बिहार: IAS संजीव हंस का पलटवार: रिशुश्री से लेन-देन के आरोपों को बताया बेबुनियाद, SVU FIR पर उठाए सवाल

बिहार के वरिष्ठ IAS अधिकारी संजीव हंस ने SVU द्वारा दर्ज FIR पर सवाल उठाते हुए रिशुश्री से किसी भी वित्तीय लेन-देन के आरोप को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि मामले में कोई नया साक्ष्य नहीं है और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

बिहार: IAS संजीव हंस का पलटवार: रिशुश्री से लेन-देन के आरोपों को बताया बेबुनियाद, SVU FIR पर उठाए सवाल
IAS संजीव हंस (फाइल फोटो)।

पटना (Threesocieties.com Desk): बिहार के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एवं बोर्ड ऑफ रेवेन्यू के अपर सदस्य संजीव हंस ने विशेष निगरानी इकाई (SVU) द्वारा दर्ज प्राथमिकी में अभियुक्त बनाए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने निगरानी विभाग के अधिकारियों को पत्र लिखकर कहा है कि उनके खिलाफ दर्ज मामला तथ्यों और साक्ष्यों के अनुरूप नहीं है तथा इसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जानी चाहिए।

यह भी पढ़ें: बिहार:"3 दिन तक फोन किया, DGP ने नहीं उठाया कॉल..." मंत्री मदन सहनी का बड़ा हमला, शराबबंदी पर पुलिस को घेरा

संजीव हंस ने अपने पत्र में स्पष्ट कहा है कि रूपसपुर थाना कांड संख्या-18/2023 को आधार बनाकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मार्च 2024 में उनके खिलाफ मामला दर्ज किया था, जिसे बाद में पटना उच्च न्यायालय द्वारा निरस्त कर दिया गया। इसके बावजूद उसी मामले से जुड़े तथ्यों के आधार पर SVU द्वारा नई प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें पुनः अभियुक्त बनाया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मामले में कोई नया तथ्य या साक्ष्य सामने नहीं आया है, तो फिर उनके खिलाफ दोबारा कार्रवाई का आधार क्या है। हंस का कहना है कि नई प्राथमिकी में ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं है जिससे उनके विरुद्ध आपराधिक मामला बनता हो।

टेंडर प्रक्रिया पर भी दिया जवाब

संजीव हंस ने अपने पत्र में जल संसाधन विभाग में सचिव रहते हुए निभाई गई अपनी भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बीरपुर स्थित फिजिकल मॉडलिंग सेंटर परियोजना की निविदा प्रक्रिया बिहार सरकार के निर्धारित नियमों, विभागीय प्रक्रियाओं तथा विश्व बैंक की स्वीकृत प्रणाली के तहत पूरी की गई थी। उनके अनुसार, सचिव के रूप में उनकी भूमिका केवल विभागीय निविदा समिति के अध्यक्ष की थी। परियोजना को विभिन्न समितियों की अनुशंसा और निर्धारित प्रक्रिया के बाद स्वीकृति मिली थी। ऐसे में पूरी प्रक्रिया के लिए किसी एक अधिकारी को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।

रिश्वत और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों पर भी सफाई

हंस ने दावा किया कि ED द्वारा की गई विस्तृत जांच में भी उनके खिलाफ रिश्वत लेने, किसी को अवैध लाभ पहुंचाने अथवा धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) से जुड़ा कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं मिला है। उन्होंने यह भी कहा कि जांच एजेंसियों द्वारा लगाए गए आरोप अभी तक किसी ठोस प्रमाण से पुष्ट नहीं हो सके हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई केवल अनुमानों के आधार पर की जा रही है।

रिशुश्री से किसी भी संबंध से किया इनकार

व्यवसायी रिशुश्री और उससे जुड़े कथित वित्तीय लेन-देन के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए संजीव हंस ने साफ कहा कि उनका रिशुश्री से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियां अब तक यह स्थापित नहीं कर पाई हैं कि कथित लेन-देन का उनसे कोई सीधा संबंध है। हंस के अनुसार, उनके खिलाफ लगाए गए आरोप केवल आरोप हैं, जिनके समर्थन में कोई ठोस दस्तावेजी या प्रत्यक्ष साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है।

