झमाडा के 39 आश्रितों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, अनुकंपा नियुक्ति पर 3 महीने में फैसला लेने का आदेश
झारखंड हाईकोर्ट ने झमाडा के दिवंगत कर्मियों के 39 आश्रितों को बड़ी राहत देते हुए अनुकंपा नियुक्ति मामले में नया प्रतिनिधित्व देने की अनुमति दी है। कोर्ट ने झमाडा प्रबंध निदेशक को तीन माह के भीतर निर्णय लेने और अनुकूल आदेश होने पर चार सप्ताह में कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
HighLights
- अनुकंपा नियुक्ति के लिए नया प्रतिनिधित्व देने की छूट मिली
- प्रबंध निदेशक को 3 माह में निर्णय लेने का निर्देश
- अनुकूल फैसला होने पर 4 सप्ताह के भीतर कार्रवाई होगी
- पिछले चार वर्षों से बहाली की मांग कर रहे हैं आश्रित।
- करीब 180 आश्रितों की निगाहें अब झमाडा प्रबंधन पर टिकीं
रांची/धनबाद (Threesocieties.com Desk): झारखंड खनिज क्षेत्र विकास प्राधिकरण (झमाडा) में कार्यरत दिवंगत कर्मचारियों के आश्रितों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। झारखंड हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े मामले में 39 याचिकाकर्ताओं को नया प्रतिनिधित्व दाखिल करने की अनुमति देते हुए झमाडा प्रबंधन को समयबद्ध निर्णय लेने का निर्देश दिया है। अदालत के इस आदेश के बाद वर्षों से नौकरी की आस लगाए बैठे आश्रितों में नई उम्मीद जगी है।
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न्यायमूर्ति दीपक रोशन की एकलपीठ ने डब्ल्यूपी (एस) संख्या 2139/2026 की सुनवाई करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता झमाडा के प्रबंध निदेशक के समक्ष नया आवेदन प्रस्तुत करें। आवेदन प्राप्त होने के बाद संबंधित प्राधिकारी को कानून और नियमों के अनुरूप तीन माह के भीतर निर्णय लेना होगा।
39 आश्रितों ने खटखटाया था हाईकोर्ट का दरवाजा
धनबाद और आसपास के क्षेत्रों के 39 आश्रितों ने राज्य सरकार, नगर विकास एवं आवास विभाग तथा झमाडा को पक्षकार बनाते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उनके परिजनों की सेवा के दौरान मृत्यु हो गई थी और अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन वर्षों से लंबित पड़े हैं।याचिका में कहा गया था कि झमाडा अधिनियम 2000 की धारा-5 के तहत प्राधिकरण के सदस्यों की नियुक्ति नहीं होने के कारण उनके मामलों पर विचार नहीं किया जा रहा है। इससे दर्जनों परिवार आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।
सुनवाई के दौरान बदली गई रणनीति
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता बैभव गहलौत ने अदालत को बताया कि फिलहाल उन्हें संबंधित अधिकारियों के समक्ष अपनी मांग रखने की स्वतंत्रता दी जाए। वहीं राज्य सरकार की ओर से भी यह कहा गया कि यदि याचिकाकर्ता नया प्रतिनिधित्व देते हैं तो उस पर नियमानुसार विचार किया जाएगा। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मामले का निपटारा करते हुए प्रशासनिक स्तर पर निर्णय लेने का रास्ता प्रशस्त कर दिया।
तीन माह में फैसला, चार सप्ताह में कार्रवाई
हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया कि जैसे ही प्रबंध निदेशक को आवेदन प्राप्त होगा, वह अधिकतम तीन माह के भीतर निर्णय लें। यदि निर्णय याचिकाकर्ताओं के पक्ष में जाता है तो उसके बाद चार सप्ताह के भीतर आवश्यक कार्रवाई और आदेश जारी किए जाएं।अदालत ने यह भी कहा कि पूरी प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए और समयसीमा का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए।
चार वर्षों से जारी है संघर्ष
गौरतलब है कि झमाडा के दिवंगत कर्मियों के लगभग 180 आश्रित पिछले चार वर्षों से अनुकंपा नियुक्ति की मांग को लेकर आंदोलन और धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका आरोप रहा है कि राज्य सरकार के निर्देशों के बावजूद नियुक्ति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई गई। इसी कारण कई आश्रितों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद न केवल 39 याचिकाकर्ताओं बल्कि अन्य आश्रित परिवारों में भी उम्मीद जगी है कि लंबे समय से लंबित बहाली प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।
प्रबंध निदेशक से मिले आश्रित
कोर्ट का आदेश आने के बाद आश्रितों ने झमाडा के प्रबंध निदेशक से मुलाकात कर आदेश की प्रति सौंपी और जल्द से जल्द बहाली प्रक्रिया शुरू करने की मांग की। आश्रितों का कहना है कि यह केवल नौकरी का मामला नहीं है, बल्कि उनके परिवारों के जीवनयापन, बच्चों की शिक्षा और भविष्य से जुड़ा प्रश्न है।
अब झमाडा प्रबंधन पर टिकी निगाहें
हाईकोर्ट के आदेश ने अनुकंपा नियुक्ति की प्रक्रिया को नई दिशा दी है। हालांकि अंतिम फैसला अब झमाडा प्रबंधन के हाथ में है। यदि निर्धारित समयसीमा के भीतर निर्णय लिया जाता है तो वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे परिवारों को बड़ी राहत मिल सकती है।फिलहाल धनबाद और झरिया क्षेत्र के सैकड़ों आश्रित परिवारों की निगाहें झमाडा प्रबंधन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। सभी को उम्मीद है कि न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए नियुक्ति प्रक्रिया जल्द पूरी की जाएगी।






