कॉर्पोरेट जगत में वेदांता का डंका, टॉप-100 बेस्ट वर्कप्लेस में मिली जगह; कर्मचारियों को मिले 2500 करोड़ के शेयर
वेदांता समूह को ग्रेट प्लेस टू वर्क इंडिया की 2026 की टॉप-100 बेस्ट वर्कप्लेस कंपनियों की सूची में जगह मिली है। कंपनी ने ESOP योजना के जरिए कर्मचारियों के लिए 2500 करोड़ रुपये की संपत्ति तैयार की है और कार्यस्थल पर विविधता एवं समान अवसरों को बढ़ावा दिया है।
HighLights:
- ग्रेट प्लेस टू वर्क इंडिया की 2026 की टॉप-100 बेस्ट वर्कप्लेस सूची में शामिल हुई वेदांता।
- ESOP योजना के जरिए पिछले पांच वर्षों में कर्मचारियों के लिए 2500 करोड़ रुपये की वेल्थ बनाई।
- कंपनी के 40 फीसदी कर्मचारी 30 साल से कम उम्र के हैं।
- कार्यबल में महिलाओं की हिस्सेदारी 23 फीसदी तक पहुंची।
- लगभग 100 ट्रांसजेंडर प्रोफेशनल्स कंपनी के विभिन्न व्यवसायों में निभा रहे अहम भूमिका।
- कर्मचारियों के लिए भरोसा, इनोवेशन और समावेशी कार्य संस्कृति पर विशेष फोकस।
नई दिल्ली ( Threesocieties.com Desk): दुनिया की अग्रणी ऊर्जा और प्रौद्योगिकी कंपनियों में शुमार वेदांता समूह ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान दर्ज कराई है। 'ग्रेट प्लेस टू वर्क इंडिया' द्वारा जारी वर्ष 2026 की भारत की शीर्ष 100 सर्वश्रेष्ठ कंपनियों की सूची में वेदांता को शामिल किया गया है। यह सम्मान कंपनी की उस कार्य संस्कृति को दर्शाता है जिसमें कर्मचारियों के विश्वास, नवाचार, उत्कृष्ट प्रदर्शन और समावेशिता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है।
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कर्मचारियों को मिला 2500 करोड़ रुपये का बड़ा तोहफा
वेदांता ने केवल बेहतर कार्यस्थल उपलब्ध कराने तक ही खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि अपने कर्मचारियों को आर्थिक रूप से भी सशक्त बनाने का काम किया है। पिछले पांच वर्षों के दौरान कंपनी ने कर्मचारी स्टॉक विकल्प योजना यानी ESOP के माध्यम से अपने कर्मियों के लिए लगभग 2500 करोड़ रुपये की संपत्ति का सृजन किया है। कॉर्पोरेट जगत में यह उपलब्धि इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि बहुत कम कंपनियां अपने कर्मचारियों को कंपनी की सफलता में सीधे भागीदार बनाने का अवसर देती हैं।
युवा भारत की ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रही कंपनी
वेदांता का कार्यबल भारत की युवा आबादी का प्रतिनिधित्व करता है। कंपनी के लगभग 40 प्रतिशत कर्मचारी 30 वर्ष से कम आयु के हैं। इससे साफ है कि कंपनी युवा प्रतिभाओं को अवसर देने और नेतृत्व तैयार करने की दिशा में लगातार काम कर रही है।
महिलाओं और ट्रांसजेंडर प्रोफेशनल्स को मिला बड़ा मंच
पारंपरिक भारी उद्योग और माइनिंग सेक्टर में जहां महिलाओं की भागीदारी सीमित मानी जाती रही है, वहीं वेदांता ने इस सोच को बदलने का प्रयास किया है। कंपनी के कुल कार्यबल में महिलाओं की हिस्सेदारी 23 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जो इस क्षेत्र के लिए उल्लेखनीय उपलब्धि मानी जा रही है। इसके साथ ही सामाजिक मुख्यधारा से लंबे समय तक दूर रहे लगभग 100 ट्रांसजेंडर प्रोफेशनल्स आज कंपनी के विभिन्न व्यवसायों में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। यह औद्योगिक क्षेत्र में समावेशिता और सामाजिक बदलाव का मजबूत उदाहरण माना जा रहा है।
"भारत की विकास यात्रा का अहम हिस्सा है वेदांता"
वेदांता समूह की मुख्य मानव संसाधन अधिकारी (CHRO) नेहा शर्मा ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि यह सम्मान कंपनी की उस सोच का परिणाम है, जिसमें प्रदर्शन, भागीदारी और स्वामित्व की भावना को साथ लेकर आगे बढ़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि वेदांता धातु, महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा और प्रौद्योगिकी जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में काम कर रही है, जो भारत के भविष्य और आर्थिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। कंपनी अपने कर्मचारियों को वास्तविक समस्याओं के समाधान और चुनौतीपूर्ण कार्यों पर काम करने का अवसर देती है।
कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए बना उदाहरण
भारत में बेहतर कार्य संस्कृति, कर्मचारी कल्याण और समावेशिता को लेकर चल रही बहस के बीच वेदांता की यह उपलब्धि कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए एक उदाहरण बनकर सामने आई है। कर्मचारियों को आर्थिक भागीदारी, समान अवसर और सम्मानजनक कार्य वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में कंपनी का मॉडल आने वाले वर्षों में अन्य उद्योगों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।