जमानत आदेश का भी किया उल्लेख

संजीव हंस ने अपने पत्र में यह भी बताया कि वे ED से जुड़े एक मामले में न्यायालय से जमानत प्राप्त कर चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि न्यायालय ने अपने आदेश में यह माना था कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि करने वाले पर्याप्त साक्ष्य फिलहाल उपलब्ध नहीं हैं।

निष्पक्ष जांच की मांग

वरिष्ठ आईएएस अधिकारी ने निगरानी विभाग से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और तथ्यों पर आधारित जांच कराई जाए। साथ ही उन्होंने बिना पर्याप्त साक्ष्य के उन्हें अभियुक्त बनाए जाने के निर्णय पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। संजीव हंस के इस पत्र के बाद बिहार के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में इस मामले को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। अब निगरानी विभाग और जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

बिहार टेंडर घोटाले का मास्टरमाइंड रिशुश्री को रिमांड पर लेने की तैयारी

बहुचर्चित टेंडर घोटाले में गिरफ्तार ठेकेदार रिशुश्री से पूछताछ की तैयारी तेज हो गई है। विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) ने उससे गहन पूछताछ के लिए करीब 100 सवालों की सूची तैयार की है। इसके लिए कोर्ट से सात दिनों की रिमांड मांगी गई है। फिलहाल एजेंसी को अदालत के फैसले का इंतजार है। एसवीयू की ओर से गुरुवार को कोर्ट में सात दिनों की रिमांड के लिए आवेदन दाखिल किया गया। हालांकि अभी इस पर मंजूरी नहीं मिली है।

 जांच एजेंसी को उम्मीद है कि रिमांड मिलने पर कई अहम खुलासे हो सकते हैं। इस बीच बेउर जेल में बंद रिशुश्री की न्यायिक हिरासत अवधि 25 जून तक बढ़ा दी गई है। उसे पहले 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था, जिसकी अवधि अब आगे बढ़ा दी गई है।उसके साथ करीबी सहयोगी संतोष, तारिणी दास, मुमुक्षु चौधरी और उमेश कुमार सिंह भी जेल में बंद हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार टेंडर घोटाले में रिशुश्री सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। अब तक जिन सरकारी अधिकारियों के नाम इस मामले में सामने आए हैं, उनके साथ उसके करीबी संबंधों की बात जांच में सामने आई है।

IAS अफसरों तक पहुंच का राज जानने की कोशिश
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा सौंपे गए दस्तावेजों और रिपोर्ट में कई आईएएस अधिकारियों के नाम भी सामने आए हैं। एसवीयू यह जानना चाहती है कि रिशुश्री ने सचिवालय और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों तक अपनी पहुंच कैसे बनाई और किन लोगों ने शुरुआती दौर में उसकी मदद की। जांच एजेंसी यह भी पता लगाना चाहती है कि विभिन्न विभागों के टेंडरों में कथित गड़बड़ी की शुरुआत कैसे हुई।अफसरों तक रिश्वत की रकम कैसे पहुंचती थी, कमीशन का प्रतिशत कैसे तय होता था और पूरे नेटवर्क का संचालन किस तरह किया जाता था, यह पूछताछ का प्रमुख हिस्सा होगा।

कंपनियों की फंडिंग और बेनामी संपत्तियों की होगी जांच
रिशुश्री द्वारा बनाई गई विभिन्न कंपनियों में शुरुआती निवेश कहां से आया, इसका जवाब भी एसवीयू तलाश रही है। इसके अलावा उसके और परिजनों के नाम पर बनी कंपनियों, बेनामी संपत्तियों और निवेश के स्रोतों की भी विस्तृत जानकारी जुटाई जाएगी। देशभर की कंपनियों की भागीदारी वाली ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया में कथित रूप से सेटिंग कर टेंडर हासिल करने के आरोपों पर भी सवाल पूछे जाएंगे। जांच एजेंसी यह जानना चाहती है कि तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर कथित हेरफेर कैसे किया जाता था।

