धनबाद: कबीर–सूफी सुरों में शहीद रणधीर वर्मा को श्रद्धांजलि, पद्मश्री भारती बंधु की गायकी ने छू ली आत्मा

धनबाद में शहीद रणधीर वर्मा के 35वें शहादत दिवस पर आयोजित संगीतमय श्रद्धांजलि सभा में पद्मश्री डॉ. भारती बंधु की कबीर-सूफी गायकी ने श्रोताओं को आध्यात्मिक अनुभूति से भर दिया।

धनबाद: कबीर–सूफी सुरों में शहीद रणधीर वर्मा को श्रद्धांजलि, पद्मश्री भारती बंधु की गायकी ने छू ली आत्मा
शहीद रणधीर वर्मा को संगीतमय श्रद्धांजलि।

धनबाद। कोयला राजधानी धनबाद के रणधीर वर्मा चौक पर शहीद रणधीर वर्मा के 35वें शहादत दिवस के अवसर पर आयोजित संगीतमय श्रद्धांजलि सभा में कबीर और सूफी परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस अवसर पर सुविख्यात सूफी-कबीर गायक एवं पद्मश्री डॉ. भारती बंधु ने अपनी भावपूर्ण गायकी से ऐसा समां बांधा कि शोर-शराबे वाला चौक कुछ देर के लिए ध्यान और निस्तब्धता के केंद्र में बदल गया।

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डॉ. भारती बंधु ने कबीर की निर्गुण परंपरा को आधुनिक संदर्भों में प्रस्तुत करते हुए सूफी रहस्यवाद की तान छेड़ी। उनकी आवाज में ऐसा आध्यात्मिक आकर्षण था कि श्रोता मंत्रमुग्ध होकर आत्मिक संवाद में डूबते चले गए। भारती बंधु की विशेषता यह रही कि वे केवल गायन नहीं कर रहे थे, बल्कि श्रोताओं से संवाद करते हुए जीवन और मृत्यु के गूढ़ अर्थ समझा रहे थे।

‘गाड़ी’ शरीर है और ‘हांकने वाला’ मन—भारती बंधु का दर्शन

श्रोताओं की मांग पर जब उन्होंने “जरा धीरे-धीरे गाड़ी हांको, मेरे राम गाड़ी वाले…” प्रस्तुत किया, तो यह केवल गीत नहीं रहा, बल्कि जीवन-दर्शन बन गया। उन्होंने संकेत दिया कि ‘गाड़ी’ हमारा शरीर है और ‘गाड़ी हांकने वाला’ हमारा मन या बुद्धि। यह संसार हमारा स्थायी घर नहीं है, इसलिए जीवन को संयम, विवेक और साक्षी भाव के साथ जीना चाहिए, ताकि अंतिम पड़ाव पर कोई पछतावा न रहे।

न्यूनतम वाद्य, अधिकतम प्रभाव

इस संगीतमय श्रद्धांजलि सभा में कोई भव्य ऑर्केस्ट्रा नहीं था। केवल ढोलक, चिमटा और हारमोनियम जैसे न्यूनतम वाद्य-यंत्रों के साथ भारती बंधु की बुलंद आवाज ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक शांति से भर दिया। रणधीर वर्मा चौक पर छायी निस्तब्धता केवल ‘वाह-वाह’ और तालियों की गूंज से ही टूटती रही।

छत्तीसगढ़ के रायपुर में जन्मे पद्मश्री डॉ. भारती बंधु कबीर के निर्गुण भक्ति साहित्य को अपनी सूफी गायन शैली के माध्यम से देश-विदेश तक पहुंचा चुके हैं। उनकी गायकी में सगुण-निर्गुण दोनों धाराओं का समन्वय दिखाई देता है, लेकिन उनकी पहचान निर्गुण गायक के रूप में स्थापित है, जो सामाजिक समानता और सरल भक्ति पर बल देती है।

 35 वर्षों से कायम है श्रद्धांजलि की परंपरा

कार्यक्रम में उपस्थित धनबाद के सांसद ढुल्लू महतो ने शहीद रणधीर वर्मा की सत्यनिष्ठा, कर्तव्यपरायणता और वीरता को स्मरण करते हुए राज्य सरकार से मांग की कि उनके जीवन मूल्यों को स्कूल पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि यह गर्व की बात है कि पिछले 35 वर्षों से शहादत दिवस पर संगीतमय श्रद्धांजलि की परंपरा लगातार निभाई जा रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि कार्यक्रम के विस्तार में धन की कमी आड़े नहीं आने दी जायेगी।

पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं शहीद रणधीर वर्मा की पत्नी प्रो. रीता वर्मा ने अपने स्वागत भाषण में रणधीर वर्मा मेमोरियल सोसाइटी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि यह कार्यक्रम भविष्य में भी अनवरत चलता रहेगा। उन्होंने धनबाद की जनता से इस आयोजन की भव्यता बनाए रखने के लिए तन-मन-धन से सहयोग करने की अपील की।

रणधीर वर्मा मेमोरियल सोसाइटी के अध्यक्ष किशोर कुमार ने कहा कि संगीतमय श्रद्धांजलि सभा की भव्यता और निरंतरता हर हाल में बनी रहेगी। उन्होंने सांसद ढुल्लू महतो के सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया।

कई विशिष्ट अतिथि रहे मौजूद

इस अवसर पर झरिया की विधायक रागिनी सिंह, झारखंडकांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार ठाकुर, पूर्व विधायक अपर्णा सेनगुप्ता सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद थे। कार्यक्रम के प्रारंभ में सशस्त्र पुलिस बल के जवानों ने शहीद रणधीर वर्मा को गार्ड ऑफ ऑनर देकर सलामी दी।

प्रशासनिक अधिकारियों में धनबाद के उपायुक्त आदित्य रंजन, वरीय पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार, सिटी एसपी ऋत्विक श्रीवास्तव सहित जिला प्रशासन के वरीय अधिकारी उपस्थित रहे।