झारखंड मेडिकल कॉलेज एडमिशन घोटाला! फर्जी जाति प्रमाण पत्र पर MBBS में दाखिला, CID के रडार पर रिम्स
झारखंड के मेडिकल कॉलेजों में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के जरिए MBBS में दाखिले का बड़ा घोटाला सामने आया है। तीन छात्राओं के दस्तावेज फर्जी पाए गए हैं। CID ने रिम्स के दस्तावेज जब्त कर जांच तेज कर दी है और जल्द FIR दर्ज होने की संभावना है।
HighLights :
- मेडिकल कॉलेजों में फर्जी प्रमाण पत्र के सहारे NEET-UG नामांकन का मामला सामने आया
- तीन छात्राओं के जाति प्रमाण पत्र प्रारंभिक जांच में फर्जी पाए गए
- रिम्स समेत संबंधित मेडिकल कॉलेजों के क्लर्क और वेरिफिकेशन अधिकारियों पर जांच की आंच
- नामांकन से जुड़े दस्तावेज और फाइलें CID ने कब्जे में लीं
- जल्द ही CID थाना में FIR दर्ज होने की संभावना
- फर्जीवाड़े के पीछे बड़े सिंडिकेट और आर्थिक लेनदेन की आशंका
रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड के प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों में फर्जी प्रमाण पत्रों के सहारे दाखिला लेने का सनसनीखेज मामला सामने आने के बाद पूरे स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। राज्य के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान रिम्स सहित कई सरकारी मेडिकल कॉलेजों में NEET-UG के माध्यम से हुए नामांकन की जांच अब अपराध अनुसंधान विभाग (CID) के हाथों में है। प्रारंभिक जांच में तीन छात्राओं के जाति प्रमाण पत्र फर्जी पाए जाने के बाद जांच एजेंसी ने मामले को गंभीर आर्थिक और संगठित अपराध के रूप में लेना शुरू कर दिया है।
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स्वास्थ्य विभाग की ओर से गठित तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति की रिपोर्ट ने कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए हैं। रिपोर्ट में स्पष्ट संकेत मिले हैं कि फर्जी जाति प्रमाण पत्रों के आधार पर मेडिकल सीट हासिल करने के लिए एक संगठित नेटवर्क सक्रिय था, जिसने दस्तावेज तैयार कराने से लेकर कॉलेज स्तर पर उनके सत्यापन तक की प्रक्रिया को प्रभावित किया।
पिछले साल शिकायत के बाद बनी थी जांच कमेटी
मामले की शुरुआत एक शिकायत पत्र मिलने के बाद हुई थी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग ने 19 नवंबर 2025 को तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया। समिति में तत्कालीन आईटी निदेशक सुनील कुमार, निदेशक भूमि अधिग्रहण ए. दोड्डे और झारखंड मेडिकल एंड हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन के तत्कालीन प्रबंध निदेशक अबु इमरान को शामिल किया गया था।समिति ने सत्र 2025-26 में NEET-UG के तहत हुए नामांकनों की जांच की और अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में स्वतंत्र एजेंसी से विस्तृत जांच कराने की अनुशंसा की। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने 27 नवंबर 2025 को गृह विभाग को पत्र भेजकर मामले की जांच CID से कराने का अनुरोध किया था।
तीन छात्राओं के जाति प्रमाण पत्र निकले फर्जी
जांच समिति की रिपोर्ट के अनुसार कुछ अभ्यर्थियों के दस्तावेज सही पाए गए, जबकि तीन छात्राओं के जाति प्रमाण पत्र पूरी तरह फर्जी पाए गए। संबंधित जिलों के उपायुक्तों ने दस्तावेजों की जांच के बाद इन्हें अमान्य और फर्जी घोषित कर दिया। जांच रिपोर्ट के अनुसार गोड्डा की सुचारिता दत्ता, गिरिडीह की काजल और भावनी नामक छात्रा के जाति प्रमाण पत्रों में गंभीर अनियमितताएं मिलीं। वहीं कुछ अन्य अभ्यर्थियों ने नामांकन ही नहीं लिया, जिसके कारण उनके दस्तावेजों की जांच नहीं हो सकी।
