डिजिटल हुई आस्था: धनबाद के मंदिरों में एक क्लिक पर मां भगवती को लग रहा भोग

धनबाद के मंदिरों में आस्था अब डिजिटल हो गई है। शक्ति मंदिर समेत कई धार्मिक स्थलों में QR कोड और UPI से दान, भोग और पूजा की सुविधा शुरू हो चुकी है। जानिए कैसे बदल रही है पूजा-पाठ की तस्वीर।

डिजिटल हुई आस्था: धनबाद के मंदिरों में एक क्लिक पर मां भगवती को लग रहा भोग
धनबाद के मंदिरों में UPI से चढ़ रहा चढ़ावा।

Highlights

  • धनबाद के प्रमुख मंदिरों में शुरू हुई UPI QR कोड की सुविधा
  • नकद के बिना भी भक्त कर रहे पूजा, दान और प्रसाद की खरीदारी
  • डिजिटल भुगतान से मंदिरों में बढ़ी पारदर्शिता और आसान हुआ हिसाब-किताब
  • शक्ति मंदिर समेत कई धार्मिक स्थलों पर ऑनलाइन भोग और गुप्त दान की सुविधा

धनबाद (Threesocieties.com Desk): धनबाद के धार्मिक स्थलों में अब आस्था का रंग डिजिटल माध्यमों में भी दिखाई देने लगा है। बदलते समय के साथ शहर के मंदिरों और धार्मिक स्थलों में तकनीक का समावेश तेजी से बढ़ रहा है। अब भक्तों को दान-पुण्य, पूजा-पाठ या प्रसाद खरीदने के लिए जेब में नकदी रखने की जरूरत नहीं पड़ रही। मंदिर परिसरों में लगे QR कोड और UPI आधारित भुगतान व्यवस्था ने श्रद्धालुओं की सुविधा को नया आयाम दिया है।

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शहर के प्रसिद्ध शक्ति मंदिर, बरमसिया शनि महाराज मंदिर समेत कई धार्मिक स्थलों में अब भक्त मोबाइल से QR कोड स्कैन कर सीधे भुगतान कर रहे हैं। इससे मंदिर प्रबंधन को आय-व्यय का रिकॉर्ड रखने में आसानी हो रही है, वहीं श्रद्धालुओं को भी बिना नकदी के पूजा-अर्चना की सुविधा मिल रही है।

एक क्लिक पर मां भगवती को लग रहा भोग

धनबाद के प्रसिद्ध शक्ति मंदिर में अब QR कोड स्टैंड और डिजिटल भुगतान की व्यवस्था की गई है। यहां श्रद्धालु माता का भोग लगाने, विशेष पूजा कराने या मंदिर विकास के लिए दान देने के लिए सीधे मोबाइल से भुगतान कर रहे हैं। शक्ति मंदिर समिति के संयुक्त सचिव सुरेंद्र अरोड़ा ने बताया कि अब भक्त घर बैठे भी मंदिर के QR कोड के माध्यम से माता के भोग की राशि भेज रहे हैं। मंदिर परिसर में लगे बारकोड स्कैन कर श्रद्धालु आसानी से भुगतान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गुप्त दान की ऑनलाइन सुविधा शुरू होने के बाद दान करने वालों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है।

मंदिरों में बढ़ी पारदर्शिता, आसान हुआ हिसाब-किताब

मंदिर प्रबंधन का कहना है कि डिजिटल भुगतान से नकद प्रबंधन की परेशानी कम हुई है और हर भुगतान का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होने लगा है। इससे आय-व्यय का लेखा-जोखा अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित हुआ है। डिजिटल माध्यम से प्राप्त दान और भुगतान का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रहने के कारण त्रुटियों की संभावना भी कम हो गई है। मंदिर समितियां अब आसानी से यह जान पा रही हैं कि किस मद में कितनी राशि प्राप्त हुई।

रामकृष्ण विवेकानंद स्वाध्याय सेवा ट्रस्ट में भी ऑनलाइन दान

रामकृष्ण विवेकानंद स्वाध्याय सेवा ट्रस्ट के सचिव बिकेश कुमार सिंह ने बताया कि ट्रस्ट में अधिकांश दान अब ऑनलाइन माध्यम से ही प्राप्त हो रहे हैं। हाल ही में दिल्ली से एक भक्त ने अपने जन्मदिन के अवसर पर ठाकुरजी की पूजा के लिए ऑनलाइन भुगतान किया। वहीं स्थापना दिवस के दौरान भी कई भक्तों ने डिजिटल माध्यम से दान दिया।

पुजारी भी अपना रहे तकनीक

डिजिटल बदलाव केवल मंदिरों तक सीमित नहीं है। अब व्यक्तिगत स्तर पर पूजा कराने वाले पुजारी भी डिजिटल भुगतान अपना रहे हैं।मनईटांड़ निवासी दर्पण कुमार बताते हैं कि पिता के श्राद्ध कार्यक्रम के दौरान पूजा संपन्न होने के बाद जब दक्षिणा देने के लिए नकद नहीं था, तब पुजारी ने अपना QR कोड दिखाकर ऑनलाइन दक्षिणा स्वीकार की।

बदल रही आस्था की तस्वीर

धनबाद में धार्मिक स्थलों में तकनीक का यह बढ़ता इस्तेमाल दिखाता है कि आस्था और आधुनिकता अब साथ-साथ चल रही हैं। QR कोड और UPI भुगतान ने मंदिरों में दान और पूजा-पाठ को पहले से अधिक आसान, सुरक्षित और पारदर्शी बना दिया है। अब मंदिरों में भक्तों की जेब से पर्स कम और मोबाइल ज्यादा निकल रहे हैं।