बिहार: PMCH में मुन्ना शुक्ला के डिस्चार्ज पर बवाल, परिजनों और अस्पताल प्रशासन में तीखी बहस
पटना के पीएमसीएच में पूर्व विधायक मुन्ना शुक्ला को डिस्चार्ज किए जाने के बाद हंगामा हो गया। परिजनों ने इलाज अधूरा होने का आरोप लगाया, जबकि अस्पताल प्रशासन ने मेडिकल रिपोर्ट सामान्य होने के आधार पर छुट्टी देने का फैसला सही बताया।
HighLights:
- पूर्व विधायक मुन्ना शुक्ला को पीएमसीएच से डिस्चार्ज किए जाने पर हंगामा।
- परिजनों ने इलाज अधूरा होने का आरोप लगाकर फैसले का विरोध किया।
- डॉक्टरों ने मेडिकल रिपोर्ट सामान्य होने के आधार पर छुट्टी देने की बात कही।
- अस्पताल परिसर में पुलिस और सुरक्षा कर्मियों की मौजूदगी में मामला शांत हुआ।
पटना (Threesocieties.com Desk): राजधानी पटना के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल पीएमसीएच में शनिवार को उस समय हंगामे की स्थिति बन गई, जब पूर्व विधायक मुन्ना शुक्ला को अस्पताल से डिस्चार्ज किए जाने की जानकारी उनके परिजनों और समर्थकों को मिली। अस्पताल प्रशासन के इस फैसले का विरोध करते हुए परिजन सीधे अधीक्षक कक्ष पहुंच गए और इलाज जारी रखने की मांग करने लगे। इस दौरान अस्पताल प्रशासन और परिजनों के बीच काफी देर तक तीखी नोकझोंक हुई।
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अस्पताल परिसर में अचानक बढ़े तनाव और बहस के कारण कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थिति को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने सुरक्षा बढ़ा दी और पुलिसकर्मियों को भी मौके पर तैनात किया गया।
इलाज अधूरा होने का आरोप लगाकर परिजनों ने जताई नाराजगी
मुन्ना शुक्ला के परिजनों का कहना था कि उन्हें लंबे समय तक इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। ऐसे में महज तीन दिन के भीतर डिस्चार्ज करना जल्दबाजी भरा फैसला है। उनका आरोप था कि मरीज का उपचार अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और स्वास्थ्य की स्थिति को देखते हुए कुछ और दिनों तक निगरानी और इलाज की आवश्यकता थी। परिजनों ने चिकित्सकीय फैसले पर सवाल उठाते हुए अस्पताल प्रशासन से निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच लंबे समय तक बहस चलती रही और कोई भी पक्ष अपने रुख से पीछे हटने को तैयार नहीं दिखा।
डॉक्टरों ने कहा- मेडिकल रिपोर्ट सामान्य, इसलिए दिया गया डिस्चार्ज
पीएमसीएच के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. नागेश्वर शर्मा ने पूरे मामले पर अस्पताल का पक्ष रखते हुए कहा कि मुन्ना शुक्ला को न्यायालय के निर्देश पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। भर्ती के दौरान उनकी आंखों का परीक्षण किया गया और मोतियाबिंद का सफल ऑपरेशन भी किया गया। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन के बाद लगातार चिकित्सकीय जांच और विभिन्न परीक्षण किए गए, जिनकी सभी रिपोर्ट सामान्य आईं। डॉक्टरों की टीम ने स्वास्थ्य की स्थिति संतोषजनक पाए जाने के बाद ही डिस्चार्ज का फैसला लिया। डॉ. शर्मा ने स्पष्ट किया कि अस्पताल प्रशासन का निर्णय पूरी तरह चिकित्सकीय मानकों और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है तथा इसमें किसी प्रकार की अनियमितता नहीं बरती गई है।
पुलिस और सुरक्षा कर्मियों की मौजूदगी में शांत हुआ विवाद
हंगामे की सूचना मिलने के बाद अस्पताल परिसर में पुलिस और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती बढ़ा दी गई। अधिकारियों ने परिजनों और समर्थकों से बातचीत कर उन्हें पूरे मामले की जानकारी दी और चिकित्सकीय प्रक्रिया को समझाने का प्रयास किया।काफी देर तक चली बातचीत और समझाइश के बाद मामला शांत हो गया और अस्पताल का कामकाज सामान्य रूप से शुरू हो गया। प्रशासन ने दोहराया कि मरीज के स्वास्थ्य और मेडिकल रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए ही डिस्चार्ज का फैसला लिया गया है।
कोर्ट के निर्देश पर हुई थी भर्ती
जानकारी के अनुसार, मुन्ना शुक्ला को न्यायालय के निर्देश पर पीएमसीएच में भर्ती कराया गया था। अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान उनका मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया गया, जो सफल रहा। इसके बाद डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी स्वास्थ्य स्थिति की निगरानी कर रही थी। हालांकि, डिस्चार्ज के फैसले के बाद उत्पन्न विवाद ने एक बार फिर जेल में बंद नेताओं और प्रभावशाली कैदियों के इलाज और अस्पताल में भर्ती होने की प्रक्रिया को लेकर बहस छेड़ दी है।






