धनबाद में फर्जी लाइसेंस का खेल! अल्ट्रासाउंड मशीन खरीदने के आरोप में डॉक्टर मिहिर कुमार पर FIR
धनबाद के बरामुड़ी स्थित डॉ. मिहिर किडनी केयर हॉस्पिटल के संचालक डॉ. मिहिर कुमार पर फर्जी PC-PNDT लाइसेंस और कथित जाली दस्तावेजों के आधार पर अल्ट्रासाउंड मशीन खरीदने का आरोप लगा है। स्वास्थ्य विभाग की शिकायत पर धनबाद थाना में FIR दर्ज कर पुलिस जांच शुरू कर दी गई है।
HighLights
- धनबाद थाना में डॉ. मिहिर कुमार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज
- फर्जी PC-PNDT पंजीकरण प्रमाणपत्र (Form-B) के इस्तेमाल का आरोप
- बिना वैध लाइसेंस अल्ट्रासाउंड मशीन खरीदने का मामला
- जांच में दस्तावेजों में अनियमितता मिलने का दावा
- उपायुक्त के कथित जाली हस्ताक्षर इस्तेमाल करने का भी आरोप
धनबाद (Threesocieties.com Desk): जिले के स्वास्थ्य महकमे में उस समय हलचल मच गई जब बरामुड़ी स्थित डॉ. मिहिर किडनी केयर हॉस्पिटल के संचालक डॉ. मिहिर कुमार के खिलाफ कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अल्ट्रासाउंड मशीन खरीदने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई। यह मामला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) धनबाद की प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अनीता चौधरी की शिकायत के बाद सामने आया है।
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स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, अल्ट्रासाउंड मशीन के संचालन के लिए आवश्यक पीसी-पीएनडीटी (Pre-Conception and Pre-Natal Diagnostic Techniques) अधिनियम के तहत वैध पंजीकरण अनिवार्य है। आरोप है कि इस प्रक्रिया का पालन किए बिना कथित तौर पर फर्जी पीसी-पीएनडीटी पंजीकरण प्रमाणपत्र (फॉर्म-बी) तैयार कराया गया और उसी दस्तावेज के आधार पर अल्ट्रासाउंड मशीन की खरीद की गई।
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जांच में सामने आईं कई कथित अनियमितताएं
स्वास्थ्य विभाग द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में प्रस्तुत दस्तावेजों को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं। विभाग का दावा है कि रिकॉर्ड में उपलब्ध कागजात और जमा किए गए दस्तावेजों के बीच गंभीर विसंगतियां पाई गईं। इसी आधार पर मामले को गंभीर मानते हुए पुलिस को शिकायत भेजी गई।अधिकारियों का कहना है कि अल्ट्रासाउंड मशीन की खरीद और उसके संचालन से संबंधित सभी अभिलेखों की जांच की जा रही है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला केवल प्रशासनिक उल्लंघन नहीं बल्कि आपराधिक कृत्य की श्रेणी में भी आ सकता है।
उपायुक्त के कथित जाली हस्ताक्षर का आरोप
मामले ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया जब जांच के दौरान यह आरोप भी सामने आया कि दस्तावेजों में उपायुक्त के कथित जाली हस्ताक्षर का इस्तेमाल किया गया। स्वास्थ्य विभाग ने इस बिंदु को भी अपनी शिकायत में शामिल किया है। यदि जांच में हस्ताक्षर फर्जी पाए जाते हैं तो संबंधित धाराओं के तहत आरोपियों के खिलाफ अतिरिक्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। पुलिस इस पहलू की भी अलग से जांच कर रही है।
पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त जांच
धनबाद थाना में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। वहीं स्वास्थ्य विभाग भी अपने स्तर पर दस्तावेजों की सत्यता और लाइसेंसिंग प्रक्रिया की पड़ताल कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। किसी भी दोषी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
जिले में चर्चा का विषय बना मामला
डॉक्टर के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी के बाद यह मामला पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गया है। स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोग भी इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि पीसी-पीएनडीटी कानून का उद्देश्य भ्रूण लिंग जांच जैसी अवैध गतिविधियों पर रोक लगाना है, इसलिए इस कानून से जुड़े किसी भी प्रकार के फर्जीवाड़े को गंभीरता से लिया जाता है। फिलहाल पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की जांच जारी है। जांच रिपोर्ट और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।






