झारखंड: पूर्व DFO पर करोड़ों की लूट का आरोप, बाबूलाल मरांडी ने राज्यपाल को सौंपा सबूतों से भरा ज्ञापन,जांच की मांग

झारखंड में बड़ा घोटाला सामने आया है। बाबूलाल मरांडी ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर पूर्व DFO राजीव लोचन बख्शी पर करोड़ों की वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज।

झारखंड: पूर्व DFO पर करोड़ों की लूट का आरोप, बाबूलाल मरांडी ने राज्यपाल को सौंपा सबूतों से भरा ज्ञापन,जांच की मांग
वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप ।

रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड की सियासत में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। राज्य के नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने 13 अप्रैल 2026 को राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से मुलाकात कर एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में रांची वन प्रमंडल के तत्कालीन डीएफओ राजीव लोचन बख्शी पर करोड़ों रुपये के घोटाले, वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक कदाचार के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

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मरांडी ने पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से उच्चस्तरीय जांच और फॉरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की है। उन्होंने इसे “राजकोष की खुली लूट” बताते हुए कार्रवाई की जरूरत बताई।

 क्या हैं मुख्य आरोप?

ज्ञापन और सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं:

1. मास्टर रोल में फर्जीवाड़ा
महालेखाकार (AG) की प्रारंभिक जांच में 95 मास्टर रोल्स में ₹1.03 करोड़ से अधिक के संदिग्ध भुगतान का खुलासा हुआ। मजदूरों के हस्ताक्षर या अंगूठे के निशान नहीं हैं। ‘व्हाइटनर’ और ‘इरेजर’ से रिकॉर्ड में छेड़छाड़ की गयी है। नकद भुगतान दिखाकर गड़बड़ी की गयी। 

2. अधिकारों का दुरुपयोग
ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के प्रस्ताव को नियम विरुद्ध 8 भागों में बांटा गया, जिससे 7.35 हेक्टेयर वन भूमि का उपयोग DFO स्तर पर ही मंजूर हो सके। इससे सरकार को ₹46.01 लाख के राजस्व (NPV) का नुकसान हुआ।

3. CAMPA फंड में भारी गड़बड़ी
₹8.53 करोड़ से अधिक की अग्रिम राशि (Advance) का लेखा-जोखा ऑडिट टीम से छिपाया गया। राशि का भौतिक सत्यापन तक नहीं हो सका।

फर्जी खरीद और मजदूरी घोटाला

₹1.80 करोड़ की सामग्री खरीद के मूल वाउचर गायब है। इससे जुड़ी ₹5.455 करोड़ की मजदूरी को भी फर्जी बताया गया
राजनीतिक संरक्षण का भी आरोप

बाबूलाल मरांडी ने अपने ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया कि राजीव लोचन बख्शी को उच्च स्तर पर राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ है।
उन्होंने कहा कि अधिकारी ने सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग कर “विशिष्ट सेवा” दी, जिसके चलते वे आज भी सरकार के अहम विभागों—जैसे सूचना एवं जनसंपर्क विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड—में प्रभावशाली पदों पर बने हुए हैं।

 मरांडी का बयान

राज्यपाल से मुलाकात के बाद मरांडी ने कहा कि “प्रशासनिक शुचिता बनाए रखने और जनता के पैसे की लूट उजागर करने के लिए इस मामले की सघन फॉरेंसिक जांच बेहद जरूरी है।” उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर मुलाकात की तस्वीरें भी साझा कीं।

अब आगे क्या?

यह मामला सामने आने के बाद झारखंड की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। यदि जांच की मांग स्वीकार होती है, तो राज्य के वन विभाग और प्रशासनिक तंत्र में बड़े खुलासे हो सकते हैं।