विदेश यात्राओं और विदेशी निवेश पर भी पूछताछ
रिशुश्री के कई विदेशी दौरों को लेकर भी जांच एजेंसियां सक्रिय हैं। आधा दर्जन से अधिक देशों की यात्राओं का उद्देश्य क्या था, विदेशों में किससे मुलाकात हुई और क्या किसी अधिकारी की संपत्ति विदेशों में निवेश कराने में उसकी भूमिका थी, जैसे सवाल भी पूछताछ का हिस्सा होंगे।  मानना है कि रिमांड के दौरान होने वाली पूछताछ से टेंडर घोटाले के नेटवर्क, कथित संरक्षण देने वाले लोगों और आर्थिक लेन-देन से जुड़े कई अहम खुलासे हो सकते हैं।

टेंडर घोटाले में तीन बड़े अफसर गिरफ्तार

टेंडर घोटाले में विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पिछले दिनों तीन सरकारी अधिकारियों को गिरफ्तार किया है।इनमें भवन निर्माण विभाग के पूर्व मुख्य अभियंता तारिणी दास, वित्त विभाग में संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी मुमुक्षु चौधरी और नगर विकास एवं आवास विभाग के कार्यपालक अभियंता रहे उमेश कुमार सिंह शामिल हैं। इन तीनों के ठिकानों पर ईडी ने पिछले साल छापेमारी की थी जिसमें 11.50 करोड़ से अधिक की राशि बरामद हुई थी। इसके पहले एसवीयू इसी मामले में टेंडर घोटाले के किंगपिन रिशुश्री और उसके करीबी सहयोगी संतोष कुमार को पटना से गिरफ्तार कर चुकी है। रिशुश्री से कनेक्‍शन जुड़ने पर दो आईएएस अधिकारियों को सरकार पहले ही सस्‍पेंड कर चुकी है। योगेश कुमार सागर और अभ‍िलाषा कुमारी शर्मा पर निलंबन की तलवार चल चुकी है। 

तारिणी, मुमुक्षु और उमेश के विरुद्ध दर्ज है FIR

इस छापेमारी के बाद विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) ने तारिणी प्रसाद, मुमुक्षु चौधरी और उमेश कुमार सिंह के विरुद्ध पद का दुरुपयोग कर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी। जांच रिपोर्ट के अनुसार, सीतामढ़ी और सहरसा में नगर आयुक्त रहते हुए मुमुक्षु ने रिशुश्री की कंपनियों को रिश्वत के बदले करोड़ रुपये के ठेके आवंटित किए थे। तारिणी दास पर भी पैसे लेकर नकद कमिशन लेने का आरोप लगा जिसके बाद उनकी विस्तारित सेवा भी खत्म कर दी गई। वहीं उमेश कुमार सिंह पर ठेकेदारों और एजेंसियों के साथ मिलकर संगठित भ्रष्टाचार तंत्र खड़ा करने का आरोप लगा। रिशु श्री की कंपनी समेत अन्य एजेंसियों के बिलों के भुगतान में से एक निश्चित हिस्सा उमेश कुमार सिंह तक पहुंचता था।

रिशुश्री का सहयोगी संतोष गिरफ्तार, दो IAS अफसर हैं सस्पेंड

बिहार के बहुचर्चित टेंडर घोटाले में विशेष निगरानी इकाई ने टेंडर माफिया रिशुश्री के सहयोगी संतोष को गिरफ्तार किया है।   पटना से एसवीयू ने उसकी गिरफ्तारी की है। वह रिशु श्री की कंपनी मातृस्‍वा का निदेशक है। इसके अलावा रिलायबल नाम की कंपनी भी रिशुश्री उसके नाम से चलाता था।   रिशुश्री की पत्‍नी ऋतंभरा भी इस कंपनी में निदेशक है। टेंडरों का घालमेल इन्‍हीं कंपनियों के नाम से होता था। सुपौल से इसका संचालन किया जाता था।    रिशुश्री ने रिलायबल इंफ्रा, मातृस्वा समेत कई नाम से कंपनियों का रजिस्टर किया था। टेंडर में हेरा फेरी करने के लिए इन्हीं कंपनियों का सहारा लेता था। इसी में से एक कंपनी मातृस्वा का निदेशक संतोष कुमार है, जो रिशुश्री का पुराना सहयोगी भी है। एसवीयू ने रिशुश्री के खिलाफ जो प्राथमिकी दर्ज की है, उसमें संतोष कुमार भी प्राथमिक अभियुक्त है।

