लोकसभा में ‘नारी शक्ति वंदन’ पर महाब्रेक: 54 वोट से गिरा महिला आरक्षण बिल, 33% आरक्षण पर फिलहाल विराम
लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा 131वां संविधान संशोधन विधेयक 54 वोट से गिर गया। 528 में से 298 वोट ही मिले, जबकि पास होने के लिए 352 जरूरी थे। विपक्ष ने परिसीमन को लेकर किया विरोध।
- लोकसभा में नहीं पास हो सका महिला आरक्षण बिल
नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk)। लोकसभा में महिलाओं को 33% आरक्षण देने वाला बहुप्रतीक्षित नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक (131वां संविधान संशोधन बिल) पास नहीं हो सका। दो-तिहाई बहुमत के अभाव में यह बिल 54 वोट से गिर गया, जिससे केंद्र सरकार को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है।
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करीब 21 घंटे की लंबी बहस के बाद शुक्रवार (17 अप्रैल) को हुए मतदान में 528 सांसदों ने हिस्सा लिया, जिसमें 298 वोट पक्ष में व 230 वोट विरोध में पड़े, जबकि बिल पास कराने के लिए 352 वोट जरूरी थे।
क्यों गिरा बिल?
संविधान संशोधन बिल को पास करने के लिए सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई समर्थन की जरूरत होती है। लेकिन NDA सिर्फ 298 वोट ही जुटा पाई, जो जरूरी संख्या से काफी कम रहा।
विपक्ष का विरोध: ‘परिसीमन’ बना सबसे बड़ा मुद्दा
विपक्ष ने महिला आरक्षण का सीधा विरोध नहीं किया, लेकिन इसे परिसीमन (Delimitation) से जोड़ने पर कड़ा एतराज जताया। विपक्ष की मुख्य आपत्तियां:
दक्षिणी राज्यों की सीटें कम होने का डर
ओबीसी/एससी-एसटी प्रतिनिधित्व प्रभावित होने की आशंका
राजनीतिक नक्शा बदलने की कोशिश का आरोप
क्या था बिल में खास?
लोकसभा और विधानसभा में 33% महिलाओं को आरक्षण
लोकसभा सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव
2029 चुनाव से लागू करने की योजना
बाकी दो बिलों का क्या हुआ?
सरकार ने इस बिल के साथ जुड़े दो अन्य विधेयकों पर वोटिंग ही नहीं कराई: परिसीमन संशोधन बिल 2026 व केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन बिल 2026। संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि मुख्य बिल पास नहीं होने के कारण इन पर आगे बढ़ना संभव नहीं।
किसने क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी: “हमें क्रेडिट नहीं चाहिए, बस बिल पास हो जाए।”
गृहमंत्री अमित शाह: “महिलाएं देखेंगी कि उनके रास्ते में रोड़ा कौन है।”
राहुल गांधी: “यह महिला आरक्षण नहीं, राजनीतिक ढांचा बदलने की कोशिश थी।”
प्रियंका गांधी: “यह संविधान पर हमला था, जिसे हमने रोक दिया।”
12 साल में पहली बार मोदी सरकार फेल
यह पहला मौका है जब नरेंद्र मोदी सरकार लोकसभा में कोई अहम बिल पास कराने में असफल रही है। इससे पहले सरकार लगभग हर बड़े विधेयक को पारित कराने में सफल रही थी।
अब क्या होगा आगे?
सरकार बिल में बदलाव कर दोबारा पेश कर सकती है, परिसीमन को लेकर नया फॉर्मूला लाया जा सकता है, विपक्ष के साथ सहमति बनाने की कोशिश होगी।
राजनीतिक असर
BJP इस मुद्दे को चुनावी हथियार बनाएगी, विपक्ष पर “महिला विरोधी” होने का आरोप लगेगा, दक्षिण बनाम उत्तर का मुद्दा और तेज हो सकता है।
संसद की 543 सीटें बढ़ाकर 850 करने का था प्रावधान
लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 2029 के चुनाव से ही महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए सरकार द्वारा लाए गए नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक (131वां संविधान संशोधन विधेयक) और परिसीमन विधेयक सहित तीनों विधेयक दो तिहाई बहुमत नहीं मिल पाने के कारण गिर गए।महिला आरक्षण बिल से जुड़ा संविधान का 131वां संशोधन बिल सरकार लोकसभा में पास नहीं करा पाई। इसमें संसद की 543 सीटें बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान था।
लोकसभा में बिल पर 21 घंटे की चर्चा के बाद वोटिंग हुई। उपस्थित 528 सांसदों ने वोट डाले। पक्ष में 298, विपक्ष में 230 वोट पड़े। बिल पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत थी। 528 का दो तिहाई 352 होता है। इस तरह बिल 54 वोट से गिर गया। इन विधेयकों को पारित कराने के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने जब मत विभाजन कराया तो कुल 528 वोट पड़े। इनमें समर्थन में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े। सरकार ने इस विधेयक के साथ 'परिसीमन विधेयक, 2026' और 'संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026' को भी सदन में चर्चा और पारित कराने के लिए रखा था, लेकिन उन्हें भी आगे नहीं बहीं ढ़ाया जा सका। महिला आरक्षण बिल से जुड़ा संविधान का 131वां संशोधन बिल सरकार लोकसभा में पास नहीं करा पाई। इसमें संसद की 543 सीटें बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान था।
लोकसभा में बिल पर 21 घंटे की चर्चा के बाद वोटिंग
लोकसभा में बिल पर 21 घंटे की चर्चा के बाद वोटिंग हुई। उपस्थित 528 सांसदों ने वोट डाले। पक्ष में 298, विपक्ष में 230 वोट पड़े। बिल पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत थी। 528 का दो तिहाई 352 होता है। इस तरह बिल 54 वोट से गिर गया। सरकार ने दो बिल वोटिंग के लिए पेश ही नहीं किए पहला- परिसीमन संशोधन संविधान बिल 2026 दूसरा- केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल 2026 सरकार ने इन पर वोटिंग कराने से इनकार कर दिया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि दोनों बिल पहले से जुड़े हुए हैं, इसलिए वोटिंग की जरूरत नहीं है।
महिला आरक्षण का अब क्या विकल्प हैं?
सरकार बिल में कुछ बदलाव कर सकती है। जैसे- दक्षिणी राज्यों की सीटें बढ़ाने का प्रावधान। यानी 2011 की बजाय 2027 की जनगणना का आधार बनायेगी। नए सिरे से बिल पेश कर सकती है। विपक्ष के सुझाव लेकर सहमति बना सकती है। परिसीमन विवाद: दक्षिण vs उत्तर का मुद्दा क्यों बना चर्चा के दौरान विपक्ष आरोप लगा रहा था कि परिसीमन से उत्तरी राज्यों को फायदा होगा, जबकि दशकों से जनसंख्या वृद्धि में अंतर की वजह से दक्षिणी राज्य पीछे रह जाएंगे। हालांकि अमित शाह ने लोकसभा में बताया कि, इस पर भ्रम फैलाया जा रहा है। शाह ने कहा कि दक्षिण के पांच राज्यों की कुल लोकसभा सीटें 129 से बढ़कर 195 हो जाएंगी। उनका प्रतिशत 23.76 से बढ़कर 23.87 हो जाएगा। इस तरह प्रस्तावित 50% सीट वृद्धि से दक्षिण भारत के हर राज्य को अधिक सीटें मिलेंगी।






