धनबाद: खनन चालान में देरी से BCCL का कोयला डिस्पैच संकट में, दो दिन में 25 हजार टन आपूर्ति पर असर

BCCL में खनन चालान की मंजूरी में देरी से कोयला डिस्पैच संकट गहरा गया है। अगले दो दिनों में 25 हजार टन कोयला आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। CMD मनोज कुमार अग्रवाल ने डीसी धनबाद से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

धनबाद: खनन चालान में देरी से BCCL का कोयला डिस्पैच संकट में, दो दिन में 25 हजार टन आपूर्ति पर असर
माइनिंग चालान अटके, कोयला सप्लाई पर मंडराया बड़ा संकट।

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     HighLights:  

  • खनन चालान में देरी से BCCL का कोयला डिस्पैच प्रभावित
  • अगले दो दिनों में प्रतिदिन 25 हजार टन कोयला आपूर्ति पर संकट
  • चार दिनों में सड़क और रेल मार्ग से डिस्पैच पूरी तरह ठप होने की आशंका
  • CMD मनोज कुमार अग्रवाल ने डीसी धनबाद से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की
  • गोविंदपुर SLG साइडिंग में रैक लोडिंग बंद, 19 डंपर और कई पेलोडर जब्त
  • ब्लॉक-दो, लोदना और सिजुआ क्षेत्र के 28 से अधिक चालान विभिन्न स्तरों पर लंबित
  • बिजली संयंत्रों और औद्योगिक उपभोक्ताओं की कोयला आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका

धनबाद (Threesocieties.com Desk):  भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) में खनन चालान (माइनिंग चालान) की मंजूरी में हो रही देरी अब कंपनी के लिए गंभीर संकट का कारण बनती जा रही है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि यदि लंबित चालानों का जल्द निपटारा नहीं हुआ तो अगले दो दिनों में प्रतिदिन करीब 25 हजार टन कोयले का डिस्पैच प्रभावित हो सकता है। वहीं, अगले चार दिनों के भीतर सड़क और रेल मार्ग से होने वाला कोयला प्रेषण पूरी तरह ठप पड़ने की आशंका जताई गई है।

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मामले की गंभीरता को देखते हुए बीसीसीएल के सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल ने स्वयं हस्तक्षेप किया है। उनके निर्देश पर जिला प्रशासन से समन्वय स्थापित करते हुए उपायुक्त (डीसी) धनबाद से लंबित खनन चालानों की तत्काल मंजूरी दिलाने का अनुरोध किया गया है। कंपनी का कहना है कि समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ तो इसका असर सिर्फ बीसीसीएल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश के कई बिजली संयंत्रों और औद्योगिक इकाइयों की कोयला आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है।

SLG साइडिंग में रैक लोडिंग बंद, संकट और गहराया

इस बीच गोविंदपुर स्थित एसएलजी (SLG) साइडिंग में कोयला रैक लोडिंग पूरी तरह बंद हो गई है। जिला परिवहन विभाग और खनन विभाग की संयुक्त कार्रवाई के दौरान 19 डंपर और कई पेलोडर जब्त किए जाने के बाद कोयले का परिवहन रुक गया है। पहले से लंबित चालानों की समस्या के बीच इस कार्रवाई ने डिस्पैच व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पैदा कर दिया है। बीसीसीएल अधिकारियों का कहना है कि यदि जल्द वैकल्पिक व्यवस्था नहीं बनी तो कई रैक समय पर लोड नहीं हो पाएंगे, जिससे रेलवे के माध्यम से होने वाला कोयला परिवहन भी प्रभावित होगा।

ब्लॉक-दो, लोदना और सिजुआ के दर्जनों चालान अटके

बीसीसीएल के बिक्री विभाग के अनुसार कंपनी के तीन प्रमुख क्षेत्रों ब्लॉक-दो, लोदना और सिजुआ के बड़ी संख्या में खनन चालान विभिन्न प्रशासनिक स्तरों पर लंबित हैं। ब्लॉक-दो क्षेत्र के 10 से 13 जुलाई के बीच दायर पांच आवेदन खनन निरीक्षक स्तर पर दूसरे चरण में अटके हुए हैं। लोदना क्षेत्र के 2 से 15 जुलाई के बीच के छह आवेदन जिला खनन पदाधिकारी और खनन निरीक्षक स्तर पर अलग-अलग चरणों में लंबित हैं। सिजुआ क्षेत्र के 27 जून से 15 जुलाई के बीच के 17 आवेदन अब तक स्वीकृत नहीं हो सके हैं। इनमें छह आवेदन जिला खनन पदाधिकारी स्तर पर चौथे चरण में, दस आवेदन प्रथम चरण में और एक आवेदन खनन निरीक्षक स्तर पर दूसरे चरण में लंबित है। ये सभी चालान सड़क और रेल मार्ग से कोयला परिवहन के लिए अनिवार्य हैं। मंजूरी में देरी का सीधा असर कोयला डिस्पैच पर पड़ रहा है।

बिजली संयंत्रों की आपूर्ति पर भी मंडराया खतरा

बीसीसीएल प्रबंधन का कहना है कि देश में इस समय बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे समय यदि कोयला प्रेषण प्रभावित होता है तो कई थर्मल पावर प्लांटों में कोयले का स्टॉक तेजी से घट सकता है, जिससे बिजली उत्पादन पर भी असर पड़ने की आशंका है। कंपनी का मानना है कि यह केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया का मामला नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा से भी जुड़ा विषय है। इसलिए जिला प्रशासन से युद्धस्तर पर लंबित मामलों के निपटारे का अनुरोध किया गया है।

जिला प्रशासन के फैसले पर टिकी निगाहें

बीसीसीएल को उम्मीद है कि जिला प्रशासन शीघ्र हस्तक्षेप कर लंबित खनन चालानों की मंजूरी देगा। यदि ऐसा होता है तो सड़क और रेल मार्ग से कोयला डिस्पैच सामान्य हो सकेगा और बिजली क्षेत्र सहित अन्य उद्योगों को होने वाली संभावित आपूर्ति बाधा टल जाएगी। फिलहाल कोयला उद्योग और बिजली क्षेत्र की निगाहें धनबाद जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आने वाले दिनों में कोयला आपूर्ति शृंखला पर इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है।