Dhanbad: बागडिगी खदान हादसे के 25 साल—29 शहीद खनिकों को बीसीसीएल सीएमडी ने दी श्रद्धांजलि
Dhanbad Baghmari Accident: बागडिगी कोलियरी बाढ़ त्रासदी की 25वीं बरसी पर बीसीसीएल सीएमडी ने 29 शहीद खनिकों को श्रद्धांजलि दी। जानिए 2001 के खदान हादसे की पूरी कहानी।
- 2001 की त्रासदी ने फिर रुलाया झरिया
- डैम टूटने से खदान में समाया था पानी
- 168 घंटे मौत से लड़कर जिंदा लौटे सलीम अंसारी की कहानी आज भी देती है सिहरन
धनबाद (Threesocieties.com Desk)। झरिया कोयलांचल के इतिहास में दर्ज सबसे दर्दनाक हादसों में शामिल बागडिगी कोलियरी बाढ़ त्रासदी की 25वीं बरसी पर रविवार को शहीद खनिकों को नम आंखों से याद किया गया। 2 फरवरी 2001 को हुए इस भीषण हादसे में 29 खनिकों ने खदान में डूबकर अपनी जान गंवाई थी।
यह भी पढ़ें: धनबाद: सिंह मेंशन बमबारी का सच: अमन सिंह गैंग के गुर्गे ने किया बड़ा खुलासा, पर्चा फर्जी
इस अवसर पर बीसीसीएल के सीएमडी श्री मनोज कुमार अग्रवाल ने बागडिगी स्थित शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर शहीद खनिकों को श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिकारी, ट्रेड यूनियन प्रतिनिधि, स्थानीय लोग और शोक संतप्त परिजन मौजूद रहे।सीएमडी ने कहा कि “बागडिगी हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सुरक्षा से जुड़ी गंभीर सीख है। बीसीसीएल शहीदों के बलिदान को कभी नहीं भूल सकता।”
जब डैम टूटते ही मौत बनकर घुसा पानी
2 फरवरी 2001 की दोपहर करीब 12 बजे लोदना क्षेत्र की बागडिगी कोलियरी की 12 नंबर खदान में अचानक तेज धमाके जैसी आवाज हुई। 1962 से जमा पानी वाले पुराने डैम का बांध टूट गया, और लाखों गैलन पानी देखते ही देखते खदान के भीतर समा गया। खदान में काम कर रहे मजदूरों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। पलक झपकते ही 29 खनिक काल के गाल में समा गए।
रेस्क्यू ऑपरेशन और प्रशासन की जद्दोजहद
हादसे की खबर मिलते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया। तत्कालीन आयुक्त वी. क्रिस्पोट्टा, एसपी अब्दुल गनी मीर और पूर्व मंत्री बच्चा सिंह मौके पर पहुंचे। खदान की गहराई और पानी के दबाव को देखते हुए मुंबई से विशेष गोताखोरों की टीम बुलाई गई। तकनीकी सीमाओं के कारण रेस्क्यू अभियान बेहद धीमा रहा। कई दिनों तक पानी निकाला जाता रहा। पांच फरवरी की आधी रात को पहला शव बाहर निकाला गया, जिसकी पहचान कैप लैंप नंबर से हुई।
168 घंटे मौत के साये में: सलीम अंसारी की संघर्ष गाथा
यह हादसा सिर्फ मौत की कहानी नहीं, बल्कि जिंदगी से जंग जीतने की मिसाल भी है। सलीम अंसारी, जो सात नंबर सीम में ड्यूटी पर थे, किसी तरह कोयले के ऊंचे ढेर पर चढ़ गए।
सात दिन (168 घंटे)
अंधेरा, भूख, प्यास
पीने के लिए खदान का मटमैला पानी
सलीम बताते हैं— “मेरी आंखों के सामने साथी डूबते चले गए। जब रेस्क्यू टीम दिखी, तब लगा कि भगवान ने दोबारा जिंदगी दी है।”
जांच में उजागर हुई गंभीर लापरवाही
जांच रिपोर्टों में सामने आया कि यह हादसा प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि मानवीय लापरवाही का नतीजा था।
डैम से एक सप्ताह पहले रिसाव शुरू हो चुका था
सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई
समय रहते खदान खाली नहीं कराई गई
इस लापरवाही ने 29 परिवारों की खुशियां छीन लीं।
अब बंद हो चुकी है वही खदान
आज वह बागडिगी खदान भूमिगत आग की चपेट में आने के कारण बंद हो चुकी है। खदान को बालू और ओबी से भर दिया गया है, लेकिन दुख की बात यह है कि शहीद स्मारक और बागडिगी बस्ती का अस्तित्व भी खतरे में है।
हर साल दो फरवरी को श्रद्धांजलि
हर वर्ष 2 फरवरी को बीसीसीएल के सीएमडी, निदेशक, अधिकारी, श्रमिक और यूनियन प्रतिनिधि मोमबत्तियां जलाकर उन 29 शहीद खनिकों को याद करते हैं, जिन्होंने देश के कोयला उत्पादन के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।






