ED का बड़ा मास्टरस्ट्रोक: झारखंड-बंगाल एक कमान में, प्रभाकर प्रभात बने ‘सुपर बॉस’
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने झारखंड और पश्चिम बंगाल जोन को एकीकृत करते हुए रांची के संयुक्त निदेशक प्रभाकर प्रभात को कोलकाता का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया है। इस फैसले को कोयला, जमीन और अवैध खनन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी माना जा रहा है। वहीं पूजा सिंघल केस में अभिषेक झा की विदेश यात्रा याचिका पर 13 मई को फैसला आएगा।
रांची (Threesocieties.com Desk): प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पूर्वी भारत में अपने जांच नेटवर्क को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया है। ईडी मुख्यालय ने झारखंड और पश्चिम बंगाल जोन को एकीकृत करते हुए रांची जोन के संयुक्त निदेशक (जेडी) प्रभाकर प्रभात को कोलकाता जोन का भी अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया है। इस फैसले को मनी लॉन्ड्रिंग, कोयला तस्करी, अवैध खनन और जमीन घोटालों पर बड़े स्तर की कार्रवाई की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।
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सूत्रों के अनुसार, मार्च 2026 में रायपुर से रांची स्थानांतरित होकर आए प्रभाकर प्रभात को महज दो महीने के भीतर यह अतिरिक्त जिम्मेदारी मिलना ईडी मुख्यालय की विशेष रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। अब रांची और कोलकाता दोनों जोन की फाइलें एक ही नेतृत्व के अधीन होंगी, जिससे राज्यों के बीच फैले आर्थिक अपराधों की जांच में तेजी आने की उम्मीद है।
कोयला और जमीन घोटालों पर फोकस
ईडी की जांच में पहले भी यह सामने आता रहा है कि झारखंड में हुए कोयला, जमीन और अवैध खनन घोटालों से जुड़े पैसों का इस्तेमाल पश्चिम बंगाल की शेल कंपनियों के जरिए किया जाता रहा है। अब तक दोनों राज्यों के जोन अलग-अलग जांच कर रहे थे, जिससे सूचनाओं के आदान-प्रदान और समन्वय में समय लगता था।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद झारखंड और बंगाल के बीच फैले कथित क्रॉस-बॉर्डर सिंडिकेट्स पर कार्रवाई तेज हो सकती है। माना जा रहा है कि ईडी अब मनी ट्रेल को ज्यादा प्रभावी तरीके से ट्रैक कर सकेगी और फर्जी कंपनियों के नेटवर्क तक आसानी से पहुंच बना पाएगी।
पूर्वी भारत में ED की बड़ी रणनीति
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि पूर्वी भारत में आर्थिक अपराधों के खिलाफ ईडी की नई रणनीति का हिस्सा है। झारखंड में कोयला और खनन से जुड़े मामलों के तार लगातार बंगाल से जुड़ते रहे हैं। ऐसे में दोनों जोन को एक कमान के तहत लाना एजेंसी की जांच क्षमता को मजबूत करेगा।
सूत्र यह भी बताते हैं कि आने वाले दिनों में कई पुराने मामलों की फाइलें दोबारा खोली जा सकती हैं और संयुक्त जांच के जरिए बड़े नेटवर्क पर कार्रवाई संभव है।
पूजा सिंघल केस में 13 मई को आएगा फैसला
इधर, चर्चित मनरेगा मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल के पति अभिषेक झा की विदेश यात्रा याचिका पर ईडी कोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई है। अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब इस मामले में 13 मई को निर्णय सुनाया जाएगा। अभिषेक झा ने बेटी के इलाज के लिए सिंगापुर जाने की अनुमति मांगी है। इससे पहले अदालत पूजा सिंघल को भी विदेश यात्रा की अनुमति दे चुकी है।
गौरतलब है कि मनरेगा घोटाला मामले की जांच के दौरान ईडी ने पूजा सिंघल, उनके पति अभिषेक झा और सीए सुमन कुमार सिंह के ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान सीए सुमन कुमार सिंह के यहां से 19.31 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए थे। इसके बाद 11 मई 2022 को ईडी ने पूजा सिंघल को गिरफ्तार किया था।
आने वाले दिनों में बढ़ सकती है कार्रवाई
ईडी के इस फैसले के बाद झारखंड और पश्चिम बंगाल में चल रहे कई हाई-प्रोफाइल मामलों की जांच तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी इस कदम को लेकर चर्चाएं तेज हैं। माना जा रहा है कि संयुक्त कमान के जरिए एजेंसी अब बड़े आर्थिक नेटवर्क और हवाला चैनलों पर अधिक प्रभावी तरीके से शिकंजा कस सकेगी।






