धनबाद में बेलगाम कोयला चोरी! 5 महीने में 522 मामले, 2.37 करोड़ के कोयले पर हाथ साफ

धनबाद में कोयला चोरी का अवैध कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। जनवरी से मई 2026 के बीच 522 मामले दर्ज हुए हैं और 2.37 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के 2972 टन कोयले की चोरी का प्रयास हुआ है। ड्रोन निगरानी, छापेमारी और अवैध खनन स्थलों को बंद करने के बावजूद कोयला माफियाओं के हौसले बुलंद हैं।

धनबाद में बेलगाम कोयला चोरी! 5 महीने में 522 मामले, 2.37 करोड़ के कोयले पर हाथ साफ
धनबाद में कोयला माफियाओं का नेटवर्क सक्रिय।

धनबाद (Threesocieties.com Desk): कोयला राजधानी धनबाद में कोयला चोरी का अवैध कारोबार लगातार बढ़ता जा रहा है। कोयला चोरी पर रोक लगाने के लिए सुरक्षा एजेंसियों, स्थानीय प्रशासन और कोयला कंपनियों द्वारा लगातार अभियान चलाए जाने के बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा है। ताजा आंकड़ों ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर इतनी निगरानी और कार्रवाई के बावजूद कोयला माफियाओं के हौसले कैसे बुलंद हैं।

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बीते पांच महीनों यानी जनवरी से मई 2026 के बीच कोयला चोरी के 522 मामले दर्ज किए गए हैं। यह आंकड़ा बीसीसीएल मुख्यालय में उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार है। इस अवधि में करीब 2972.13 मीट्रिक टन कोयला चोरी करने का प्रयास किया गया, जिसकी अनुमानित कीमत 2.37 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है।

स्थानीय संरक्षण के आरोपों से बढ़ी चिंता

कोयलांचल में लंबे समय से यह आरोप लगता रहा है कि कोयला चोरों और अवैध खनन से जुड़े गिरोहों को स्थानीय स्तर पर संरक्षण मिलता है। आरोप यह भी हैं कि कुछ स्थानों पर पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के कुछ कर्मियों की मिलीभगत के कारण यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार बढ़ते मामलों ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ड्रोन सर्विलांस और संयुक्त अभियान भी नहीं रोक पाए चोरी

कोयला चोरी रोकने के लिए संवेदनशील इलाकों में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। जनवरी से मई के बीच कुल 333 बार ड्रोन सर्विलांस किया गया। ड्रोन निगरानी के आधार पर 140 कार्रवाई भी हुई, लेकिन इसके बावजूद चोरी की घटनाओं में कोई बड़ी कमी दर्ज नहीं की गई।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक चोरी में शामिल संगठित गिरोहों की आर्थिक और लॉजिस्टिक सप्लाई चेन को नहीं तोड़ा जाएगा, तब तक केवल निगरानी और छापेमारी से स्थायी समाधान संभव नहीं होगा।

पांच महीनों में 30 एफआईआर दर्ज

कोयला चोरी के खिलाफ कार्रवाई के तहत पांच महीनों में कुल 30 एफआईआर दर्ज की गईं। कई मामलों में तकनीकी निगरानी और खुफिया सूचना के आधार पर छापेमारी की गई। इसके बावजूद कोयला चोरी की घटनाएं जारी रहने से प्रशासन की चुनौतियां बढ़ गई हैं।

मई में सबसे ज्यादा सक्रिय रहे कोयला चोर

महीनेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो मई 2026 में सबसे अधिक 128 मामले सामने आए। इसके बाद मार्च में 120, अप्रैल में 109, फरवरी में 87 और जनवरी में 78 मामले दर्ज किए गए।

महीना         दर्ज मामले
जनवरी           78
फरवरी            87
मार्च              120
अप्रैल           109
मई               128

मई महीने में अचानक बढ़ी घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।

232 अवैध खनन स्थलों को किया गया बंद

अवैध खनन रोकने के लिए जनवरी से मई तक 232 अवैध माइनिंग साइटों को भरकर बंद किया गया। इनमें अप्रैल में सबसे अधिक 57, मई में 51, मार्च में 44, जनवरी में 41 और फरवरी में 39 अवैध स्थलों पर कार्रवाई की गई। इसके बावजूद नए स्थानों पर अवैध खनन और कोयला चोरी की गतिविधियां सामने आ रही हैं, जो प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई हैं।

आईसीसीसी निगरानी से 476 मामले चिन्हित

इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) की निगरानी से 476 मामले चिन्हित किए गए। इनमें 474 मामलों में कार्रवाई की गई और करीब 118 मीट्रिक टन कोयला बरामद किया गया, जिसकी अनुमानित कीमत 10.12 लाख रुपये बताई गई है।

मानसून से पहले बढ़ जाती है चुनौती

अधिकारियों के अनुसार मानसून शुरू होने से पहले अवैध खनन और कोयला चोरी की गतिविधियों में तेजी आ जाती है। बारिश के मौसम में खदानों में पानी भरने से पहले माफिया अधिक से अधिक कोयला निकालने की कोशिश करते हैं। इसी वजह से सुरक्षा एजेंसियों ने संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त बल की तैनाती, रात्रि गश्त और संयुक्त अभियान तेज कर दिए हैं।

सबसे बड़ा सवाल: आखिर कब थमेगा काला कारोबार?

धनबाद में कोयला चोरी केवल आर्थिक नुकसान का मामला नहीं है, बल्कि यह सुरक्षा, प्रशासनिक जवाबदेही और कानून व्यवस्था से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है। करोड़ों रुपये के नुकसान और लगातार बढ़ते मामलों के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या केवल कार्रवाई और निगरानी से यह काला कारोबार रुकेगा या फिर इसके पीछे काम कर रहे पूरे नेटवर्क पर निर्णायक कार्रवाई की जरूरत है।