पश्चिम बंगाल: ममता की बैठक में खुलकर दिखी TMC की फूट: 80 में सिर्फ 8 MLA पहुंचे, अभिषेक पर ‘दीदी’ का बड़ा फैसला

पश्चिम बंगाल में चुनावी हार के बाद TMC में बगावत तेज हो गई है। ममता बनर्जी की बैठक में सिर्फ 8 विधायक और 4 सांसद पहुंचे। पार्टी में बड़े फेरबदल के बीच अभिषेक बनर्जी को लेकर भी बड़ा फैसला लिया गया।

पश्चिम बंगाल: ममता की बैठक में खुलकर दिखी TMC की फूट: 80 में सिर्फ 8 MLA पहुंचे, अभिषेक पर ‘दीदी’ का बड़ा फैसला
ममता बनर्जी (फाइल फोटो)।

      HighLights:

  • ममता बनर्जी की अहम बैठक में सिर्फ 8 विधायक पहुंचे
  • 28 लोकसभा सांसदों में से केवल 4 सांसद ही शामिल हुए
  • अभिषेक बनर्जी महासचिव बने रहे, लेकिन दो नए संयुक्त सचिव बनाए गए
  • TMC में बड़े संगठनात्मक फेरबदल, पुराने नेताओं को मिली जिम्मेदारी
  • पार्टी के 28 साल के इतिहास में पहली बड़ी फूट के बाद संकट गहराया

नई दिल्ली/कोलकाता (Threesocieties.com Desk): पश्चिम Bengal की राजनीति में बड़ा भूचाल देखने को मिल रहा है। चुनावी झटके के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) अब अपने 28 साल के इतिहास के सबसे बड़े अंदरूनी संकट से गुजरती दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा शुक्रवार को कालीघाट स्थित आवास पर बुलाई गई अहम बैठक में बेहद कम उपस्थिति ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है।

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बैठक में TMC के 80 विधायकों में से महज 8 विधायक पहुंचे, जबकि पार्टी के अधिकांश सांसद भी नदारद रहे। 28 लोकसभा सांसदों में सिर्फ 4 और राज्यसभा के 13 सांसदों में से केवल 2 सांसदों की मौजूदगी ने साफ संकेत दे दिया कि पार्टी के भीतर असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है।

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पार्टी में क्यों बढ़ा संकट?

सूत्रों के अनुसार, चुनावी हार के बाद पार्टी के भीतर नेतृत्व और संगठन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। कुछ दिन पहले ही लगभग 60 विधायकों ने एक अहम बैठक का बहिष्कार कर दिया था। अब शुक्रवार की बैठक में कम उपस्थिति ने इस बगावत को और स्पष्ट कर दिया।

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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी के भीतर दो खेमों की चर्चा अब खुलकर होने लगी है। एक तरफ पुराने और ममता के वफादार नेता हैं, जबकि दूसरी ओर नई पीढ़ी के नेताओं का समूह है, जिसे अब तक अभिषेक बनर्जी के करीब माना जाता रहा है।

अभिषेक बनर्जी पर क्या फैसला हुआ?

बैठक के बाद संगठनात्मक बदलावों का ऐलान करते हुए ममता बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी को राष्ट्रीय महासचिव पद पर बरकरार रखा, लेकिन उनकी सहायता के लिए दो नए राष्ट्रीय संयुक्त सचिव नियुक्त कर दिए।डेरेक ओ’ब्रायन और डोला सेन को यह जिम्मेदारी दी गई। राजनीतिक गलियारों में इसे अभिषेक की शक्तियों को संतुलित करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

संगठन में बड़ा फेरबदल

ममता बनर्जी ने पार्टी में बड़े पैमाने पर बदलाव करते हुए पुराने और भरोसेमंद नेताओं को अहम जिम्मेदारियां दीं। वरिष्ठ मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य को नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया, जबकि सुब्रत बख्शी को राष्ट्रीय कार्यसमिति में उपाध्यक्ष की भूमिका दी गई। प्रदेश स्तर पर उपाध्यक्ष, महासचिव, कार्यकारी सदस्य और विभिन्न मोर्चों में भी कई बदलाव किए गए।

पश्चिम बंगाल TMC प्रदेश कमेटी का पुनर्गठन

TMCने पश्चिम बंगाल प्रदेश तृणमूल कांग्रेस कमेटी का पुनर्गठन किया है। चंद्रिमा भट्टाचार्य को नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि सुब्रत बख्शी राष्ट्रीय कार्यसमिति में उपाध्यक्ष पद पर बने रहेंगे। प्रदेश उपाध्यक्ष पद पर सजदा अहमद, ममता ठाकुर, नयना बंद्योपाध्याय और स्वाति खांडेकर को नियुक्त किया गया। प्रदेश महासचिवों में बाबर अली, पुलक रॉय, आशिमा पात्रा, अरूप विश्वास और राजीब बनर्जी शामिल हैं। कार्यकारी सदस्यों में ज्योतिप्रियो मल्लिक, डॉ. राणा चटर्जी, बिदेश बोस, त्रिनंकुर भट्टाचार्जी, जया दत्ता, तापस चटर्जी, वसुंधरा गोस्वामी और गौतम देब शामिल किए गए।

अन्य नियुक्तियां

टीएमवाईसी (युवा wing) अध्यक्ष: सायोनी घोष

टीएमवाईसी महासचिव: मधुरिमा ठाकुर

महिला अध्यक्ष: माला रॉय

टीएमसीपी अध्यक्ष: प्रियंका अधिकारी

आईएनटीटीयूसी अध्यक्ष: मोलॉय घटक

हॉकर्स विंग अध्यक्ष: मदन मित्रा

किसान विंग: बेचाराम मन्ना

खेत मजदूर विंग: पूर्णेन्दु बोस

एससी/एसटी विंग: बिरबाहा हांसदा

प्रवक्ता पैनल में कौन-कौन? प्रवक्ता पैनल में चंद्रिमा भट्टाचार्य, कल्याण बनर्जी, मदन मित्रा और कुणाल घोष को जारी रखा गया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि यह शुरुआती सूची है और आगे और नाम जोड़े जाएंगे।

कई बड़े चेहरे सूची से बाहर

सबसे अधिक चर्चा इस बात की रही कि अभिषेक बनर्जी के करीबी माने जाने वाले कई युवा नेताओं को नई संगठनात्मक सूची में जगह नहीं मिली। वहीं, पुराने और अनुभवी नेताओं पर फिर से भरोसा जताया गया। कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम की संगठनात्मक संरचना से अनुपस्थिति भी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है।

28 साल में पहली बार इतना बड़ा संकट

पार्टी को सबसे बड़ा झटका तब लगा जब बागी विधायकों के एक बड़े समूह ने अलग रुख अपनाते हुए पार्टी नेतृत्व को चुनौती दी। इससे पहले TMC को अपने 28 साल के इतिहास में कभी इतनी बड़ी अंदरूनी चुनौती का सामना नहीं करना पड़ा था।

विश्लेषकों का कहना है कि यदि पार्टी जल्द आंतरिक मतभेद नहीं सुलझा पाती, तो आने वाले समय में यह संकट और गहरा सकता है। फिलहाल, ममता बनर्जी संगठन पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए बड़े बदलावों के जरिए संदेश देने की कोशिश करती दिख रही हैं।