HighLights
- 19 लोकसभा सांसदों ने भी स्पीकर को पत्र भेजा
- बागी सांसदों में यूसुफ पठान, सायोनी घोष और शताब्दी रॉय जैसे बड़े नाम
- दल-बदल कानून के तहत बागी गुट के पास दो-तिहाई से अधिक समर्थन
- ममता बनर्जी के पास अब केवल 22 विधायक और 8 लोकसभा सांसद बचे।
कोलकाता (Threesocieties.com Desk): पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा राजनीतिक भूचाल देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) अब अपने अस्तित्व के सबसे बड़े आंतरिक संकट से गुजरती दिखाई दे रही है। विधानसभा चुनाव में मिली हार के महज 14 दिनों के भीतर पार्टी के भीतर बगावत शुरू हो गई थी, जिसका बड़ा प्रमाण अब सामने आया है।
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सूत्रों के अनुसार, TMC के 20 लोकसभा सांसदों ने 18 मई को लोकसभा स्पीकर को पत्र भेजकर अलग गुट को मान्यता देने की मांग की थी। इस पत्र का हस्ताक्षर वाला हिस्सा अब सार्वजनिक हुआ है। इससे पहले 3 जून को पार्टी के 58 विधायकों ने भी विधानसभा अध्यक्ष को पत्र भेजकर अपने अलग गुट को मान्यता देने की मांग की थी, जिसे मंजूरी भी मिल चुकी है।
बड़े नेताओं ने भी छोड़ा ममता का साथ
बागी सांसदों की सूची में कई चर्चित और प्रभावशाली चेहरे शामिल हैं। इनमें पूर्व क्रिकेटर और सांसद यूसुफ पठान, अभिनेत्री एवं सांसद सायोनी घोष, काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, रचना बनर्जी, अभिनेता देव (दीपक अधिकारी) समेत कई प्रमुख नेता शामिल हैं।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर सांसदों और विधायकों का अलग होना ममता बनर्जी के लिए अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक झटका साबित हो सकता है।
दल-बदल कानून क्या कहता है?
भारतीय संविधान की 10वीं अनुसूची यानी दल-बदल कानून के अनुसार, यदि किसी राजनीतिक दल के कम से कम दो-तिहाई विधायक या सांसद अलग गुट बनाते हैं, तो उन्हें कानूनी मान्यता मिल सकती है। वर्तमान स्थिति में:
विधानसभा में TMC के 80 में से 58 विधायक बागी गुट के साथ हैं।
लोकसभा में 28 में से 20 सांसद अलग गुट में शामिल बताए जा रहे हैं।
दोनों ही मामलों में बागी नेताओं के पास दो-तिहाई से अधिक समर्थन मौजूद है।
ऐसी स्थिति में वे अलग राजनीतिक गुट बनाकर मान्यता मांग सकते हैं या किसी अन्य दल में विलय का रास्ता भी चुन सकते हैं।
क्या बंगाल में दोहराया जाएगा महाराष्ट्र मॉडल?
राजनीतिक विश्लेषक इस घटनाक्रम की तुलना महाराष्ट्र में 2022 में हुई शिवसेना की बगावत से कर रहे हैं। तब एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में बड़ी संख्या में विधायक उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर अलग हो गए थे, जिसके बाद सरकार गिर गई और शिवसेना भी दो हिस्सों में बंट गई। अब बंगाल में भी उसी तरह की राजनीतिक स्थिति बनती दिखाई दे रही है। यदि बागी गुट को आधिकारिक मान्यता मिल जाती है तो TMC की संगठनात्मक और राजनीतिक ताकत को बड़ा झटका लग सकता है।
ममता के पास कितनी ताकत बची?
बगावत के बाद TMC की राजनीतिक स्थिति काफी कमजोर होती नजर आ रही है।
विधानसभा
कुल विधायक: 80
बागी विधायक: 58
ममता के साथ: 22
लोकसभा
कुल सांसद: 28
बागी सांसद: 20
ममता के साथ: 8
राज्यसभा
कुल सांसद: 13
इस्तीफा देने वाले: 4
वर्तमान सदस्य: 9
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि पार्टी के भीतर असंतोष अब बड़े राजनीतिक संकट का रूप ले चुका है।
FIR ने बढ़ाई मुश्किलें
इस राजनीतिक उथल-पुथल के बीच ममता बनर्जी की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। उनके खिलाफ कथित भड़काऊ भाषण देने के आरोप में कोलकाता के हेयर स्ट्रीट थाने में FIR दर्ज की गई है। हालांकि इस मामले में अभी जांच जारी है।
बंगाल की राजनीति में निर्णायक मोड़
तृणमूल कांग्रेस के भीतर उठे इस बगावत के तूफान ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को नए मोड़ पर ला खड़ा किया है। अब सबकी नजर लोकसभा स्पीकर, विधानसभा अध्यक्ष और संभावित कानूनी लड़ाई पर टिकी है। यदि बागी गुट को आधिकारिक मान्यता मिलती है, तो बंगाल की राजनीति में सत्ता संतुलन पूरी तरह बदल सकता है।
आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि ममता बनर्जी इस चुनौती से कैसे निपटती हैं और क्या TMC अपने सबसे बड़े राजनीतिक संकट से उबर पाएगी या नहीं।