झारखंड में ‘ट्रेजरी स्कैम’ का विस्तार: बोकारो के बाद हजारीबाग में 15.41 करोड़ का खेल, 2 पुलिसकर्मी हिरासत में

झारखंड में ट्रेजरी घोटाले का दायरा बढ़ता जा रहा है। बोकारो के बाद हजारीबाग पुलिस कार्यालय में 15.41 करोड़ की अवैध निकासी का खुलासा हुआ है। दो पुलिसकर्मी हिरासत में हैं, जबकि तीन सिपाही जांच के दायरे में हैं।

झारखंड में ‘ट्रेजरी स्कैम’ का विस्तार: बोकारो के बाद हजारीबाग में 15.41 करोड़ का खेल, 2 पुलिसकर्मी हिरासत में
जिला पुलिस के तीन सिपाही रडार पर

रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड में सरकारी ट्रेजरी से अवैध निकासी का मामला अब बड़ा घोटाला बनता जा रहा है। बोकारो ट्रेजरी से शुरू हुआ यह खेल अब हजारीबाग तक पहुंच गया है, जहां पुलिस अधीक्षक कार्यालय की लेखा शाखा में पिछले 8–10 वर्षों के दौरान 15.41 करोड़ रुपये की अवैध निकासी का खुलासा हुआ है। इस सनसनीखेज मामले ने राज्य प्रशासन, वित्त विभाग और पुलिस मुख्यालय तक हड़कंप मचा दिया है।

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हजारीबाग में 15 करोड़ से ज्यादा का ‘लेखा घोटाला’

जांच में सामने आया है कि हजारीबाग पुलिस कार्यालय की लेखा प्रणाली में बड़े पैमाने पर हेराफेरी की गई। प्रारंभिक जांच के अनुसार 15 करोड़ 41 लाख 41 हजार 485 रुपये की गड़बड़ी सामने आई है, जबकि आशंका जताई जा रही है कि असली रकम इससे कहीं अधिक हो सकती है। इस मामले में हजारीबाग पुलिस ने दो पुलिसकर्मियों – शंभू कुमार और पंकज – को हिरासत में लिया है, जबकि तीन सिपाही (रजनीश, शंभू और धीरेंद्र) जांच के दायरे में हैं।

2012 से जमे थे आरोपी, सिस्टम की पूरी जानकारी

सूत्रों के मुताबिक, संदिग्ध सिपाही वर्ष 2012 से पुलिस अधीक्षक कार्यालय की लेखा शाखा में कार्यरत थे। लंबे समय तक एक ही जगह पर तैनाती और वित्तीय प्रक्रियाओं की गहरी जानकारी का फायदा उठाकर इन्होंने सुनियोजित तरीके से सरकारी धन की निकासी की। तीनों आरोपियों से अलग-अलग थानों में पूछताछ की जा रही है, ताकि तथ्यों का मिलान किया जा सके।

फर्जी खातों का जाल: रिटायर्ड कर्मियों के नाम पर निकासी

जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि सेवानिवृत्त कर्मियों के नाम पर फर्जी बैंक खाते खोले गए। कुछ वर्तमान पदाधिकारियों के नाम का भी दुरुपयोग किया गया। सरकारी भुगतान के नाम पर राशि इन खातों में ट्रांसफर की जाती रही। करीब दो दर्जन से अधिक रिटायर्ड कर्मियों के नाम पर यह फर्जीवाड़ा किया गया, जिससे लंबे समय तक घोटाला पकड़ में नहीं आया।

ऑनलाइन सिस्टम ‘सही’, ऑफलाइन में किया गया खेल

जांच एजेंसियों को शक है कि राज्य सरकार के कुबेर पोर्टल के साथ भी छेड़छाड़ की गई हो सकती है। ऑनलाइन रिकॉर्ड को सामान्य रखा गया, लेकिन ऑफलाइन दस्तावेजों में बदलाव कर फर्जी भुगतान आदेश बनाए गए। यानी सिस्टम में सब कुछ ठीक दिखता रहा, जबकि अंदरखाने करोड़ों की निकासी होती रही।

परिवार के खातों में ट्रांसफर, संपत्ति की भी जांच

अब तक दो संदिग्ध बैंक खाते चिन्हित किए गए हैं, जिनमें आरोपियों के परिजनों के नाम पर पैसे ट्रांसफर होने के प्रमाण मिले हैं। जांच एजेंसियां अब बैंक लेनदेन, व संपत्ति निवेश की भी पड़ताल कर रही हैं। बताया जा रहा है कि एक आरोपी ने हाल ही में आलीशान मकान भी बनाया है, जो जांच के घेरे में है।

बोकारो से जुड़ा कनेक्शन: 4.29 करोड़ का खेल

इससे पहले बोकारो ट्रेजरी में भी बड़ा घोटाला सामने आया था, जहां एक रिटायर्ड पुलिसकर्मी उपेंद्र सिंह के नाम पर 4.29 करोड़ रुपये की अवैध निकासी की गई। इस मामले में मुख्य आरोपी एकाउंटेंट कौशल पांडेय को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिसके खातों में भारी ट्रांजैक्शन के सबूत मिले हैं।

