बिहार:"3 दिन तक फोन किया, DGP ने नहीं उठाया कॉल..." मंत्री मदन सहनी का बड़ा हमला, शराबबंदी पर पुलिस को घेरा
बिहार के मद्य निषेध मंत्री मदन सहनी ने शराबबंदी की विफलता के लिए पुलिस की मिलीभगत को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने डीजीपी विनय कुमार पर फोन नहीं उठाने, बैठक से दूरी बनाने और शराब तस्करी पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
HighLights
- शराबबंदी की विफलता के लिए पुलिस की मिलीभगत को जिम्मेदार ठहराया।
- डीजीपी विनय कुमार पर तीन दिन तक फोन नहीं उठाने और बैठक में शामिल नहीं होने का आरोप
- मधुबनी में गांजा तस्करों को कथित पुलिस एस्कॉर्ट मिलने के मामले पर भी सवाल उठाए
- मंत्री ने कहा कि शराबबंदी की नियमित समीक्षा नहीं होने से पुलिस की छवि खराब हो रही है
- डीजीपी को पत्र लिखकर शराबबंदी पर विशेष समीक्षा बैठक की मांग करेंगे
पटना (Threesocieties.com Desk): बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर एक बार फिर सियासी और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। राज्य के मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन मंत्री मदन सहनी ने बिहार पुलिस और विशेष रूप से डीजीपी विनय कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि राज्य में शराबबंदी की प्रभावी क्रियान्वयन में पुलिस की भूमिका सवालों के घेरे में है।
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रविवार को मीडिया से बातचीत के दौरान मंत्री ने कहा कि राज्य में विदेशी और देसी शराब की लगातार हो रही बरामदगी यह साबित करती है कि अवैध कारोबार को रोकने में कहीं न कहीं पुलिस तंत्र पूरी तरह सफल नहीं हो पाया है। उन्होंने दावा किया कि आम लोग भी लगातार शिकायत करते हैं कि शराब की तस्करी और अवैध निर्माण में कुछ पुलिसकर्मियों की मिलीभगत रहती है।
"तीन दिनों तक फोन किया, डीजीपी ने नहीं उठाया कॉल"
मंत्री मदन सहनी ने कहा कि हाल ही में शराबबंदी को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए विभागीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में रेलवे और एयरपोर्ट प्रशासन से जुड़े अधिकारियों को आमंत्रित किया गया था ताकि राज्य में बाहरी राज्यों से शराब की तस्करी को रोका जा सके।
उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा थी कि बिहार के डीजीपी विनय कुमार भी इस बैठक में शामिल हों, लेकिन वे नहीं पहुंचे। मंत्री ने दावा किया कि उन्होंने लगातार तीन दिनों तक डीजीपी से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन न तो उनकी कॉल रिसीव की गई और न ही कोई कॉलबैक किया गया। मंत्री ने कहा, "डीजीपी की इस पर क्या मंशा है, यह वही बेहतर बता सकते हैं।"
मधुबनी गांजा तस्करी मामले पर भी उठाए सवाल
मदन सहनी ने मधुबनी जिले में सामने आए उस मामले का भी जिक्र किया, जिसमें गांजा तस्करों की गाड़ी को कथित रूप से पुलिस एस्कॉर्ट दिए जाने की बात सामने आई थी। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी घटनाएं सच हैं तो यह बेहद गंभीर मामला है और इस पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि डीजीपी को इस तरह के मामलों पर सख्त रुख अपनाना चाहिए ताकि पुलिस की साख बनी रहे और अवैध कारोबारियों को संरक्षण मिलने की धारणा समाप्त हो।
"विधि व्यवस्था की तरह शराबबंदी की भी हो समीक्षा"
मंत्री ने सुझाव दिया कि जिस प्रकार डीजीपी नियमित रूप से कानून-व्यवस्था की समीक्षा बैठकें करते हैं, उसी तरह शराबबंदी कानून के क्रियान्वयन की भी नियमित समीक्षा होनी चाहिए। उनके अनुसार यदि समय-समय पर निगरानी और जवाबदेही तय की जाती तो पुलिस विभाग पर सवाल नहीं उठते। उन्होंने कहा कि शराबबंदी सरकार की महत्वपूर्ण नीति है और इसे सफल बनाने के लिए पुलिस, उत्पाद विभाग तथा अन्य एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।
डीजीपी को लिखेंगे पत्र
मदन सहनी ने स्पष्ट किया कि वह जल्द ही डीजीपी को पत्र लिखकर शराबबंदी की समीक्षा और पुलिस सहयोग बढ़ाने की मांग करेंगे। उनका कहना है कि सरकार की मंशा शराबबंदी को और प्रभावी बनाना है, लेकिन इसके लिए सभी विभागों का सक्रिय सहयोग आवश्यक है।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज
मंत्री के इस बयान के बाद बिहार के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। शराबबंदी को लेकर पहले भी कई बार विपक्ष सरकार को घेरता रहा है, लेकिन अब सरकार के ही एक मंत्री द्वारा पुलिस तंत्र और डीजीपी पर सवाल उठाए जाने से मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है।






