हजारीबाग ट्रेजरी घोटाला: मास्टरमाइंड शंभु का बड़ा कबूलनामा, 31 फर्जी आईडी से हर महीने उड़ाए 50 लाख
हजारीबाग ट्रेजरी घोटाले में मास्टरमाइंड शंभु कुमार का बड़ा खुलासा, 31 फर्जी आईडी के जरिए हर महीने 50 लाख की अवैध निकासी, 15 करोड़ रुपये रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर, जांच एजेंसियां मनी ट्रेल खंगालने में जुटीं।
- हजारीबाग ट्रेजरी घोटाले में चौंकाने वाले खुलासे
- मास्टरमाइंड ने खोले राज,रिश्तेदारों को बांटे 15 करोड़!
रांची/हजारीबाग(Threesocieties.com Desk): झारखंड के चर्चित हजारीबाग ट्रेजरी घोटाले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए और हैरान करने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। इस पूरे घोटाले के मास्टरमाइंड शंभु कुमार ने पुलिस के सामने जो कबूलनामा किया है, उसने सिस्टम की खामियों और भ्रष्टाचार की गहराई को उजागर कर दिया है।
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31 फर्जी आईडी से चलता था करोड़ों का खेल
शंभु कुमार ने कबूल किया कि उसने शुरुआत में सिर्फ 4 फर्जी टेंपररी आईडी बनाकर अवैध निकासी शुरू की थी। लेकिन धीरे-धीरे इस नेटवर्क को बढ़ाकर 2025 तक 31 फर्जी आईडी कर दिया। इन आईडी के जरिए वह हर महीने 40 से 50 लाख रुपये तक की निकासी करता था।
परिवार के खातों में ट्रांसफर किए 15 करोड़
जांच में यह भी सामने आया कि शंभु ने अवैध कमाई का बड़ा हिस्सा अपने करीबी रिश्तेदारों में बांटा। पत्नी काजल, बहन संगीता चौधरी व
बहनोई राकेश चौधरी इन सभी के खातों में मिलाकर 15 करोड़ रुपये से अधिक ट्रांसफर किए गए। इसके अलावा सहयोगियों को भी आर्थिक लाभ पहुंचाया गया।
कुछ समय रोका खेल, फिर और तेज़ी से शुरू
लगातार निकासी के बाद शंभु ने कुछ महीनों के लिए इस गोरखधंधे को रोका, लेकिन फिर और बड़े स्तर पर इसे शुरू कर दिया। इस बार फर्जी आईडी का नेटवर्क तेजी से फैलाकर 31 तक पहुंचा दिया गया।
गया में खरीदी करोड़ों की संपत्ति
घोटाले के पैसों से शंभु ने बिहार के गया में कई जगहों पर संपत्ति खरीदी:
चेरकी रोड
टोल प्लाजा के पास
एयरपोर्ट के आसपास जमीन
मुस्तफाबाद एग्रो कॉलोनी में 700 वर्ग फीट जमीन
इन संपत्तियों की कुल कीमत 15 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।
सिस्टम की खामी का उठाया फायदा
इंदिरा गांधी ओपन यूनिवर्सिटी से इतिहास में ग्रेजुएट शंभु ने 2009 में बाल सिपाही के रूप में नौकरी शुरू की थी। 2013 में अकाउंट सेक्शन में कंप्यूटर ऑपरेटर बनने के बाद उसने सिस्टम की खामियों को समझा और उसका फायदा उठाया। उसने पहले अपने खाते पर ‘टेस्ट ट्रांजेक्शन’ किया और फिर धीरे-धीरे फर्जी आईडी बनाकर पूरा नेटवर्क खड़ा कर दिया।
सौरभ सिंह के पास मिली 1.5 करोड़ की FD
जांच के दौरान एक और बड़ा खुलासा हुआ है। आरोपी सौरभ सिंह के पास करीब डेढ़ करोड़ रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) मिली है।
अब जांच एजेंसियां इस रकम के स्रोत और पूरे मनी ट्रेल की गहराई से जांच कर रही हैं।
प्रशासन का सख्त रुख, संपत्ति होगी जब्त
मुख्य आरोपी शंभु कुमार और अमीर बानो को नोटिस जारी कर 15 अप्रैल तक जवाब देने का अंतिम मौका दिया गया है। यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है तो संपत्तियों को सीज किया जाएगा व मकानों को प्रशासनिक नियंत्रण में लिया जाएगा।
बोकारो में भी सामने आई गड़बड़ी
बोकारो ट्रेजरी जांच में भी बड़ा खुलासा हुआ है। कम अबसेंटी रिपोर्ट भेजी जाती थी। लेकिन एसपी ऑफिस से कई गुना अधिक बिल ट्रेजरी को भेजे जाते थे। इससे साफ है कि डीडीओ स्तर पर भारी लापरवाही या मिलीभगत थी।
