BCCL में बायोमेट्रिक फर्जीवाड़े का बड़ा खुलासा, विजिलेंस जांच के बाद एजेंट और क्लर्क पर गिरी गाज

बीसीसीएल के एरिया-12 स्थित दहीबाड़ी एनएलओसीपी बसंतीमाता में फर्जी बायोमेट्रिक हाजिरी के मामले में विजिलेंस जांच के बाद एजेंट और क्लर्क पर कार्रवाई शुरू हो गई है। 64 श्रमिकों की शिकायत के बाद जांच में सात मामलों में अनियमितता सामने आई है, जबकि 138 दिनों तक मैन्युअल हाजिरी दर्ज होने से नई बहस छिड़ गई है।

BCCL में बायोमेट्रिक फर्जीवाड़े का बड़ा खुलासा, विजिलेंस जांच के बाद एजेंट और क्लर्क पर गिरी गाज
फर्जी बायोमेट्रिक हाजिरी से BCCL को लाखों का चूना।

        HighLights

  • 64 श्रमिकों की शिकायत के बाद खुला फर्जी बायोमेट्रिक हाजिरी का मामला
  • विजिलेंस जांच में सात मामलों में अनियमितता की पुष्टि
  • एजेंट देवाशीष चक्रवर्ती और क्लर्क समीर मांझी को चार्जशीट और शोकॉज नोटिस
  • घायल श्रमिक को इंज्यूरी लीव देने के बजाय दर्ज कर दी गई सामान्य उपस्थिति
  • एक कर्मचारी की 138 दिनों तक मैन्युअल हाजिरी दर्ज होने से बढ़े संदेह
  • सभी मैन्युअल एंट्री एक ही SAP आईडी से होने पर उठे सवाल
  • बसंतीमाता-दाहिबारी कोलियरी के दो क्लर्कों का प्रशासनिक तबादला

धनबाद (Threesocieties.com Desk): भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) में बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली में कथित हेराफेरी का मामला अब प्रशासनिक कार्रवाई के चरण में पहुंच गया है। एरिया-12 के अंतर्गत आने वाली बसंतीमाता-दहीबाड़ी एनएलओसीपी में फर्जी बायोमेट्रिक हाजिरी के आरोपों की विजिलेंस जांच के बाद एजेंट देवाशीष चक्रवर्ती और क्लर्क समीर मांझी को शोकॉज नोटिस जारी करते हुए चार्जशीट थमा दी गई है।

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बीसीसीएल के चांच विक्टोरिया क्षेत्र के महाप्रबंधक संजय कुमार सिंह ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस कथित गड़बड़ी से कंपनी को लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान पहुंचा है।

64 श्रमिकों की शिकायत से शुरू हुई जांच

पूरे मामले की शुरुआत दिसंबर 2025 में हुई, जब 64 श्रमिकों की बायोमेट्रिक उपस्थिति को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कई कर्मचारियों की उपस्थिति बिना वास्तविक मौजूदगी के दर्ज की जा रही है। विजिलेंस विभाग की जांच में अधिकांश मामलों में उपस्थिति सही पाई गई, लेकिन सात मामलों में गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि हुई। इन्हीं मामलों को आधार बनाकर विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है।

घायल मजदूर को इंज्यूरी लीव देने के बजाय दर्ज कर दी गई उपस्थिति

जांच के दौरान सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया कि कार्यस्थल पर घायल हुए एक कर्मचारी को नियमानुसार इंज्यूरी लीव देने के बजाय उसकी सामान्य उपस्थिति दर्ज कर दी गई। इससे कर्मचारी के वैधानिक अधिकार प्रभावित हुए।सूत्रों के अनुसार, कर्मचारी भोलानाथ कुंभकार को इंज्यूरी लीव का लाभ मिलना चाहिए था, लेकिन रिकॉर्ड में उसकी नियमित हाजिरी दर्ज कर दी गई। विजिलेंस ने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही माना है।

एजेंट और क्लर्क पर कार्रवाई, लेकिन हाजिरी बाबू पर सवाल

महाप्रबंधक संजय कुमार सिंह ने बताया कि एजेंट और क्लर्क के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है। समीर मांझी के संबंध में यह बात सामने आई है कि उसके आईडी का उपयोग हाजिरी प्रक्रिया में किया गया था। उसने इस संबंध में विजिलेंस को लिखित स्पष्टीकरण भी सौंपा है।हालांकि कर्मचारियों के बीच इस बात को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि हाजिरी तैयार करने वाले बाबू और संबंधित इंचार्ज के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई, जबकि पूरी प्रक्रिया उनकी निगरानी में संचालित होती है।

'चेहरा नहीं पहचाना गया' के नाम पर दर्ज होती रही मैन्युअल हाजिरी

बसंतीमाता-दहीबाड़ी कोलियरी की आंतरिक जांच रिपोर्ट ने बायोमेट्रिक व्यवस्था पर और गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, आठ कर्मचारियों की उपस्थिति "चेहरा नहीं पहचाना गया" श्रेणी में मैन्युअल रूप से दर्ज की गई।सबसे अधिक चौंकाने वाला मामला एक केबलमैन का है, जिसकी लगातार 138 दिनों तक मैन्युअल उपस्थिति दर्ज की गई। जांच में यह भी सामने आया कि सभी प्रविष्टियां एक ही एसएपी आईडी से की गई थीं, जिससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

138 दिन की मैन्युअल हाजिरी ने बढ़ाए संदेह

जांच रिपोर्ट के मुताबिक भोलानाथ कुंभकार की 138 दिन, उत्तम बौरी की 45 दिन, असीम बौरी की 41 दिन, अशोक कुमार दास की 37 दिन, बुधराम बीपी की 28 दिन, सतिनाथ माझी और संतु मुखर्जी की 25-25 दिन तथा लखिकांता गोराई की 19 दिन मैन्युअल उपस्थिति दर्ज की गई। भोलानाथ कुंभकार के मामले में कारण बताया गया कि बाल कटवाने या चेहरे के स्वरूप में बदलाव के कारण सिस्टम चेहरा पहचान नहीं पा रहा था। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी लंबी अवधि तक मैन्युअल उपस्थिति दर्ज होना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा नहीं माना जा सकता।

दो क्लर्कों का तबादला, चर्चाओं का बाजार गर्म

इसी बीच बीसीसीएल प्रबंधन ने बसंतीमाता-दाहिबारी कोलियरी के स्टोर विभाग में कार्यरत दो क्लर्कों संदीप श्रीवास्तव और योगेश राजभर का प्रशासनिक आधार पर तबादला कर दिया है। दोनों को तत्काल प्रभाव से सीवी एरिया कार्यालय में पदस्थापित किया गया है।हालांकि प्रबंधन इसे नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया बता रहा है, लेकिन बायोमेट्रिक फर्जीवाड़े के खुलासे के बीच इन तबादलों को लेकर कर्मचारियों और श्रमिक संगठनों के बीच चर्चाएं तेज हो गई हैं।

प्रबंधन और विजिलेंस की नजर में कई और नाम

जीएम संजय कुमार सिंह ने संकेत दिया है कि कुछ अन्य कर्मचारियों के खिलाफ भी शिकायतें प्राप्त हुई हैं और उनकी कार्यप्रणाली प्रबंधन तथा विजिलेंस विभाग की निगरानी में है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे तथा कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।