रिपोर्ट के बीच अंतर को लेकर सवाल उठने लगे हैं। यह मामला अब केवल पुलिस मुठभेड़ तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि बल प्रयोग की आवश्यकता, परिस्थितियों और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के पालन की जांच का विषय बन गया है।

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आत्मरक्षा में इतनी गोलियां चलाना कितना उचित?

मामले की न्यायिक जांच और राज्य मानवाधिकार आयोग की जांच के दौरान यह महत्वपूर्ण प्रश्न उठ सकता है कि क्या आत्मरक्षा के नाम पर इतनी गोलियां चलाना आवश्यक था। मृतक की मां आशा देवी ने भी अपनी प्राथमिकी में भरत को पांच गोलियां मारे जाने का आरोप लगाया है। पुलिस का कहना है कि भरत भूषण तिवारी ने पुलिस टीम पर फायरिंग की थी और सरकारी वाहन के बोनट पर उसकी गोली लगी थी। पुलिस के अनुसार, कई बार आत्मसमर्पण की चेतावनी देने के बावजूद उसने फायरिंग जारी रखी, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी।

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पुलिस की कहानी में क्या है?

पुलिस के अनुसार, भरत एक हाथ में मोबाइल और दूसरे हाथ में पिस्टल लिए हुए था। उसने पहले पिस्टल फेंकी, लेकिन जब एक जवान हथियार उठाने के लिए आगे बढ़ा तो उसने दोबारा पिस्टल उठाकर पुलिस टीम पर दो राउंड फायरिंग कर दी। इसके बाद एसटीएफ जवान अक्षय ने आत्मरक्षा में कमर के नीचे चार राउंड फायरिंग की, जिससे भरत घायल होकर गिर पड़ा। पुलिस ने घटनास्थल से दो खोखा, एक देसी पिस्टल, एक मैगजीन और दो जिंदा कारतूस बरामद करने का दावा किया है।

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इलाज के दौरान हुई थी मौत

मुठभेड़ में घायल भरत भूषण तिवारी को पहले सदर अस्पताल, आरा ले जाया गया था, जहां चिकित्सकों ने प्रारंभिक जांच में ही चार से पांच गोलियां लगने की बात कही थी। गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH) रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

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मानवाधिकार आयोग और न्यायिक जांच की नजर

राज्य मानवाधिकार आयोग ने मामले में चार सप्ताह के भीतर रिपोर्ट तलब की है और अगली सुनवाई की तारीख 13 जुलाई तय की है। जांच एजेंसियां एफआईआर, घटनास्थल से मिले साक्ष्य, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, बैलिस्टिक रिपोर्ट और संबंधित पुलिसकर्मियों के बयान के आधार पर पूरे घटनाक्रम की समीक्षा करेंगी। मृतक के परिजनों ने पहले से ही पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। ऐसे में न्यायिक जांच और मानवाधिकार आयोग की पड़ताल से यह तय होगा कि पुलिस की कार्रवाई परिस्थितियों के अनुरूप थी या फिर इस चर्चित मुठभेड़ में जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया गया।