झारखंड वेतन घोटाला: क्लर्क ने राष्ट्रपति से भी ज्यादा लिया वेतन, रांची SSP खाते में 5 Payee के नाम से निकासी

झारखंड के वेतन-ट्रेजरी घोटाले में बड़ा खुलासा हुआ है। पशुपालन विभाग के एक क्लर्क ने 23 महीनों में 1.54 करोड़ रुपये वेतन निकाला, जिसमें दो महीने राष्ट्रपति से भी ज्यादा वेतन लिया। वहीं रांची SSP के खाते में 5 अलग-अलग Payee के नाम से निकासी का मामला सामने आया है।

झारखंड वेतन घोटाला: क्लर्क ने राष्ट्रपति से भी ज्यादा लिया वेतन, रांची SSP खाते में 5 Payee के नाम से निकासी
महालेखाकार (AG) की जांच में हुआ खुलासा।

रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड के बहुचर्चित वेतन-ट्रेजरी घोटाले में अब ऐसे खुलासे सामने आ रहे हैं, जिन्होंने पूरे प्रशासनिक तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है। महालेखाकार (AG) की जांच में पता चला है कि पशुपालन विभाग के एक क्लर्क ने राष्ट्रपति से भी अधिक वेतन अपने खाते में ट्रांसफर करा लिया। वहीं, रांची SSP के खाते में भी पांच अलग-अलग Payee के नाम से निकासी का मामला सामने आया है।

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यह खुलासा सिर्फ वित्तीय गड़बड़ी नहीं, बल्कि सरकारी ट्रेजरी सिस्टम में गहरी जालसाजी और निगरानी की भारी विफलता को उजागर करता है।

23 महीने में 1.54 करोड़ रुपये निकाले

पशुपालन विभाग के क्लर्क मुनिंद्र कुमार ने अगस्त 2023 से दिसंबर 2025 के बीच केवल वेतन मद में अपने खाते में कुल 1.54 करोड़ रुपये की निकासी कर ली। जांच में सामने आया कि उसने अपना मूल वेतन (Basic Salary) मनमाने तरीके से बढ़ाया और उसी आधार पर भारी भुगतान लेता रहा। जबकि उसका वास्तविक मूल वेतन सिर्फ 37,200 रुपये था, उसने कई महीनों तक खुद को लाखों रुपये मूल वेतन वाला अधिकारी दिखाया।

राष्ट्रपति से भी ज्यादा वेतन लिया

सबसे चौंकाने वाला मामला मार्च 2024 और अप्रैल 2025 का है, जब मुनिंद्र कुमार ने अपना मूल वेतन 12-12 लाख रुपये दिखाया। इसके साथ: 6-6 लाख रुपये महंगाई भत्ता व 2.16-2.16 लाख रुपये आवास भत्ता जोड़कर उसने दोनों महीनों में 20.19-20.19 लाख रुपये वेतन लिया। भारत के राष्ट्रपति का मासिक वेतन लगभग 10 लाख रुपये है। यानी एक क्लर्क ने दो महीने तक राष्ट्रपति से दोगुना वेतन उठा लिया और DDO से लेकर Treasury Officer तक किसी ने इसे नहीं पकड़ा।

मुख्य सचिव से भी ज्यादा Basic Salary

राज्य के मुख्य सचिव का मूल वेतन 2.25 लाख रुपये निर्धारित है और इससे अधिक किसी भी सरकारी कर्मचारी का मूल वेतन नहीं हो सकता। लेकिन मुनिंद्र कुमार ने: 2.50 लाख, 4.32 लाख, 4.88 लाख, 10 लाख व  12 लाख रुपये तक का मूल वेतन दिखाकर भुगतान लिया।

जांच में पाया गया कि: 6 महीने 2.50 लाख,2 महीने 12 लाख, 1 महीना 10 लाख, 2 महीने 4.88 लाख, 1 महीना 4.32 लाख, 3 महीने 2.05 लाख, 1 महीना 2 लाख व  3 महीने 1.19 लाख के आधार पर निकासी की गई।

कुल निकासी का पूरा हिसाब

महालेखाकार की रिपोर्ट के अनुसार:

मूल वेतन: 79.64 लाख रुपये
महंगाई भत्ता: 41.28 लाख रुपये
आवास भत्ता: 15.23 लाख रुपये
यात्रा भत्ता: 79,030 रुपये
चिकित्सा भत्ता: 19,500 रुपये
बकाया राशि: 17 लाख रुपये

कुल मिलाकर 1.54 करोड़ रुपये की निकासी की गई।

रांची SSP खाते में भी गड़बड़ी

जांच के दौरान रांची SSP के खाते में भी 1,47,477 रुपये की संदिग्ध निकासी का मामला सामने आया। यह निकासी दिसंबर 2017 से मार्च 2025 के बीच की गई। रांची कोर्ट कंपाउंड स्थित स्टेट बैंक के अकाउंट नंबर में 5 अलग-अलग Payee के नाम पर भुगतान हुआ।

जांच में सामने आया कि इसके लिए अलग-अलग DDO कोड इस्तेमाल किए गए:

DRNPOL002
KHNPOL001
PRJPOL034
RNCPOL010
SKLPOL002

यह मामला दर्शाता है कि सरकारी भुगतान प्रणाली में लंबे समय से गंभीर स्तर पर छेड़छाड़ की जा रही थी।

DDO और Treasury Officer की भूमिका पर सवाल

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब एक क्लर्क लाखों रुपये का फर्जी वेतन निकाल रहा था, तब DDO (Drawing and Disbursing Officer) और TO (Treasury Officer) क्या कर रहे थे? क्या यह सिर्फ लापरवाही थी, या फिर इसमें अंदरूनी मिलीभगत भी शामिल है?महालेखाकार की रिपोर्ट ने अब पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

अब क्या होगी कार्रवाई?

सरकारी सूत्रों के अनुसार इस मामले में विस्तृत जांच और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा सकती है। यदि निष्पक्ष जांच हुई, तो कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं। झारखंड का यह वेतन घोटाला अब सिर्फ एक क्लर्क की हेराफेरी नहीं, बल्कि पूरे ट्रेजरी सिस्टम की पोल खोलने वाला मामला बन चुका है।