सुप्रीम कोर्ट से लालू यादव को बड़ा झटका: ‘Land for Job’ केस में FIR रद्द करने से इनकार, ट्रायल जारी रहेगा
सुप्रीम कोर्ट ने ‘जमीन के बदले नौकरी’ मामले में लालू प्रसाद यादव की FIR रद्द करने की याचिका खारिज कर दी। हालांकि, ट्रायल के दौरान उन्हें कोर्ट में पेशी से राहत मिली है।
नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk): : ‘जमीन के बदले नौकरी’ घोटाले में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सुप्रीमो Lalu Prasad Yadav को Supreme Court of India से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उनके और उनके परिवार के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने की याचिका खारिज कर दी।
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हालांकि कोर्ट ने राहत देते हुए कहा कि ट्रायल के दौरान लालू यादव को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने की जरूरत नहीं होगी।
हाई कोर्ट के फैसले पर भी लगी मुहर
इससे पहले Delhi High Court ने 24 मार्च को इस मामले में FIR रद्द करने से इनकार किया था। हाई कोर्ट ने लालू यादव की उस दलील को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि CBI ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A के तहत आवश्यक मंजूरी नहीं ली। सुप्रीम कोर्ट ने भी हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए याचिका खारिज कर दी।
क्या है ‘जमीन के बदले नौकरी’ घोटाला?
यह मामला साल 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे। आरोप है कि उस दौरान Indian Railways के पश्चिम मध्य क्षेत्र (जबलपुर) में ग्रुप-D पदों पर नियुक्तियों के बदले जमीन ली गई। जांच एजेंसियों के मुताबिक, जिन लोगों को नौकरी दी गई, उन्होंने अपनी जमीन लालू यादव के परिवार या उनके सहयोगियों के नाम ट्रांसफर की।
लालू यादव की दलील क्या थी?
लालू यादव ने कोर्ट में दलील दी थी कि CBI ने जांच शुरू करने से पहले धारा 17A के तहत अनुमति नहीं ली, इसलिए FIR और चार्जशीट कानूनी रूप से वैध नहीं हैं। लेकिन कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।
राउज एवेन्यू कोर्ट में पहले ही तय हो चुके हैं आरोप
दिल्ली की Rouse Avenue Court ने जनवरी 2026 में इस मामले में 41 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे। इसमें लालू यादव के परिवार के कई सदस्य भी शामिल हैं।
आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब मामला निचली अदालत में आगे बढ़ेगा। ट्रायल जारी रहेगा और सभी आरोपियों के खिलाफ सुनवाई होगी। इस फैसले के बाद लालू यादव और उनके परिवार पर कानूनी दबाव और बढ़ गया है।
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