झारखंड कांग्रेस में ‘लेटर वॉर’! मंत्री राधाकृष्ण किशोर का प्रदेश अध्यक्ष पर हमला, कई पदाधिकारी देंगे इस्तीफा !

झारखंड कांग्रेस में अंदरूनी कलह चरम पर है। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश पर गंभीर आरोप लगाते हुए फिर पत्र लिखा है। पार्टी में बड़े पैमाने पर इस्तीफे की आशंका तेज हो गई है।

झारखंड कांग्रेस में ‘लेटर वॉर’! मंत्री राधाकृष्ण किशोर का प्रदेश अध्यक्ष पर हमला, कई पदाधिकारी देंगे इस्तीफा !
झारखंड कांग्रेस में आंतरिक कलह तेज।

रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड कांग्रेस में अंदरूनी कलह अब खुलकर सामने आ चुकी है और हालात तेजी से बिगड़ते दिख रहे हैं। राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के बीच टकराव अब ‘लेटर वॉर’ में बदल गया है। ताजा घटनाक्रम में किशोर ने एक बार फिर प्रदेश प्रभारी को पत्र लिखकर नेतृत्व पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

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लगातार दूसरे दिन पत्र, नेतृत्व पर सीधा हमला

मंगलवार को लगातार दूसरे दिन लिखे गए पत्र में राधाकृष्ण किशोर ने साफ शब्दों में कहा कि पार्टी से जुड़े मुद्दों को सार्वजनिक करना पार्टी विरोध नहीं है। उन्होंने संकेतों में प्रदेश अध्यक्ष पर निशाना साधते हुए लिखा— “एक को साधिए, सब सध जाएंगे”।

 कांग्रेस में ‘इस्तीफा बम’ की आहट

पार्टी के अंदरखाने से बड़ी खबर यह है कि नाराज नेताओं का एक गुट सामूहिक इस्तीफे की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक, इसमें कई आदिवासी विधायक और संगठन के सदस्य शामिल हो सकते हैं। इससे कांग्रेस की झारखंड इकाई में बड़ा राजनीतिक भूचाल आ सकता है।

 314 सदस्यीय कमेटी पर भी उठे सवाल

नई प्रदेश कमेटी में 314 सदस्यों को शामिल किए जाने पर किशोर ने तंज कसते हुए कहा कि संख्या बढ़ाने से कुछ नहीं होगा, अगर पार्टी जमीनी मुद्दों पर चुप रहे। उन्होंने कहा कि “628 लोगों की कमेटी भी बना दी जाए तो फर्क नहीं पड़ेगा”।

 किन मुद्दों पर भड़के मंत्री?

राधाकृष्ण किशोर ने अपने पत्र में कई अहम मुद्दे उठाए—

महिला आरक्षण पर प्रदेश नेतृत्व की निष्क्रियता
JETET में मगही और भोजपुरी भाषा हटाने पर चुप्पी
 अनुसूचित जाति आयोग और परिषद को पुनर्जीवित करने पर कोई पहल नहीं
 हजारीबाग रेप केस और अल्पसंख्यकों की हत्या पर कमजोर प्रतिक्रिया
 संगठन में जातीय संतुलन और परिवारवाद पर सवाल

संगठन में जातीय संतुलन पर बड़ा सवाल

किशोर ने प्रदेश अध्यक्ष से यह भी सार्वजनिक करने को कहा कि 314 सदस्यीय कमेटी में दलित, पिछड़ा, आदिवासी, अल्पसंख्यक और सामान्य वर्ग के लोगों को कितना प्रतिनिधित्व मिला है। यह मुद्दा अब पार्टी के भीतर गंभीर बहस का कारण बन सकता है।

क्या कांग्रेस में टूट तय है?

झारखंड कांग्रेस में बढ़ती नाराजगी और नेतृत्व पर सवालों ने स्थिति को बेहद संवेदनशील बना दिया है। अगर सामूहिक इस्तीफे होते हैं, तो इसका सीधा असर राज्य की सियासत पर पड़ेगा। फिलहाल, पार्टी का एक गुट डैमेज कंट्रोल में जुटा है, लेकिन हालात बताते हैं कि झारखंड कांग्रेस में ‘सब कुछ ठीक नहीं’।