सरकार एक्शन में, एक-एक पैसा होगा रिकवर
राज्य के वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव ने साफ कहा है कि दोषियों की चल-अचल संपत्ति जब्त की जाएगी। घोटाले का एक-एक पैसा वसूला जाएगा। इसके लिए एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी की अध्यक्षता में जांच कमेटी बनाई गई है।
जांच का दायरा बढ़ा, और खुलासों की उम्मीद
जांच एजेंसियां अब बैंक खातों, संपत्तियों व निवेश और लेन-देन की गहराई से जांच कर रही हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस घोटाले में और भी बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
हजारीबाग में फर्जीवाड़े के मास्टरमाइंड का कबूलनामा... शुरुआत में चार फर्जी टेंपररी आईडी बनाई, वर्ष 2025 में इसे बढ़ाकर 31 कर दियाशंभु ने हर माह निकाले 50 लाख रुपए, अबतक पत्नी, बहन और बहनोई को दिए 15 करोड़ Threesocieties.com के लिए कैची हेडिंग, के साथ न्यूज बनायें हजारीबाग में फर्जीवाड़े के मास्टरमाइंड का कबूलनामा... शुरुआत में चार फर्जी टेंपररी आईडी बनाई, वर्ष 2025 में इसे बढ़ाकर 31 कर दियाशंभु ने हर माह निकाले 50 लाख रुपए, अबतक पत्नी, बहन और बहनोई को दिए 15 करोड़ रांची/हजारीबाग हजारीबाग ट्रेजरी घोटाले का मास्टरमाइंड शंभु कुमार ने पुलिस पूछताछ में स्वीकार किया कि वह हर महीने 40 से 50 लाख रुपए की अवैध निकासी फर्जी बनाए गये टेंपररी आईडी के जरिए करता था। शुरुआत में उसने चार आईडी से यह खेल शुरू किया, लेकिन वर्ष 2024-25 में इनकी संख्या बढ़ाकर नौ कर दी।
पत्नी काजल, बहन संगीता चौधरी और जीजा राकेश चौधरी के खातों में 15 करोड़ रुपये किये ट्रांसफर
शंभु ने पत्नी काजल, बहन संगीता चौधरी और जीजा राकेश चौधरी के खातों में 15 करोड़ रुपए से अधिक ट्रांसफर किए। इसके अलावा अपने सहयोगियों पंकज कुमार सिंह उर्फ रजनीश और धीरेंद्र को भी आर्थिक लाभ पहुंचाया।कुछ महीनों तक रोका खेल, फिर शुरू की ताबड़तोड़ निकासी शंभु ने बताया कि लगातार अवैध निकासी के बाद उसने 2025 में कुछ महीनों के लिए इसे रोक दिया था। लेकिन फिर से निकासी शुरू कर दी। इस बार उसने फर्जी आईडी का नेटवर्क बढ़ाकर 31 तक पहुंचा दिया। सबसे ज्यादा पैसे जिन खातों में भेजे गए, उनमें उसका खुद का एसबीआई खाता, पत्नी काजल, बहन संगीता और जीजा राकेश चौधरी के खाते शामिल हैं। 2024-25 के दौरान गया में संपत्ति खरीदी। इसमें चेरकी रोड, टोल प्लाजा और एयरपोर्ट के पास जमीन शामिल है। मुस्तफाबाद एग्रो कॉलोनी में 700 वर्ग फीट जमीन अपने नाम ली। इनकी कीमत 15 करोड़ से ज्यादा है।
15 साल से अकाउंट सेक्शन में कब्जा कर था शंभू सिंह
ऑपरेटर की नौकरी में सीखा सिस्टम, इसके बाद किया खेल इंदिरा गांधी ओपन यूनिवर्सिटी से इतिहास में ग्रेजुएट शंभु 2009 में बाल सिपाही के रूप में भर्ती हुआ था। 2013 में उसे अकाउंट सेक्शन में कंप्यूटर ऑपरेटर बनाया गया। यहीं काम करते हुए उसने समझा कि वेतन मद में भुगतान के लिए जीपीएफ या ईपीएफ नंबर जरूरी होता है। इसी सिस्टम की खामी का फायदा उठाते हुए उसने सबसे पहले अपने खाते पर 'टेस्ट ट्रांजेक्शन' किया। इसके बाद पत्नी, बहन और जीजा के खातों को जोड़कर फर्जी आईडी बनाई और धीरे-धीरे पूरे नेटवर्क को फैलाया। जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क, संपत्ति और बैंक ट्रेल को खंगाल रही हैं, जिससे घोटाले का दायरा और बढ़ने की आशंका है।
आरोपी सौरभ सिंह के पास मिली डेढ़ करोड़ की FD
