बोकारो: पेटरवार प्रखंड के प्रधान सहायक को 8,000 रुपये घूस लेते ACB ने दबोचा
बोकारो के पेटरवार प्रखंड कार्यालय में प्रधान सहायक मोहम्मद गुलाम रसूल को एसीबी ने ₹8000 रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया। आरोपी ने कथित तौर पर "5 पुड़िया रजनीगंधा-तुलसी लाओ" कोड वर्ड का इस्तेमाल किया था। उसका नाम पहले भी चर्चित मनरेगा घोटाले में सामने आ चुका है।
HighLights:
- स्कूल शौचालय निर्माण योजना के कार्य के एवज में मांगी गई थी ₹8000 रिश्वत
- "5 पुड़िया रजनीगंधा-तुलसी लाओ" जैसे कोड वर्ड का इस्तेमाल कर मांगी गई घूस
- एसीबी ने जाल बिछाकर पेटरवार प्रखंड कार्यालय के प्रधान सहायक को रंगेहाथ गिरफ्तार किया
- आरोपी का नाम पहले भी 2014-15 के चर्चित मनरेगा घोटाले में सामने आ चुका है
- कार्रवाई के बाद प्रखंड कार्यालय में मचा हड़कंप, आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी
बोकारो (Threesocieties.com Desk): झारखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के तहत भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। बोकारो जिले के पेटरवार प्रखंड कार्यालय में पदस्थापित प्रधान सहायक मोहम्मद गुलाम रसूल को ₹8,000 की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया गया है। एसीबी की इस कार्रवाई के बाद पूरे प्रखंड कार्यालय में हड़कंप मच गया।
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जानकारी के अनुसार, एक स्कूल में शौचालय निर्माण योजना से संबंधित कार्य को आगे बढ़ाने और आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कराने के एवज में प्रधान सहायक द्वारा शिकायतकर्ता से ₹8,000 रिश्वत की मांग की गई थी। शिकायतकर्ता ने इसकी जानकारी भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को दी, जिसके बाद एसीबी ने मामले का सत्यापन किया और आरोप सही पाए जाने पर जाल बिछाकर कार्रवाई की।
रिश्वत मांगने के लिए अपनाया गया था कोड वर्ड
मामले का सबसे दिलचस्प और चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि आरोपी ने कथित तौर पर रिश्वत मांगने के लिए सीधे पैसों का जिक्र करने के बजाय "5 पुड़िया रजनीगंधा-तुलसी लाओ" जैसे कोड वर्ड का इस्तेमाल किया। आरोप है कि इस कोड भाषा के जरिए रिश्वत की रकम तय की गई थी ताकि बातचीत के दौरान किसी तरह का संदेह उत्पन्न न हो। हालांकि, शिकायतकर्ता द्वारा पूरी जानकारी एसीबी को दिए जाने के बाद यह रणनीति काम नहीं आई और आरोपी रंगेहाथ पकड़ लिया गया।
पहले भी मनरेगा घोटाले में आ चुका है नाम
प्रधान सहायक मोहम्मद गुलाम रसूल का नाम इससे पहले वर्ष 2014-15 के बहुचर्चित मनरेगा घोटाले में भी सामने आ चुका है। आरोप था कि उसने तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी किस्टो कुमार बेसरा के साथ कथित मिलीभगत कर 124 योजनाओं में से 59 योजनाओं की नकल कर लगभग 74.62 लाख रुपये की सरकारी राशि की अवैध निकासी कराई थी। उस समय यह मामला पूरे जिले में चर्चा का विषय बना था और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए थे। अब एक बार फिर रिश्वतखोरी के मामले में गिरफ्तारी के बाद पुराने आरोप भी चर्चा में आ गए हैं।
राजनीतिक संरक्षण की भी रही चर्चा
स्थानीय स्तर पर लंबे समय से यह चर्चा रही है कि आरोपी को जिले के एक प्रभावशाली जनप्रतिनिधि का संरक्षण प्राप्त था। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित जनप्रतिनिधि की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया भी सामने नहीं आई है। इसलिए इस दावे को फिलहाल केवल स्थानीय चर्चाओं तक ही सीमित माना जा रहा है।
एसीबी की कार्रवाई से प्रखंड कार्यालय में मचा हड़कंप
एसीबी की टीम द्वारा की गई इस कार्रवाई के बाद पेटरवार प्रखंड कार्यालय में अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला। सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच पूरे दिन इस कार्रवाई की चर्चा होती रही। सूत्रों के अनुसार, एसीबी अब मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है। यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो आगे और कार्रवाई संभव है।
झारखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार हो रही कार्रवाइयों के बीच पेटरवार की यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि सरकारी योजनाओं का लाभ आम लोगों तक पहुंचाने की प्रक्रिया में रिश्वतखोरी किस हद तक जड़ें जमा चुकी है। अब देखना होगा कि जांच आगे किस दिशा में बढ़ती है और क्या इस मामले में अन्य नाम भी सामने आते हैं।






