बिहार को मिला नया राज्यपाल: सेना के दिग्गज लेफ्टिनेंट जनरल (सेनि) सैयद अता हसनैन ने ली शपथ
लेफ्टिनेंट जनरल (सेनि) सैयद अता हसनैन ने बिहार के 30वें राज्यपाल के रूप में शपथ ली। सेना में लंबा अनुभव, कश्मीर में ‘हार्ट्स डॉक्ट्रिन’ और अंतरराष्ट्रीय सैन्य रणनीति में विशेषज्ञता के कारण उन्हें एक मजबूत प्रशासक माना जाता है।
- रणनीतिक सोच और सैन्य अनुभव से मजबूत होगा प्रशासन
पटना (Threesocieties.com Desk): बिहार को नया संवैधानिक प्रमुख मिल गया है। भारतीय सेना के वरिष्ठ और प्रतिष्ठित अधिकारी Syed Ata Hasnain ने राज्य के 30वें राज्यपाल के रूप में शपथ ग्रहण कर ली। राजभवन में आयोजित समारोह में उन्होंने पद और गोपनीयता की शपथ ली।
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शपथ ग्रहण के बाद उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री Nitish Kumar से मुलाकात कर उन्हें उनके सफल और लंबे राजनीतिक कार्यकाल के लिए बधाई भी दी। समारोह में राज्य के कई मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य लोग मौजूद रहे। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में यह उम्मीद जताई जा रही है कि उनके व्यापक अनुभव और दूरदर्शिता से बिहार में सुशासन और प्रशासनिक व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
सेना में शानदार करियर, कई संवेदनशील क्षेत्रों में सेवा
लेफ्टिनेंट जनरल (सेनि) सैयद अता हसनैन भारतीय सेना के उन वरिष्ठ अधिकारियों में शामिल रहे हैं जिन्होंने कई चुनौतीपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दी हैं। उन्होंने अपने सैन्य करियर के दौरान श्रीलंका में Indian Peace Keeping Force के साथ भी काम किया। इसके अलावा सियाचिन ग्लेशियर, पूर्वोत्तर भारत और जम्मू-कश्मीर जैसे कठिन इलाकों में उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वे संयुक्त राष्ट्र मिशन के तहत अफ्रीकी देशों मोजाम्बिक और रवांडा में भी सेवाएं दे चुके हैं, जहां उन्होंने अंतरराष्ट्रीय शांति अभियानों में योगदान दिया।
कश्मीर में ‘हार्ट्स डॉक्ट्रिन’ से मिली पहचान
जम्मू-कश्मीर में 15वीं कोर की कमान संभालते हुए उन्होंने “हार्ट्स डॉक्ट्रिन” नामक जन-केंद्रित रणनीति पर काम किया। इस नीति का उद्देश्य स्थानीय जनता का विश्वास जीतना और शांति बहाली के लिए सेना और नागरिकों के बीच बेहतर संबंध बनाना था।उनकी रणनीतिक सोच और नेतृत्व क्षमता के कारण उन्हें कश्मीर, पाकिस्तान और मध्य-पूर्व से जुड़े अंतरराष्ट्रीय सैन्य मामलों का विशेषज्ञ भी माना जाता है।
प्रतिष्ठित संस्थानों से की उच्च शिक्षा
सैयद अता हसनैन ने देश-विदेश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों से पढ़ाई की है।
Sherwood College से प्रारंभिक शिक्षा
St. Stephen's College से उच्च शिक्षा
Royal College of Defence Studies
King's College London
Asia-Pacific Center for Security Studies
इन संस्थानों में अध्ययन के कारण उन्हें वैश्विक सुरक्षा, रणनीति और रक्षा मामलों की गहरी समझ हासिल हुई।
1974 में सेना में हुए थे शामिल
साल 1974 में उन्होंने Indian Military Academy से प्रशिक्षण प्राप्त कर भारतीय सेना में कमीशन हासिल किया। इसके बाद उन्हें Garhwal Rifles की चौथी बटालियन में नियुक्त किया गया। दिलचस्प बात यह है कि उनके पिता मेजर जनरल सैयद महदी हसनैन भी गढ़वाल राइफल्स से जुड़े रहे और इस रेजिमेंट की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इस तरह उनका परिवार भारतीय सेना की गौरवशाली परंपरा से जुड़ा रहा है।
कई राष्ट्रीय संस्थानों से भी जुड़ाव
सेना से सेवानिवृत्ति के बाद भी सैयद अता हसनैन कई राष्ट्रीय संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभा रहे हैं। National Disaster Management Authority के सदस्य, Prime Ministers Museum and Library Society की समिति के सदस्य, Vivekananda International Foundation से जुड़े हैं। इसके अलावा वे Central University of Kashmir के कुलाधिपति भी रह चुके हैं।
कई सैन्य सम्मान से हो चुके हैं सम्मानित
सैयद अता हसनैन को उनके उत्कृष्ट सैन्य योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हुए हैं, जिनमें प्रमुख हैं—
Param Vishisht Seva Medal
Uttam Yudh Seva Medal
Ati Vishisht Seva Medal
Vishisht Seva Medal
इसके अलावा उन्हें राष्ट्रपति से छह और सेना प्रमुख से दो प्रशस्तियां भी मिल चुकी हैं।
संक्षिप्त परिचय
जन्म: उत्तर प्रदेश
पिता: मेजर जनरल सैयद महदी हसनैन
पत्नी: सबीहा हसनैन
संतान: दो पुत्रियां
सेवानिवृत्ति: जुलाई 2023






