रांची में SSC-CAPF परीक्षा का हाईटेक खेल बेनकाब! रिमोट एक्सेस से हो रहा था पेपर सॉल्व,चार गिरफ्तार

रांची में SSC (GD/Constable) CAPF परीक्षा-2026 के दौरान हाईटेक तरीके से पेपर सॉल्व कराने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का खुलासा हुआ है। पुलिस ने परीक्षा केंद्र संचालक, इनविजलेटर और IT कर्मी समेत 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरोह रिमोट एक्सेस और स्क्रीन मिररिंग तकनीक से अभ्यर्थियों को परीक्षा पास कराने के लिए 6 से 10 लाख रुपये वसूलता था।

रांची में SSC-CAPF परीक्षा का हाईटेक खेल बेनकाब! रिमोट एक्सेस से हो रहा था पेपर सॉल्व,चार गिरफ्तार
छह से 10 लाख में SSC पास कराने की गारंटी।

  • स्क्रीन मिररिंग से सॉल्व हो रहे थे सवाल
  • रांची में परीक्षा माफिया का इंटरस्टेट नेटवर्क पकड़ा गया
  • रांची में IT एक्सपर्ट और इनविजलेटर मिलकर करा रहे थे पेपर सॉल्व
  •  रांची पुलिस ने खोला हाईटेक गिरोह का राज

रांची (Threesocieties.com Desk): राजधानी रांची में एक बार फिर हाईटेक परीक्षा माफिया का बड़ा नेटवर्क सामने आया है। उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा में हुए पेपर सॉल्वर कांड के बाद अब SSC (GD/Constable) CAPF परीक्षा-2026 में डिजिटल तकनीक के जरिए अभ्यर्थियों को पास कराने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का खुलासा हुआ है।

यह भी पढ़ें: झारखंड: पुलिसकर्मियों की सैलरी पर बढ़ा ‘कटौती’ का बोझ! कल्याण कोष के लिए अब हर महीने कटेंगे ज्यादा रुपए

रांची पुलिस ने टाटीसिलवे स्थित एक ऑनलाइन परीक्षा केंद्र पर छापेमारी कर इस संगठित फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया। पुलिस ने मौके से परीक्षा केंद्र संचालक, इनविजलेटर, IT कर्मी और एक परीक्षार्थी समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है। ग्रामीण एसपी गौरव गोस्वामी ने प्रेस वार्ता में बताया कि गिरोह बेहद हाईटेक तरीके से परीक्षा में धांधली कर रहा था। इंटरनेट, IP एड्रेस और रिमोट एक्सेस तकनीक के जरिए परीक्षा केंद्र के कंप्यूटर सिस्टम को बाहर बैठे लोगों से कनेक्ट किया गया था। इसके बाद ‘स्क्रीन मिररिंग’ के माध्यम से प्रश्नपत्र हल कर अभ्यर्थियों तक जवाब पहुंचाए जा रहे थे।

परीक्षा शुरू होने से पहले खुली साजिश

पुलिस के अनुसार, 21 मई को टाटीसिलवे स्थित जीनियस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी ऑनलाइन परीक्षा केंद्र के लैब-1 में परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले एक कंप्यूटर सिस्टम को इनविजलेटर के निर्देश पर री-स्टार्ट कराया गया। तकनीकी जांच में पता चला कि सिस्टम पहले से रिमोट एक्सेस पर था। परीक्षा केंद्र के सामने किराए के मकान में बैठे गिरोह के सदस्य इंटरनेट कनेक्शन और IP नेटवर्क के जरिए सिस्टम को नियंत्रित कर रहे थे। बताया जा रहा है कि प्रश्न स्क्रीन पर आते ही बाहर बैठे ‘सॉल्वर’ उन्हें हल कर अभ्यर्थियों तक पहुंचा देते थे। पूरी प्रक्रिया इतनी प्रोफेशनल थी कि सामान्य निगरानी में पकड़ पाना मुश्किल था।

10 लाख तक की डील, मूल प्रमाण पत्र गिरवी

जांच में यह भी सामने आया कि बिहार के बिचौलियों के माध्यम से परीक्षा केंद्र कर्मियों से सेटिंग कराई गई थी। गिरोह अभ्यर्थियों को परीक्षा पास कराने के लिए 6 से 10 लाख रुपये तक वसूलता था। इतना ही नहीं, गिरोह सुरक्षा के तौर पर अभ्यर्थियों के मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र और बैंक चेक अपने कब्जे में रख लेता था ताकि पैसे की वसूली सुनिश्चित की जा सके।

छापेमारी में बरामद हुए कई उपकरण

पुलिस ने छापेमारी के दौरान मौके से कई इलेक्ट्रॉनिक और आपत्तिजनक सामान बरामद किए हैं। इनमें— 02 मॉनिटर, 03 CPU, ब्रॉडबैंड डिवाइस, मोबाइल फोन, बैंक चेक व अभ्यर्थियों के मूल प्रमाण पत्र समेत अन्य डिजिटल उपकरण शामिल हैं।

बिहार से जुड़ा अंतरराज्यीय नेटवर्क

पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार सभी आरोपी बिहार के विभिन्न जिलों के रहने वाले हैं। आशंका जताई जा रही है कि यह गिरोह कई राज्यों में ऑनलाइन परीक्षाओं को निशाना बना चुका है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क से और कौन-कौन जुड़े हैं तथा इससे पहले किन परीक्षाओं में इसी तकनीक का इस्तेमाल किया गया।

बढ़ सकती है कई लोगों की मुश्किलें

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में परीक्षा केंद्र प्रबंधन, तकनीकी टीम और बाहरी सॉल्वरों की भूमिका की गहराई से जांच की जा रही है। आने वाले दिनों में कई और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। इस खुलासे के बाद ऑनलाइन भर्ती परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अब परीक्षा एजेंसियों को साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल मॉनिटरिंग को और मजबूत करना होगा।