हजारीबाग के 28 करोड़ रुपये के कोषागार घोटाले के एक आरोपित एक भाई सौरभ सिंह के पास करीब डेढ़ करोड़ रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) मिली है। सूत्रों के अनुसार, जांच टीम बैंक खातों, वित्तीय लेन-देन और संदिग्ध निवेशों की पड़ताल कर रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि घोटाले की रकम किन माध्यमों से इधर-उधर की गई और किन-किन लोगों तक पहुंची। सौरभ सिंह के नाम पर मिली एफडी को इस घोटाले की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है, जिससे कई और नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
संपत्ति को किया जायेगा सीज
मामले के मुख्य आरोपी शंभू कुमार (पिता स्व. नंदकिशोर चौधरी) और अमीर बानो (पति सैयद बाकर मेहदी) को खास महल पदाधिकारी द्वारा जारी नोटिस का अब तक कोई जवाब नहीं मिला है। प्रशासन ने दोनों को 15 अप्रैल तक अंतिम अवसर दिया है। तय समय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की स्थिति में प्रशासन सख्त कदम उठाने की तैयारी में है। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि यदि दोनों आरोपियों की ओर से जवाब नहीं आता है, तो संबंधित संपत्तियों को सीज किया जा सकता है। इसके तहत मकान के चारों ओर चाहरदीवारी बनाकर उसे प्रशासनिक नियंत्रण में लेने की कार्रवाई की जायेगी। इससे साफ है कि प्रशासन अब इस मामले में किसी भी तरह की ढिलाई के मूड में नहीं है। जांच के दौरान शंभू कुमार की संपत्ति को लेकर भी कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। शक की सुई गहराई जानकारी के मुताबिक, सदर प्रखंड के सारले स्थित भवानी चौक पर लगभग 15 लाख रुपये में जमीन खरीदकर बिना विधिवत लीज हस्तांतरण के चार मंजिला इमारत खड़ी कर दी गई। इतनी कम कीमत में जमीन की खरीद और उस पर बहुमंजिला भवन का निर्माण संदेह को और गहरा कर रहा है।
झारखंड में अब तक 30 से 40 करोड़ रुपए के ट्रेजरी घोटाले सामने आ चुके हैं, जिनमें बोकारो और हजारीबाग के मामले प्रमुख हैं। पूरे मामले की जांच के लिए एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई है, जो निकासी की प्रक्रिया से लेकर सिस्टम की खामियों तक की जांच करेगी।
बोकारो में जांच टीम ने पकड़ी गड़बड़ी
अबसेंटी कम थी, पर एसपी ऑफिस कई गुना अधिक राशि का बिल ट्रेजरी को भेज देता था।बोकारो ट्रेजरी में सामने आए 6 करोड़ रुपए से अधिक के वेतन घोटाले की जांच में चौंकाने वाली गड़बड़ियां मिली हैं। जांच में सामने आया कि पुलिस लाइन से सिपाहियों और पुलिस पदाधिकारियों के वेतन भुगतान के लिए कम संख्या में अबसेंटी (अनुपस्थिति रिपोर्ट) भेजी जाती थी, लेकिन उसके अनुरूप बिल तैयार नहीं होता था। इसके उलट, एसपी ऑफिस कई गुना अधिक राशि का बिल बनाकर ट्रेजरी को भेज देता था। इससे स्पष्ट हुआ कि ट्रेजरी को बिल भेजते समय डीडीओ स्तर पर अबसेंटी और बिल का मिलान नहीं किया जा रहा था। बोकारो में जांच टीम ने ट्रेजरी, एसपी ऑफिस और पुलिस लाइन में रिकॉर्ड की गहन जांच की और संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों से पूछताछ की। -
निष्कर्ष
हजारीबाग ट्रेजरी घोटाला सिर्फ एक वित्तीय अपराध नहीं, बल्कि सिस्टम की बड़ी विफलता और संगठित भ्रष्टाचार का उदाहरण बनकर सामने आया है। जिस तरह से फर्जी आईडी के जरिए करोड़ों की निकासी हुई, उसने पूरे प्रशासनिक ढांचे पर सवाल खड़े कर दिए हैं।अब देखना यह होगा कि जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क का कितना बड़ा पर्दाफाश कर पाती हैं और दोषियों को कब तक सजा मिलती है।