जांच कमिटी गठित, जल्द होगा बड़ा खुलासा

हजारीबाग के उपायुक्त ने इस पूरे मामले की जांच के लिए अपर समाहर्ता के नेतृत्व में कमिटी गठित की है। पुलिस मुख्यालय को विस्तृत रिपोर्ट भेज दी गई है और संकेत हैं कि जल्द ही पूरे नेटवर्क का बड़ा खुलासा हो सकता है।

सरकारी सिस्टम पर गंभीर सवाल

यह मामला सिर्फ एक वित्तीय घोटाला नहीं, बल्कि सरकारी भुगतान प्रणाली, आंतरिक निगरानी व  वित्तीय ऑडिट सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। अगर जांच में आरोप पूरी तरह सही साबित होते हैं, तो यह झारखंड पुलिस विभाग के सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में दर्ज हो सकता है।

वित्त विभाग ने कसी नकेल, निर्देश जारी
वित्त विभाग की समीक्षा में बोकारो और हजारीबाग के एसपी कार्यालयों में करोड़ों रुपये की अवैध निकासी का खुलासा हुआ है। इस घोटाले के सामने आने के बाद वित्त विभाग के सचिव प्रशांत कुमार ने राज्य के सभी विभागों और कोषागार पदाधिकारियों को सख्त एहतियात बरतने के निर्देश जारी किए हैं। यह निर्देश सभी अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, सचिव, सभी विभाग के अध्यक्ष, प्रमंडलीय आयुक्त, सभी डीसी, एसएसपी, एसपी और ट्रेज़री के पदाधिकारी को जारी किया गया है।

जारी पत्र कहा गया है कि जांच में मुख्य रूप से दो जिलों में भारी वित्तीय गड़बड़ी पाई गई है। बोकारो एसपी ऑफिस से मई 2024 से दिसंबर 2025 के बीच वेतन मद से कुल 3.15 करोड़ की अवैध निकासी की गई।.जबकि हजारीबाग (SP कार्यालय से पिछले आठ वर्षों के दौरान लगभग 15.41 करोड़ से अधिक का अवैध निकासी का मामला प्रकाश में आया है।

ऐसे हुआ यह फर्जीवाड़ा
वित्त विभाग के पत्र के अनुसार, जालसाजों ने सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर इन तरीकों से पैसे उड़ाए।  फर्जी कर्मचारी और मृत और सेवानिवृत्त लोगों का उपयोग किया गया। ऐसे लोग जो कार्यालय में कार्यरत ही नहीं थे या सेवानिवृत्त हो चुके थे, उनके नाम पर वेतन निकाला जा रहा था। एक मामले में तो सेवानिवृत्त व्यक्ति के जीपीएफ प्रोफाइल में जन्मतिथि बदलकर उसे कार्यरत दिखाकर भुगतान लिया गया।

रिश्तेदारों के बैंक खातों में पैसा: बिल क्लर्क द्वारा वेतन की राशि विभाग के बजाय अपनी पत्नी या सगे-संबंधियों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जा रही थी।  वेतन विसंगति: कर्मचारियों को उनके वास्तविक पे-स्केल से कहीं अधिक राशि हर महीने भेजी जा रही थी।

ओटीपी का दुरुपयोग: आहरण एवं संवितरण पदाधिकारी (डीडीओ) और क्लर्क दोनों के ओटीपी एक ही मोबाइल नंबर पर आ रहे थे। कुछ मामलों में अधिकारी अपना आधार-लिंक्ड ओटीपी भी क्लर्क के साथ साझा कर रहे थे, जिससे फर्जीवाड़े का रास्ता साफ हो गया।

लंबे समय तक एक ही सीट पर कब्जा: दोषी क्लर्क पिछले 10-12 वर्षों से एक ही पद पर जमे हुए थे, जिससे उनकी संदिग्ध गतिविधियां पकड़ी नहीं जा सकीं।

वित्त विभाग के नए सख्त निर्देश
 अब किसी भी वेतन भुगतान से पहले डीडीओ को कर्मचारी के नाम, पदनाम, और जन्मतिथि का मिलान उसकी सर्विस बुक से करना होगा। वेतन भुगतान से पहले कर्मचारी के बैंक खाते का मिलान पासबुक या चेक से करना अनिवार्य होगा।अब ट्रेज़री से वेतन तभी निकलेगा जब डीडीओ बिल पर इस बात का प्रमाण पत्र देंगे कि उन्होंने सभी आंकड़ों की जांच कर ली है। कोई भी अधिकारी अपना ओटीपी किसी अन्य कर्मचारी के साथ साझा नहीं करेगा।  जो बिल क्लर्क तीन साल से अधिक समय से एक ही पद पर तैनात हैं, उन्हें तुरंत हटाकर दूसरे को कार्य आवंटित किया जायेगा।