दो आईएएस अधिकारी सस्‍पेंड, कई रडार पर 
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में घोटाले के मास्टरमाइंड रिशुश्री और कुछ आईएएस अधिकारियों की मिलीभगत का संकेत भी मिल रहा है।  मामले में योगेश कुमार सागर और अभ‍िलाषा कुमारी शर्मा को सस्‍पेंड किया जा चुका है। कई अन्‍य जांच एजेंसियों की रडार पर हैं।   जांच एजेंसी के दस्‍तावेज इशारा कर रहे हैं कि एक सीनियर आईएएस ऑफ‍िसर से रिशुश्री के काफी प्रगाढ़ संबंध थे। उस अधिकारी का नाम टेंडर मैनेज में इस्‍तेमाल करता था।  

आईएएस भैया का क्‍या है कनेक्‍शन?
सूत्रों के मुताबिक रिशुश्री के मोबाइल ने कई राज उगले हैं। आईएएस भैया के नाम से नंबर उसके मोबाइल में सेव थे। इसने जांच एजेंसी के कान खड़े कर दिए हैं।  एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि संबंधित अधिकारी की भूमिका केवल व्यक्तिगत संपर्क तक सीमित थी या फिर सरकारी प्रक्रियाओं को प्रभावित करने में भी उनका प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष योगदान था। उक्त अधिकारी के बारे में भी जांच एजेंसी जानकारी जुटा रही है। तमाम तथ्यों का विस्तृत विश्लेषण किया जा रहा है। एजेंसी का मानना है कि इस जांच से टेंडर नेटवर्क, उससे जुड़े प्रभावशाली लोगों और कथित भ्रष्टाचार के पूरे तंत्र का खुलासा हो

 टेंडर घोटाले में रिशुश्री ने खोल दिया 'कमीशन' के खेल का पूरा चिट्ठा

बिहार के चर्चित टेंडर घोटाले में विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए चार अफसरों के ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इस कार्रवाई में तीन अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि वरिष्ठ IAS अधिकारी संजीव हंस फरार बताए जा रहे हैं। एसवीयू टीम ने संजीव हंस के सरकारी आवास और राजस्व परिषद कार्यालय दोनों जगहों पर तलाशी ली, लेकिन वह वहां नहीं मिले। उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी जारी है और एजेंसियां उनकी लोकेशन ट्रेस करने में जुटी हैं।

तीन अफसर गिरफ्तार, बेउर जेल भेजे गए
इस कार्रवाई में भवन निर्माण विभाग के पूर्व मुख्य अभियंता तारिणी दास, वित्त विभाग के संयुक्त सचिव मुमुक्षु कुमार चौधरी और नगर विकास विभाग के कार्यपालक अभियंता उमेश कुमार सिंह को गिरफ्तार किया गया। तीनों को कोर्ट में पेश कर 14 दिन की न्यायिक हिरासत में बेउर जेल भेज दिया गया है।

कमीशन का पूरा सिस्टम उजागर
जांच में टेंडर घोटाले के कथित मास्टरमाइंड रिशु रंजन सिन्हा के बयान से पूरे 'कमीशन सिस्टम' का खुलासा हुआ है। एसवीयू के अनुसार, रिशुश्री सरकारी अधिकारियों को कमीशन देकर टेंडर और बिल पास कराता था। जांच में सामने आया है कि रिशुश्री भवन निर्माण विभाग के अधिकारी तारिणी दास को 3.5% नकद कमीशन देता था। वहीं नगर विकास विभाग के अभियंता उमेश सिंह को टेंडर के बदले 1% कमीशन दिया जाता था।

करोड़ों की नकदी बरामदगी से बढ़ी जांच की आंच
ईडी की पिछली छापेमारी में भी भारी नकदी बरामद हुई थी। तारिणी दास के ठिकाने से 8.5 करोड़, मुमुक्षु कुमार चौधरी से 2 करोड़ और उमेश कुमार सिंह से 1 करोड़ रुपये नकद मिले थे। इसके अलावा कुल 11.65 करोड़ रुपये की बरामदगी पहले ही सामने आ चुकी है।जांच के अनुसार रिशुश्री ने विभिन्न विभागों में अधिकारियों से सांठगांठ कर अपनी कंपनियों के पक्ष में टेंडर पास करवाए। उस पर सरकारी दस्तावेजों में हेरफेर, रिश्वत और आपराधिक साजिश के गंभीर आरोप लगे हैं।