IIT-ISM धनबाद का कमाल: 120 साल पुरानी रेल सुरंगें हुईं हाईटेक, अब दौड़ेंगी हाई-कैपेसिटी मालगाड़ियां

IIT-ISM धनबाद और पूर्व मध्य रेल ने मिलकर धनबाद-गया ग्रैंड कॉर्ड लाइन की 120 साल पुरानी सुरंगों को रीडिजाइन किया है। अब अधिक ऊंचाई वाली बीओबीआर मालगाड़ियां इस रूट से गुजर सकेंगी, जिससे बिहार और नॉर्थईस्ट तक कोयला परिवहन तेज और आसान होगा।

IIT-ISM धनबाद का कमाल: 120 साल पुरानी रेल सुरंगें हुईं हाईटेक, अब दौड़ेंगी हाई-कैपेसिटी मालगाड़ियां
बिना तोड़फोड़ 120 साल पुरानी सुरंगों की बढ़ी ऊंचाई।
  • IIT-ISM ने बदली 120 साल पुरानी रेल सुरंगों की तस्वीर
  • अब धनबाद से बिहार-नॉर्थईस्ट तक तेज होगा कोयला परिवहन

धनबाद (Threesocieties.com Desk): देश की प्रतिष्ठित तकनीकी संस्था IIT-ISM धनबाद ने एक बार फिर अपनी इंजीनियरिंग क्षमता का शानदार उदाहरण पेश किया है। हावड़ा-नई दिल्ली ग्रैंड कॉर्ड रेल लाइन पर धनबाद से गया के बीच स्थित पहाड़ी और घाटी क्षेत्र की तीन ऐतिहासिक रेल सुरंगों को रीडिजाइन कर रेलवे परिचालन को नई गति दे दी गई है।

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पूर्व मध्य रेल और IIT-ISM के संयुक्त प्रयास से हुए इस तकनीकी बदलाव के बाद अब अधिक ऊंचाई और क्षमता वाली बीओबीआर (BOBR) मालगाड़ियां भी इन सुरंगों से होकर गुजर सकेंगी। इसका सीधा फायदा बिहार और उत्तर-पूर्व भारत के बिजली संयंत्रों को मिलने वाला है, जहां धनबाद क्षेत्र से बड़े पैमाने पर कोयले की आपूर्ति की जाती है।

120 साल पुरानी सुरंगों में बिना तोड़फोड़ बढ़ाई गई ऊंचाई

ग्रैंड कॉर्ड लाइन का निर्माण वर्ष 1906-07 में ब्रिटिश शासन के दौरान किया गया था। धनबाद मंडल के गुरपा-गझंडी घाट सेक्शन को रेलवे के सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सों में गिना जाता है। यहां 1:80 का रूलिंग ग्रेडिएंट, पहाड़ी घाटियां, ऊंचे टीले और तीन सुरंगें हैं। अब तक इन सुरंगों की सीमित ऊंचाई के कारण अधिक ऊंचाई वाले बीओबीआर वैगन इस मार्ग से नहीं गुजर पाते थे। परिणामस्वरूप रेलवे को कोयला परिवहन के लिए लंबा और घुमावदार रास्ता अपनाना पड़ता था।

IIT-ISM के इंजीनियरों और रेलवे विशेषज्ञों ने मिलकर सुरंगों की आंतरिक संरचना का वैज्ञानिक अध्ययन किया और बिना किसी बड़ी तोड़फोड़ के उनकी ऊंचाई बढ़ाने का समाधान तैयार किया। यह कार्य रेलवे इंजीनियरिंग के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

गुरपा-गझंडी सेक्शन में हुआ सफल ट्रायल

पूर्व मध्य रेल के महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह ने गुरुवार को प्रधान मुख्य परिचालन प्रबंधक इंदू रानी दुबे और धनबाद रेल मंडल के डीआरएम अखिलेश मिश्र के साथ गुरपा-गझंडी घाट सेक्शन का फुटप्लेट निरीक्षण किया। इस दौरान बीओबीआर रैक को सुरंगों से सफलतापूर्वक गुजारा गया। रेलवे अधिकारियों ने इसे परिचालन क्षमता बढ़ाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।

अब कम दूरी में पहुंचेगा कोयला

अब तक धनबाद से बिहार और उत्तर-पूर्व के एनटीपीसी प्लांट्स तक बीओबीआर रैक को प्रधानखांटा-आसनसोल-झाझा होकर भेजा जाता था। यह मार्ग लंबा होने के कारण समय और संसाधनों की अधिक खपत होती थी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद बीओबीआर रैक सीधे गुरपा-गझंडी घाट सेक्शन से होकर गुजर सकेंगे। इससे:

कोयला परिवहन में समय की बचत होगी
वैगन टर्नअराउंड तेज होगा
रेलवे की माल ढुलाई क्षमता बढ़ेगी
एनटीपीसी प्लांट्स को समय पर कोयला आपूर्ति मिलेगी
रेलवे को परिचालन लागत में राहत मिलेगी

बिहार और नॉर्थईस्ट को मिलेगा बड़ा फायदा

रेलवे अधिकारियों के अनुसार बाढ़, बरौनी और सलाकाटी जैसे एनटीपीसी प्लांट्स तक कोयले की सप्लाई अब ज्यादा तेज और सुगम हो जाएगी। इससे बिजली उत्पादन प्रभावित नहीं होगा और औद्योगिक क्षेत्रों को भी अप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। IIT-ISM और रेलवे के इस संयुक्त प्रयास को भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।