झारखंड: रांची में गूंजी कदमताल, 440 नए पुलिस अफसर और जवान बने झारखंड की नई सुरक्षा ढाल
रांची के डोरंडा स्थित जैप-1 परिसर में आयोजित पासिंग आउट परेड 2026 में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मौजूदगी में 440 नवप्रशिक्षित पुलिस अधिकारियों और जवानों ने शपथ ली। 25% महिला भागीदारी, उत्कृष्ट प्रशिक्षुओं का सम्मान और पुलिस परिवारों के लिए विशेष स्कूल व स्वास्थ्य सुविधाओं की घोषणा समारोह का मुख्य आकर्षण रही।
HighLights
- 4 नव नियुक्त डीएसपी और 336 जवानों सहित कुल 440 पुलिस अधिकारियों एवं जवानों ने शपथ ली
- बैच में लगभग 25 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी रही, जिसमें 81 महिला सिपाही शामिल रहीं
- मुख्यमंत्री ने पुलिसकर्मियों के बच्चों के लिए विशेष स्कूल और स्वास्थ्य सुविधाओं की घोषणा की
- उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रशिक्षुओं को मुख्यमंत्री ने ट्रॉफी देकर सम्मानित किया
- धनबाद जिला बल के सिपाही रंजीत उरांव को ओवरऑल सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षु जवान का पुरस्कार मिला
रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड पुलिस को गुरुवार को नई ऊर्जा और नई ताकत मिली, जब राजधानी रांची के डोरंडा स्थित जैप-1 परिसर में आयोजित पारण परेड समारोह-2026 में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मौजूदगी में 440 नवप्रशिक्षित पुलिस अधिकारियों और जवानों ने पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। इनमें 4 नव नियुक्त डीएसपी, 336 जवान और अन्य प्रशिक्षु अधिकारी शामिल थे, जिन्होंने अनुशासन, संविधान और जनसेवा के प्रति समर्पण का संकल्प लिया।
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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने परेड की सलामी ली और जवानों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि पुलिस बल में शामिल होना सिर्फ एक नौकरी प्राप्त करना नहीं, बल्कि राज्य और समाज की सुरक्षा का एक बड़ा दायित्व निभाना है। उन्होंने कहा कि अब ये सभी प्रशिक्षु केवल व्यक्तिगत जीवन तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि पूरे राज्य की सुरक्षा और कानून व्यवस्था के प्रहरी बनेंगे।
25 प्रतिशत महिला भागीदारी बनी आकर्षण का केंद्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बैच में लगभग 25 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी बेहद गर्व और खुशी की बात है। इस बैच में 81 महिला और 255 पुरुष सिपाही शामिल हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार चाहती है कि हर क्षेत्र में महिलाओं और पुरुषों की समान भागीदारी सुनिश्चित हो। उन्होंने कहा कि महिला पुलिसकर्मियों की बढ़ती संख्या न केवल पुलिस बल को मजबूत बनाएगी, बल्कि समाज में सुरक्षा और संवेदनशीलता का नया संदेश भी देगी।
'कर्तव्य निभाते समय जान का जोखिम भी उठाना पड़ सकता है'
मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस सेवा एक ऐसा दायित्व है, जिसमें कई बार कर्तव्य पालन के दौरान जान का जोखिम भी उठाना पड़ता है। राज्य के कई पुलिसकर्मियों ने अपने प्राणों की आहुति देकर जनता और राज्य की सुरक्षा सुनिश्चित की है। अब उन्हीं अधूरे सपनों और जिम्मेदारियों को आगे बढ़ाने का दायित्व इन नए प्रशिक्षुओं के कंधों पर है। उन्होंने कहा कि सरकारी तंत्र में रहकर हर चुनौती का सामना करना और उसका समाधान निकालना ही एक सच्चे पुलिसकर्मी की पहचान है।
पुलिस परिवारों के लिए स्कूल और स्वास्थ्य सुविधाओं की तैयारी
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि राज्य सरकार पुलिस विभाग के बच्चों के लिए आधुनिक और सर्वसुविधायुक्त आवासीय विद्यालयों का निर्माण कराएगी। इसके साथ ही पुलिस कर्मियों और उनके परिवारों के लिए विशेष स्वास्थ्य सुविधाएं भी स्थापित की जा रही हैं, ताकि जवान निश्चिंत होकर अपनी सेवाएं दे सकें।
30 सप्ताह की कठिन ट्रेनिंग के बाद मिली जिम्मेदारी
सिपाहियों ने सीटीसी स्वासपुर, मुसाबनी में 30 सप्ताह का कठिन प्रशिक्षण पूरा किया, जबकि चारों डीएसपी ने झारखंड पुलिस अकादमी, हजारीबाग से 12 महीने का प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण के दौरान जवानों को आधुनिक हथियार संचालन, लाइव फायरिंग, मैप रीडिंग, कठिन इलाकों में अभियान संचालन और मानवाधिकार संरक्षण सहित कई महत्वपूर्ण विषयों की ट्रेनिंग दी गई। एडीजी प्रिया दुबे ने कहा कि यह बैच उग्रवाद, अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौतियों का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
मार्च पास्ट से अतिथियों का किया अभिवादन
समारोह के दौरान प्रशिक्षु जवानों ने शानदार मार्च पास्ट कर उपस्थित अतिथियों का अभिवादन किया। उन्हें देश और राज्य सेवा, संविधान की रक्षा, पुलिस बल की गरिमा और कर्तव्यनिष्ठा की शपथ दिलाई गई। समारोह में पुलिस मुख्यालय और विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
उत्कृष्ट प्रशिक्षुओं को मिला सम्मान
पारण परेड समारोह के दौरान प्रशिक्षण में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों और जवानों को मुख्यमंत्री ने ट्रॉफी देकर सम्मानित किया।
सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षु डीएसपी का पुरस्कार रामलखन वर्णवाल को मिला।
ओवरऑल सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षु जवान का सम्मान धनबाद जिला बल के सिपाही रंजीत उरांव को दिया गया।
सर्वश्रेष्ठ अंतः विषय में विशेष शाखा रांची के सिपाही अविनाश कुमार प्रथम रहे।
सर्वश्रेष्ठ बाह्य विषय और सर्वश्रेष्ठ फायरर का पुरस्कार भी रंजीत उरांव ने अपने नाम किया।
सबसे ज्यादा प्रशिक्षु रांची और चाईबासा से
इस बैच में राज्य के विभिन्न जिलों और इकाइयों से जवान शामिल हुए। इनमें रांची से सर्वाधिक 44, चाईबासा से 22, जमशेदपुर से 20 और पलामू से 18 प्रशिक्षु जवान शामिल रहे। धनबाद और हजारीबाग से 14-14 जवानों ने प्रशिक्षण पूरा किया।
झारखंड पुलिस के लिए यह पासिंग आउट परेड सिर्फ एक औपचारिक समारोह नहीं, बल्कि राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यही प्रशिक्षु कानून व्यवस्था बनाए रखने, अपराध नियंत्रण और जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाएंगे।






