राहुल गांधी की सदस्यता पर खतरा? BJP MP निशिकांत दुबे ने दिया सब्सटेंटिव मोशन, चुनाव लड़ने पर बैन की मांग

लोकसभा में राहुल गांधी और सरकार के बीच टकराव तेज। बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने सब्सटेंटिव मोशन लाकर राहुल गांधी की सदस्यता रद्द करने और आजीवन चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध की मांग की। जानिए पूरा मामला।

राहुल गांधी की सदस्यता पर खतरा? BJP MP निशिकांत दुबे ने दिया सब्सटेंटिव मोशन, चुनाव लड़ने पर बैन की मांग
राहुल गांधी - निशिकांत दुबे (फाइल फोटो)।
  • 'FIR करो या सदस्यता लो, मैं नहीं डरूंगा',, राहुल गांधी ने अमेरिकी ट्रेड डील को किसान विरोधी बताया

नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk)। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और केंद्र सरकार के बीच सियासी टकराव अब नए स्तर पर पहुंच गया है। बीजेपी सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन (Privilege Motion) नहीं, बल्कि एक सब्सटेंटिव मोशन (Substantive Motion) का नोटिस दिया है। इस मोशन में राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता समाप्त करने और उन्हें आजीवन चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित करने की मांग की गई है।

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क्या है पूरा मामला?

बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को दिए नोटिस में आरोप लगाया है कि राहुल गांधी देश को गुमराह कर रहे हैं और उनके कथित संबंध जॉर्ज सोरोस जैसे “भारत-विरोधी तत्वों” से हैं। दुबे का दावा है कि वह लोकसभा में राहुल गांधी और जॉर्ज सोरोस के कथित रिश्तों का खुलासा करेंगे। उन्होंने कहा कि उनके नोटिस में यह भी उल्लेख है कि राहुल गांधी सोरोस फाउंडेशन, फोर्ड फाउंडेशन और यूएसएड (USAID) जैसी संस्थाओं के साथ विदेश यात्राएं करते हैं।

दुबे ने कहा: “मैंने कोई विशेषाधिकार हनन नोटिस नहीं दिया है। मैंने एक स्वतंत्र सब्सटेंटिव मोशन दिया है। संसद और देश को गुमराह करने के प्रयासों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।”

सब्सटेंटिव मोशन क्या होता है?

संसदीय प्रक्रिया में सब्सटेंटिव मोशन एक स्वतंत्र प्रस्ताव होता है, जिसे किसी विशेष मुद्दे पर सदन की राय या निर्णय प्राप्त करने के लिए लाया जाता है। इसके जरिए:

किसी सांसद की सदस्यता रद्द करने की मांग

राष्ट्रपति पर महाभियोग

मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का प्रस्ताव
जैसे गंभीर विषय उठाए जा सकते हैं।

अब यह लोकसभा स्पीकर पर निर्भर करेगा कि वह इस मोशन को स्वीकार करते हैं या नहीं। स्पीकर की मंजूरी के बाद ही इसे सदन में चर्चा के लिए लाया जा सकता है।

राहुल गांधी पर क्या हैं आरोप?

निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी:

बिना तथ्यों के आरोप लगाते हैं

संसद की गरिमा का उल्लंघन करते हैं

भारत-अमेरिका ट्रेड डील और केंद्रीय बजट पर भ्रामक बयान देते हैं

हाल ही में राहुल गांधी ने लोकसभा में इंडिया-US ट्रेड डील और बजट को लेकर सरकार पर तीखे सवाल उठाए थे। उन्होंने राजनीति को मार्शल आर्ट से जोड़ते हुए ‘ग्रिप’ और ‘चोक’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया, जिस पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने आपत्ति जताई थी।

कांग्रेस का पलटवार

कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बीजेपी के कदम पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा: “राहुल गांधी ने कौन सा विशेषाधिकार हनन किया है? पिछली बार उनकी सदस्यता खत्म की गई थी, लेकिन जनता ने उन्हें और ज्यादा वोटों से जिताया। अगर सरकार हमें फांसी पर चढ़ाना चाहती है तो हम उसके लिए भी तैयार हैं। हम सच बोलते रहेंगे।” हालांकि, जॉर्ज सोरोस से जुड़े आरोपों पर कांग्रेस की ओर से अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक बयान नहीं आया है।

पहले भी जा चुकी है सदस्यता

साल 2023 में सूरत की अदालत द्वारा मानहानि मामले में दो साल की सजा सुनाए जाने के बाद राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता रद्द कर दी गई थी। हालांकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद उनकी सदस्यता बहाल हो गई थी।

अब आगे क्या?