JCECEB को मिली राहत, कॉलेजों पर जिम्मेदारी
जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में झारखंड संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद (JCECEB) को इस मामले में जिम्मेदार नहीं माना है। समिति के अनुसार ऑनलाइन काउंसिलिंग प्रक्रिया के कारण पर्षद के पास दस्तावेजों की भौतिक जांच की व्यवस्था नहीं थी।रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि दाखिले के दौरान मूल दस्तावेजों की जांच और सत्यापन की अंतिम जिम्मेदारी संबंधित मेडिकल कॉलेज प्रशासन और उनके नामित अधिकारियों की थी।
क्लर्क से लेकर सत्यापन अधिकारी तक जांच के घेरे में
अब CID की जांच का फोकस उन कर्मचारियों और अधिकारियों पर है जिन्होंने नामांकन के दौरान दस्तावेजों की जांच कर उन्हें सही घोषित किया था। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि जब संबंधित जिलों के प्रशासन ने बाद में इन प्रमाण पत्रों को फर्जी बताया, तो कॉलेज स्तर पर इन्हें कैसे स्वीकार कर लिया गया।
सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसी को इस मामले में किसी बड़े सिंडिकेट, बिचौलियों की भूमिका और आर्थिक लेनदेन की आशंका भी है। इसी वजह से दस्तावेजों के साथ-साथ बैंकिंग और संपर्क संबंधी पहलुओं की भी जांच की जा सकती है।
रिम्स से जब्त किए गए दस्तावेज, जल्द दर्ज होगी FIR
CID की टीम ने रिम्स से नामांकन से संबंधित कई महत्वपूर्ण फाइलें और दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए हैं। इनकी बारीकी से जांच की जा रही है। प्रारंभिक स्तर पर मिले साक्ष्यों के आधार पर CID थाना में जल्द ही प्राथमिकी दर्ज किए जाने की संभावना है।इसके अलावा फर्जी तरीके से नामांकन लेने वाले अभ्यर्थियों, उनके परिजनों, दस्तावेज तैयार कराने वाले लोगों और सत्यापन प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों को भी पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है।
मेडिकल शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
इस मामले ने झारखंड की मेडिकल शिक्षा व्यवस्था और आरक्षण आधारित प्रवेश प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि जांच में बड़े रैकेट की पुष्टि होती है, तो आने वाले दिनों में कई और नामांकन रद्द होने के साथ-साथ प्रशासनिक कार्रवाई भी देखने को मिल सकती है। स्वास्थ्य विभाग और CID दोनों की नजर अब इस बात पर है कि फर्जी प्रमाण पत्रों के जरिए मेडिकल सीट हासिल करने के इस कथित नेटवर्क की जड़ें आखिर कहां तक फैली हुई हैं। आने वाले दिनों में यह जांच राज्य के सबसे बड़े शिक्षा और भर्ती घोटालों में से एक का रूप ले सकती है।
RIMS में अब सभी स्टूडेंट्स के दस्तावेज की होगी जांच
रिम्स में प्रभार ग्रहण करने के बाद डायरेक्टर डॉ. डीके सिन्हा ने शनिवार को प्रेसवार्ता में उन्होंने बताया कि अब रिम्स में एडमिशन लेने वाले सभी स्टूडेंट्स का डाक्यूमेंट वेरिफकेशन कराया जाएगा। संबंधित पदाधिकारी के पास भेजकर डाक्यूमेंट की जांच कराई जाएगी। तीन मेडिकल छात्रों की शिकायत पर रिम्स पहुंची सीआईडी की टीम की कार्रवाई के बाद अस्पताल प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में है। डायरेक्टर ने कहा कि शिकायत के बाद तीन छात्रों में से दो का वेरिफिकेशन कराया जा चुका है जबकि एक छात्र की रिपोर्ट का अभी इंतजार है।