अब सबकी निगाहें लोकसभा स्पीकर पर टिकी हैं।

क्या स्पीकर इस सब्सटेंटिव मोशन को स्वीकार करेंगे?

क्या सदन में इस पर बहस होगी?

क्या यह मामला फिर अदालत तक पहुंचेगा?

फिलहाल, संसद के अंदर और बाहर सियासी घमासान तेज हो गया है। बीजेपी जहां इसे राष्ट्रहित का मुद्दा बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार दे रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आने वाले दिनों में संसद की कार्यवाही को और ज्यादा गरमा सकता है।

'FIR करो या सदस्यता लो, मैं नहीं डरूंगा',, राहुल गांधी ने अमेरिकी ट्रेड डील को किसान विरोधी बताया

लोकसभा की उनकी सदस्यता खत्म करने के लिए भाजपा सदस्य की ओर से दिए गए प्रस्ताव के बाद गुरूवार को राहुल गांधी ने सत्तापक्ष को जवाबी चुनौती देते हुए कहा चाहे उन्हें गाली दी जाए, एफआईआर हो, विशेषाधिकार हनना प्रस्ताव लाएं, कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि संसद में ट्रेड डील पर उन्होंने सच्चाई बोली है। भाजपा और सरकार को चाहे यह सच्चाई अच्छी न लगे और उनके खिलाफ जो कुछ भी करना है वह कर ले मगर वे अपनी बातों से एक इंच भी पीछे नहीं हटेंगे। सरकार के मंत्रियों-भाजपा नेताओं के सियासी हमलों के बाद गुरूवार शाम एक्स पर जारी वीडियो में राहुल गांधी ने कहा कि जो ट्रेड डील किसानों की रोजी-रोटी छीने, देश की खाद्य सुरक्षा को कमजोर करे वह किसान-विरोधी है।

ट्रेड डील से देश की खाद्य सुरक्षा कमजोर होगी

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के साथ वे तथा उनकी पार्टी अन्नदाताओं के हितों से किसान विरोधी मोदी सरकार को समझौता नहीं करने देंगे। नेता विपक्ष ने सवाल उठाया कि आखिर सरकार हमेशा किसानों की कुर्बानी देने के लिए क्यों तैयार रहती है। प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए नेता विपक्ष ने कहा कि पहले अपने अरबपति मित्रों के मुनाफे के लिए काले कानून लाए थे, अब अपने गले से अमेरिकी शिकंजा हटाने के लिए ट्रंप के अमेरिका के लिए भारतीय खेती के दरवाजे खोल दिए हैं और कल इन्हीं सब मित्रों के लिए यही दरवाजे और भी चौड़े किए जाएंगे।

समझौते पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने कहा कि इस डील में अमेरिकी कृषि उत्पादों पर नॉन टैरिफ बैरियर' हटाने की बात की गई है और यह विदेशी कृषि उत्पादों के लिए भारतीय बाजार का खोलना है जो भारत की खाद्य सुरक्षा और किसानों की रो•ाी-रोटी पर सीधा हमला है। कपास, सोयाबीन, ज्वार, फल और ड्राय फ्रूट्स के किसान पहले ही खतरे में आ चुके हैं। उन्होंने कहा कि भारत के 99.5 प्रतिशत किसान छोटे और गरीब हैं। उनके पास न पर्याप्त सहायता है, न सब्सिडी, पूरा जोखिम किसान उठाता है। जबकि अमेरिका में खेती बड़े पैमाने पर मशीनों से होती है जिस पर वहां की सरकार भारी सब्सिडी देती है।

संसद से सड़क तक लड़ने का संकल्प 
राहुल गांधी ने कहा कि सस्ती सब्सिडी वाली अमेरिकी खेती से मुकाबला करने को मजबूर किया गया तो भारतीय किसान उनके सामने टिक नहीं पाएगा और भारत के किसानों को बर्बादी झेलनी पड़ेगी।इस समझौते में किसानों से सलाह नहीं लेने तथा संसद को पूरी जानकारी नहीं देने का आरोप लगाते हुए कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने की बात करने वालों ने उल्टा अब किसानों के भविष्य को ही दांव पर लगा दिया है।ऐसे में देश के अन्नदाताओं की लड़ाई वे संसद से सड़क तक ही नहीं हर मंच से लड़ेंगे ताकि देश की खाद्य सुरक्षा की रक्षा की जा सके।

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